
कारवार। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के कारवार तालुक स्थित मुदागा फिशिंग हार्बर में शनिवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गया। मछली पकड़ने वाली नाव के स्टोरेज चैंबर की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग बीमार पड़ गए। मृतकों की पहचान ओडिशा निवासी पुरंदरा बिसरा (21) और आकाश नाइका (24) के रूप में हुई है। वहीं, 41 वर्षीय मजदूर लालिंधर ध्रुवा की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक दीपन एम.एन. ने घटनास्थल का दौरा किया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह हादसा मछली पकड़ने वाली नाव 'मूकांबिका' में हुआ। नाव मछली पकड़कर मुदागा बंदरगाह लौटी थी। इसके बाद नाव में रखी मछलियों को उतारने का काम किया गया। मछलियां निकालने के बाद मजदूर स्टोरेज चैंबर की सफाई करने के लिए उसके अंदर पहुंचे। इसी दौरान सड़ी हुई मछलियों से निकलने वाली जहरीली गैस की चपेट में आकर मजदूरों की तबीयत बिगड़ने लगी।
बताया जा रहा है कि चैंबर के भीतर जहरीली गैस का जमाव इतना अधिक था कि वहां काम कर रहे लोग सांस लेने में असमर्थ हो गए। कुछ ही समय में कई मजदूर बेहोश होकर गिर पड़े। इस घटना में पुरंदरा बिसरा और आकाश नाइका की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, अन्य मजदूरों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। लालिंधर ध्रुवा को गंभीर स्थिति में आईसीयू में भर्ती कराया गया है।
बिना सुरक्षा इंतजाम के चैंबर में सफाई का काम
मछली पकड़ने वाली नावों में बड़ी मात्रा में मछलियों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष स्टोरेज चैंबर बनाए जाते हैं। इन चैंबरों में मछलियों को रखने और निकालने के बाद नियमित सफाई की जरूरत होती है। लेकिन बंद और कम हवादार स्थानों में मछलियों के सड़ने से खतरनाक गैसें पैदा हो सकती हैं। ऐसे स्थानों में प्रवेश करने से पहले गैस की जांच और पर्याप्त वेंटिलेशन बेहद जरूरी होता है।
इस हादसे में भी आशंका है कि सड़ी हुई मछलियों से निकली जहरीली गैस चैंबर के भीतर जमा हो गई थी। मजदूर जब सफाई के लिए अंदर पहुंचे तो वे इसकी चपेट में आ गए। हालांकि, गैस की सटीक मात्रा और घटनास्थल पर मौजूद सुरक्षा उपकरणों की स्थिति की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
करीब 41 वर्षीय लालिंधर ध्रुवा की हालत गंभीर होने के कारण उसे आईसीयू में रखा गया है। अन्य प्रभावित मजदूरों का भी उपचार कराया गया। हादसे के बाद बंदरगाह पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
ओडिशा के रहने वाले थे दोनों मृतक मजदूर
मृतक पुरंदरा बिसरा की उम्र 21 वर्ष और आकाश नाइका की उम्र 24 वर्ष थी। दोनों मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले थे और मछली पकड़ने वाली नाव पर मजदूरी करते थे। रोजगार के सिलसिले में वे कर्नाटक के तटीय इलाके में काम कर रहे थे।
हादसे में प्रभावित 41 वर्षीय लालिंधर ध्रुवा भी ओडिशा के रहने वाले बताए गए हैं। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों की निगरानी में आईसीयू में उपचार किया जा रहा है। अन्य प्रभावित मजदूरों को भी चिकित्सा सहायता दी गई।
पुलिस अधीक्षक ने घटनास्थल का किया निरीक्षण
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे। उत्तर कन्नड़ के पुलिस अधीक्षक दीपन एम.एन. ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में नाव के स्टोरेज चैंबर की स्थिति, मछलियों के खराब होने की परिस्थितियों और सफाई के दौरान अपनाई गई सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल की जा रही है।
प्रारंभिक रिपोर्टों में बताया गया है कि नाव पर 'चमन' नामक मछली की बड़ी खेप लाई गई थी। लंबे समय तक रखे रहने और खराब होने के कारण इससे जहरीली गैस निकलने की आशंका जताई गई है। ऐसी स्थिति में बंद चैंबर के भीतर गैस जमा होने से दम घुटने का खतरा पैदा हो सकता है।
एक सप्ताह में दूसरी बड़ी गैस दुर्घटना
मुदागा फिशिंग हार्बर की यह घटना इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि इससे कुछ दिन पहले कर्नाटक के ही तडाडी फिशिंग हार्बर में इसी तरह का हादसा हुआ था। 27 अक्टूबर को गोकर्ण के पास तडाडी बंदरगाह पर नाव के स्टोरेज चैंबर की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मछुआरों की मौत हो गई थी।
उस घटना में भी चमन मछली के खराब होने से जहरीली गैस निकलने की आशंका जताई गई थी। लगातार दो घटनाओं में पांच लोगों की जान जाने के बाद मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
बंद स्टोरेज चैंबर में सफाई बेहद जोखिम भरा काम
विशेषज्ञों के अनुसार, मछलियों और अन्य जैविक पदार्थों के सड़ने से हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैस पैदा हो सकती है। यह गैस अधिक मात्रा में मौजूद होने पर कुछ ही समय में व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। बंद स्थानों में ऑक्सीजन की कमी भी दम घुटने का कारण बन सकती है।
ऐसे चैंबरों में सफाई शुरू करने से पहले गैस डिटेक्टर से जांच, पर्याप्त वेंटिलेशन और उचित श्वसन सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल जरूरी होता है। बिना सुरक्षा इंतजाम के अंदर जाना मजदूरों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
मुदागा में हुई इस घटना ने मछली पकड़ने वाली नावों और बंदरगाहों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने की आवश्यकता सामने ला दी है।
फिलहाल दो मजदूरों की मौत के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं, आईसीयू में भर्ती लालिंधर ध्रुवा के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है। अब प्रशासन के सामने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मछली भंडारण और सफाई की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने की चुनौती है।





