
Karnataka कर्नाटक: केरल की त्रिशूर विधानसभा सीट से एक बार फिर राजनीतिक रूप से चर्चित उम्मीदवार पद्मजा वेणुगोपाल को हार का सामना करना पड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण की बेटी पद्मजा वेणुगोपाल इस बार भी चुनाव जीतने में असफल रहीं और यह उनकी लगातार तीसरी हार है। परिवार की मजबूत राजनीतिक विरासत और इलाके में प्रभाव के बावजूद वे इस बार भी तीसरे स्थान पर रहीं।
भारत के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 16 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद पद्मजा वेणुगोपाल को कुल 28,662 वोट प्राप्त हुए। वे इस मुकाबले में तीसरे स्थान पर रहीं। वहीं, CPI उम्मीदवार अलंकोड लीलाकृष्णन को 33,487 वोट मिले और उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया।
इस सीट पर UDF उम्मीदवार राजन जे पल्लन ने निर्णायक जीत दर्ज की। उन्हें कुल 60,290 वोट मिले और वे स्पष्ट बहुमत के साथ विजेता बने। उनकी यह जीत त्रिशूर में UDF के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता मानी जा रही है।
पद्मजा वेणुगोपाल को इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उनके समर्थकों से काफी उम्मीदें थीं। माना जा रहा था कि इस बार वे मजबूत मुकाबला देंगी, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे। इस हार के साथ उनकी चुनावी यात्रा में एक और असफलता जुड़ गई है।
उनके पिछले चुनावी प्रदर्शन पर नजर डालें तो 2021 के विधानसभा चुनाव में वे कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बेहद करीबी मुकाबले में लगभग 900 वोटों से हार गई थीं। वहीं 2016 के चुनाव में भी उन्हें CPI उम्मीदवार से लगभग 7,000 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। इस तरह त्रिशूर सीट पर उनका लगातार तीसरी बार असफल होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
त्रिशूर सीट लंबे समय से केरल की राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती रही है, जहां विभिन्न दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है। इस बार के नतीजों में UDF की मजबूत पकड़ और CPI की उपस्थिति दोनों साफ दिखाई दी, जबकि पद्मजा वेणुगोपाल को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस परिणाम से यह संकेत मिलता है कि त्रिशूर में मतदाताओं ने इस बार स्पष्ट रूप से UDF उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है। वहीं, पद्मजा वेणुगोपाल के लिए यह लगातार तीसरी हार उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े कर सकती है।
चुनाव परिणाम आने के बाद इलाके में समर्थकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। जहां UDF खेमे में जीत का उत्साह है, वहीं अन्य दलों में परिणाम को लेकर समीक्षा की जा रही है।
कुल मिलाकर, त्रिशूर सीट का यह चुनाव परिणाम एक बार फिर राजनीतिक समीकरणों को स्पष्ट करता है और यह दिखाता है कि मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद चुनावी सफलता केवल विरासत पर निर्भर नहीं करती।





