
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार लंबे समय से लंबित 'बगैर हुकुम' जमीन आवंटन और नियमितीकरण से जुड़े आवेदनों के जल्द निपटारे के लिए सरकारी सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने की तैयारी कर रही है। उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने विधानसभा में कहा कि तकनीकी स्तर पर जरूरी बदलाव किए जाएंगे, ताकि लंबित आवेदनों की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और तेज बनाया जा सके।
यह मुद्दा विधानसभा में चिकमगलूरु के विधायक एच.डी. थम्मय्या द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में सामने आया। विधायक ने 'बगैर हुकुम' सॉफ्टवेयर में लंबित आवेदनों और आवेदनों के निपटारे के दौरान आ रही समस्याओं के बारे में सरकार से जानकारी मांगी थी। जवाब में उपमुख्यमंत्री ने लंबित मामलों की स्थिति और उन्हें निपटाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
जमीन नियमितीकरण के लिए कानूनी प्रावधान
सरकार के अनुसार, कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम-1964 की धारा 94 के तहत ऐसी जमीन को नियमित करने का प्रावधान है, जिस पर संबंधित नियमों के विपरीत या बिना वैध आवंटन के खेती की जा रही हो। 'बगैर हुकुम' व्यवस्था इसी तरह की भूमि को निर्धारित शर्तों के तहत नियमित करने से संबंधित है।
कई वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के भूमि मामलों के लंबित रहने के कारण आवेदकों को रिकॉर्ड में जमीन दर्ज कराने और संबंधित दस्तावेज हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता रहा है। सरकार का कहना है कि तकनीकी प्रक्रिया को बेहतर बनाकर ऐसे मामलों के निपटारे में तेजी लाई जा सकती है।
26 सितंबर 2023 से 21 जनवरी 2024 तक मिले आवेदन
सरकार की ओर से विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, सरकारी वेबसाइट के माध्यम से 26 सितंबर 2023 से 21 जनवरी 2024 के बीच फॉर्म 50 से 53 के तहत आवेदन प्राप्त किए गए थे। इन आवेदनों का उद्देश्य संबंधित भूमि मामलों के निपटारे और नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था।
उपमुख्यमंत्री के मुताबिक, इन आवेदनों में से कई अभी अलग-अलग चरणों में लंबित हैं। यानी सभी मामलों की स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ आवेदन जांच, सत्यापन या प्रशासनिक प्रक्रिया के अलग-अलग स्तर पर हैं, जबकि कुछ मामलों में आगे की कार्रवाई की जरूरत है।
सरकार अब सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दे रही है। इससे अधिकारियों को आवेदनों की स्थिति की निगरानी करने और लंबित मामलों की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सॉफ्टवेयर अपग्रेड से क्या बदलेगा?
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि लंबित मामलों के तेजी से निपटारे के लिए 'बगैर हुकुम' सॉफ्टवेयर को अपग्रेड किया जाएगा। हालांकि सरकार ने तकनीकी बदलावों की पूरी रूपरेखा सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन सॉफ्टवेयर में सुधार से आवेदन प्रक्रिया और रिकॉर्ड प्रबंधन को अधिक सुगम बनाने का लक्ष्य है।
भूमि से जुड़े मामलों में दस्तावेजों की जांच, भौतिक सत्यापन, मंजूरी और राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टि जैसे कई चरण होते हैं। किसी एक स्तर पर देरी होने से पूरा मामला लंबे समय तक लंबित रह सकता है। ऐसे में ऑनलाइन प्रणाली को मजबूत करने से विभिन्न चरणों की निगरानी आसान हो सकती है।
मंजूर जमीन लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने का मामला
उपमुख्यमंत्री द्वारा दिए गए लिखित जवाब में एक महत्वपूर्ण स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया कि कुछ ऐसे मामले हैं, जहां जमीन मंजूर हो चुकी है और खेती के प्रमाण-पत्र भी जारी किए जा चुके हैं, लेकिन संबंधित जानकारी अभी तक सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं की गई है।
ऐसे मामलों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में जमीन मंजूर हो चुकी है और खेती के प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं, लेकिन रिकॉर्ड में प्रविष्टि नहीं हुई है, उन मामलों की समीक्षा फॉर्म 50-53 की भौतिक सत्यापन समिति (Physical Verification Committee) द्वारा नहीं की जा रही है।
इससे संकेत मिलता है कि मंजूरी और रिकॉर्ड अपडेट के बीच मौजूद मामलों के लिए अलग प्रक्रिया की जरूरत हो सकती है। सरकार के जवाब में इस स्थिति को स्पष्ट किया गया है, जिससे लंबित मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर निपटाने की आवश्यकता सामने आती है।
आवेदकों को राहत मिलने की उम्मीद
'बगैर हुकुम' से जुड़े मामलों में सबसे बड़ी समस्या लंबे समय तक चलने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया रही है। आवेदन जमा होने के बाद सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और रिकॉर्ड अपडेट जैसे चरणों में देरी होने से आवेदकों को परेशानी होती है।
सरकार के सॉफ्टवेयर अपग्रेड करने के फैसले से ऐसे आवेदकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके मामले लंबे समय से लंबित हैं। यदि आवेदन की स्थिति ऑनलाइन स्पष्ट रूप से उपलब्ध होती है तो आवेदकों और अधिकारियों दोनों के लिए प्रक्रिया को ट्रैक करना आसान हो सकता है।
रिकॉर्ड अपडेट पर भी ध्यान जरूरी
भूमि आवंटन या नियमितीकरण की प्रक्रिया में केवल मंजूरी देना ही पर्याप्त नहीं है। संबंधित जमीन का रिकॉर्ड राजस्व दस्तावेजों में सही तरीके से दर्ज होना भी जरूरी है। रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने की स्थिति में जमीन के मालिकाना हक, खेती और भविष्य के लेन-देन से जुड़े मामलों में समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
इसी वजह से सरकार के सामने लंबित आवेदनों के साथ-साथ उन मामलों को भी सुलझाने की चुनौती है, जिनमें मंजूरी और प्रमाण-पत्र जारी होने के बावजूद रिकॉर्ड अपडेट नहीं किया गया है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
कर्नाटक में 'बगैर हुकुम' जमीन से जुड़े लंबित मामलों की संख्या और उनकी अलग-अलग स्थिति को देखते हुए सरकार के सामने चुनौती बड़ी है। सॉफ्टवेयर अपग्रेड के साथ-साथ अधिकारियों के स्तर पर लंबित मामलों की समीक्षा और समयबद्ध निपटारे की जरूरत होगी।
विधानसभा में दिए गए जवाब से स्पष्ट है कि सरकार तकनीकी व्यवस्था में बदलाव के जरिए प्रक्रिया को तेज करना चाहती है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नया या अपग्रेड किया गया सॉफ्टवेयर कब लागू होता है और इससे फॉर्म 50-53 के तहत लंबित आवेदनों के निपटारे में कितनी तेजी आती है।
सरकार के इस कदम से उन हजारों आवेदकों को उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से अपनी जमीन से जुड़े मामलों के अंतिम निपटारे और रिकॉर्ड में दर्ज होने का इंतजार कर रहे हैं।





