
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 की शाम हंगामा हो गया। टाउन हॉल के पास प्रदर्शन करने पहुंचे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, करीब 75 से 80 लोगों को हिरासत में लिया गया, हालांकि एक प्रमुख समाचार रिपोर्ट में यह संख्या लगभग 50 बताई गई है। सभी हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में छोड़ दिया गया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शन रोकने के लिए बल प्रयोग किया, जिससे कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि टाउन हॉल पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और निर्धारित स्थल फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन करने के निर्देश दिए गए थे।
टाउन हॉल के पास प्रदर्शन करने पहुंचे थे कार्यकर्ता
जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता बेंगलुरु के ऐतिहासिक टाउन हॉल के पास एकत्र हुए थे।
प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में एसआईआर प्रक्रिया को वापस लेना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल था।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की मौजूदा प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने झंडे लहराने और नारेबाजी करने की कोशिश की। इसी दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई के बाद वहां कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई।
करीब 75 से 80 लोगों को हिरासत में लेने का दावा
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पुलिस ने लगभग 75 से 80 लोगों को हिरासत में लिया।
हालांकि, समाचार एजेंसी और स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 50 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।
पुलिस प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर चामराजपेट स्थित मैसूर रोड के सिटी आर्म्ड रिजर्व (CAR) मैदान ले गई।
वहां कुछ समय तक हिरासत में रखने के बाद सभी को रिहा कर दिया गया।
इस मामले में प्रदर्शनकारियों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने या औपचारिक गिरफ्तारी किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग का आरोप लगाया
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की है।
उनका आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन हटाया और बसों में बैठाने के लिए धक्का-मुक्की की।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, इस दौरान कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं और कई कार्यकर्ताओं ने शरीर तथा मांसपेशियों में दर्द होने की शिकायत की।
कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके कपड़े फट गए।
हालांकि, चोटों की संख्या, उनकी गंभीरता और पुलिस द्वारा बल प्रयोग की परिस्थितियों के संबंध में कोई स्वतंत्र चिकित्सकीय रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।
इन आरोपों पर पुलिस का विस्तृत जवाब भी सामने नहीं आया है।
महिला पुलिसकर्मियों के पहचान बैज पर उठाए सवाल
प्रदर्शन में शामिल कुछ कार्यकर्ताओं ने महिला पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि हिरासत में लेने के दौरान कुछ महिला पुलिसकर्मियों ने अपने पहचान बैज नहीं लगाए हुए थे।
कार्यकर्ताओं ने बताया कि जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपनी पहचान स्पष्ट करने के लिए कहा, तब भी उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस की किसी भी कार्रवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए।
हालांकि, महिला पुलिसकर्मियों के पहचान बैज नहीं पहनने संबंधी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस ने पहले ही प्रदर्शन की अनुमति देने से किया था इनकार
बेंगलुरु पुलिस के अनुसार, टाउन हॉल के पास विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से संबंधित पुलिस अधिकारियों को प्रदर्शन आयोजित करने के लिए आवेदन दिया गया था।
पुलिस ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए आवेदन स्वीकार नहीं किया।
अधिकारियों ने कहा कि बेंगलुरु में विरोध प्रदर्शन के लिए फ्रीडम पार्क निर्धारित स्थान है। इसलिए संगठनों को वहीं कार्यक्रम आयोजित करने की सलाह दी गई थी।
पुलिस ने 17 अक्टूबर को नोटिस जारी कर प्रदर्शनकारियों को निर्धारित नियमों का पालन करने और अन्य स्थानों पर विरोध प्रदर्शन नहीं करने के निर्देश दिए थे।
प्रदर्शन रोकने के लिए लगाए गए थे बैरिकेड
टाउन हॉल के आसपास पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।
प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
क्षेत्र में पुलिस की कई टुकड़ियां मौजूद थीं। अधिकारियों ने स्थिति पर नजर रखते हुए प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान पर जाने के लिए कहा।
इसके बावजूद कुछ कार्यकर्ता टाउन हॉल के पास पहुंचे और विरोध दर्ज कराने का प्रयास किया।
पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लेने के दौरान आसपास के यातायात पर भी असर पड़ा।
टाउन हॉल क्षेत्र में कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के रवैये पर उठाए सवाल
प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की।
उनका कहना है कि एक तरफ सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ विरोध दर्ज कराने पहुंचे कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता नरसिम्हामूर्ति ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों को हिरासत में लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन को नागरिकों के विरोध दर्ज कराने के अधिकार का सम्मान करना चाहिए।
पहले भी पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ चुका है विवाद
बेंगलुरु में एसआईआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर पहले भी पुलिस कार्रवाई विवादों में रही है।
12 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के पास प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।
उस दौरान महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ कथित धक्का-मुक्की के आरोप सामने आए थे।
घटना के बाद कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने पुलिस कार्रवाई की समीक्षा के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी और अनुचित बल प्रयोग पाए जाने पर जवाबदेही तय करने की बात कही थी। यह कार्रवाई 12 अक्टूबर की घटना से जुड़ी थी; शनिवार की घटना पर किसी नई जांच के आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर जारी है विवाद
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर मतदाता सूची की जांच और संशोधन से जुड़ी प्रक्रिया है।
इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और सूची में मौजूद त्रुटियों को ठीक करना है।
हालांकि, विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दस्तावेज संबंधी कठिनाइयों के कारण कुछ पात्र मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।
दूसरी ओर, मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के समर्थकों का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियमित सत्यापन जरूरी है।
इसी मुद्दे पर देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
हिरासत से रिहाई के बाद भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान
शनिवार को बेंगलुरु टाउन हॉल के पास हुई घटना ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन का सवाल खड़ा कर दिया है।
पुलिस ने अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और बाद में छोड़ दिया।
वहीं, कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर अनुचित बल प्रयोग करने और विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया है।
फिलहाल प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं। पुलिस पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच या किसी नई प्रशासनिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।





