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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने और नागरिकों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित भाषा तकनीक प्लेटफॉर्म 'भाषिणी' का उपयोग करेगी। राज्य सरकार का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में बोली जाने वाली स्थानीय भाषाओं और बोलियों के माध्यम से नागरिकों को सरकारी सेवाओं से जोड़ना है। गुरुवार, 8 अक्टूबर को राज्य के मंत्री प्रियांक खड़गे ने बेंगलुरु के विधान सौधा में आयोजित एक कार्यशाला के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य नागरिकों को सेवाओं के अनुरूप ढालना नहीं, बल्कि सरकारी सेवाओं को नागरिकों की जरूरतों के अनुसार अधिक सुविधाजनक बनाना होना चाहिए।
कर्नाटक के ई-गवर्नेंस विभाग की ओर से विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों के लिए 'भाषिणी' कार्यशाला आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद प्रियांक खड़गे ने कहा कि राज्य में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता बहुत अधिक है। अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों की भाषाएं, बोलियां और सांस्कृतिक संदर्भ अलग-अलग हैं। ऐसे में डिजिटल सेवाओं का लाभ सभी नागरिकों तक पहुंचाने के लिए भाषाई बाधाओं को दूर करना आवश्यक है।
प्रियांक खड़गे ने कहा, "कर्नाटक एक राज्य है, लेकिन इसमें कई दुनियाएं बसी हैं। अलग-अलग इलाकों में हमारी भाषा, बोलियां और सांस्कृतिक संदर्भ बहुत अलग-अलग हैं। अगर टेक्नोलॉजी को सच में गवर्नेंस को ज्यादा आसान बनाना है, तो उसे नागरिकों से उसी भाषा में बात करनी होगी जिसे वे समझते हैं।"उन्होंने बताया कि 'भाषिणी' प्लेटफॉर्म के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आवाज पहचान और अनुवाद जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। इससे नागरिकों और सरकारी सेवाओं के बीच मौजूद भाषा संबंधी बाधाओं को कम करने का अवसर मिलेगा।
प्रियांक खड़गे ने विशेष रूप से राज्य की 700 से अधिक नागरिक सेवाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 'प्रजा सेवा' और ई-गवर्नेंस व्यवस्था के अंतर्गत उपलब्ध इन सेवाओं को अधिक सरल, समझने योग्य और सुलभ बनाने के लिए भाषिणी तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि डिजिटल शासन का वास्तविक उद्देश्य केवल सरकारी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि नागरिक उन सेवाओं को आसानी से समझ सकें और उनका उपयोग कर सकें।
प्रियांक खड़गे ने सवाल उठाया कि नागरिकों को तकनीक के अनुसार खुद को बदलने की आवश्यकता क्यों होनी चाहिए। इसके बजाय तकनीक को नागरिकों की भाषा, आवश्यकताओं और सुविधाओं के अनुसार विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं के विकास में यही दृष्टिकोण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यशाला के संबंध में जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ AI आधारित भाषा और आवाज तकनीक के उपयोग पर चर्चा की गई। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाना था।'भाषिणी' भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से जुड़ा एक भाषा प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म है। इसे देश की विभिन्न भाषाओं में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म मशीन अनुवाद, आवाज को टेक्स्ट में बदलने, टेक्स्ट को आवाज में बदलने और अन्य भाषा आधारित तकनीकी समाधान उपलब्ध कराता है।
इन सुविधाओं का उपयोग सरकारी वेबसाइटों, मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल सेवा प्रणालियों में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी को अन्य भाषाओं में प्रस्तुत करने या नागरिकों को आवाज आधारित माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराने में ऐसी तकनीक मदद कर सकती है।कर्नाटक सरकार की योजना इसी प्रकार की तकनीकी क्षमताओं को नागरिक सेवाओं के साथ जोड़ने की है। हालांकि, किन सेवाओं में भाषिणी का इस्तेमाल सबसे पहले शुरू होगा और इसे लागू करने की समयसीमा क्या होगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
कर्नाटक में स्थानीय भाषाओं और बोलियों की विविधता को देखते हुए इस प्रकार की पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में नागरिकों की भाषाई जरूरतें भिन्न हो सकती हैं। सरकारी सेवाओं के डिजिटल माध्यमों में भाषा संबंधी कठिनाइयां होने पर कई लोगों को जानकारी समझने और प्रक्रियाएं पूरी करने में परेशानी हो सकती है।AI आधारित अनुवाद और आवाज तकनीक के उपयोग से ऐसी समस्याओं को कम करने की संभावना है। इससे नागरिकों को अपनी परिचित भाषा में सरकारी योजनाओं, सेवाओं और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।
भाषिणी प्लेटफॉर्म की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इसमें भारतीय भाषाओं के लिए अनुवाद, स्पीच रिकग्निशन, टेक्स्ट-टू-स्पीच और डिजिटल दस्तावेजों से संबंधित समाधान उपलब्ध हैं। इन तकनीकों को सरकारी सेवाओं और नागरिकों के लिए बनाए गए डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा सकता हैसरकारी सेवाओं में भाषा तकनीक का इस्तेमाल केवल अनुवाद तक सीमित नहीं है। इससे उन नागरिकों के लिए भी डिजिटल सेवाओं का उपयोग आसान बनाया जा सकता है, जिन्हें लिखित जानकारी समझने में कठिनाई होती है। आवाज आधारित सुविधाएं ऐसे उपयोगकर्ताओं के लिए एक अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध करा सकती हैं।
हालांकि, इन प्रणालियों की उपयोगिता अनुवाद की सटीकता, स्थानीय बोलियों की पहचान और तकनीकी विश्वसनीयता पर निर्भर करेगी। विशेष रूप से सरकारी दस्तावेजों, आवेदन प्रक्रियाओं और नागरिक अधिकारों से संबंधित जानकारी में भाषा की स्पष्टता आवश्यक होती है। इसलिए नई तकनीक के उपयोग के साथ उसकी गुणवत्ता का परीक्षण भी महत्वपूर्ण होगा।कर्नाटक सरकार की इस पहल में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की भूमिका अहम होगी। सरकारी सेवाओं में भाषिणी के संभावित उपयोग को समझने और तकनीकी जरूरतों की पहचान करने के लिए आयोजित कार्यशाला इसी दिशा में एक कदम है।
प्रियांक खड़गे ने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे केवल तकनीक के इस्तेमाल पर ध्यान न दें, बल्कि यह भी देखें कि इससे आम लोगों को कितना लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए तकनीकी समाधान नागरिकों की वास्तविक जरूरतों पर आधारित होने चाहिए।डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार के साथ विभिन्न भाषाओं में सेवाओं की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण विषय बन गई है। सरकारी पोर्टल और ऑनलाइन सेवाएं तभी अधिक उपयोगी हो सकती हैं, जब नागरिक बिना अनावश्यक कठिनाई के उनसे जुड़ सकें।
कर्नाटक सरकार की भाषिणी पहल इसी उद्देश्य पर केंद्रित है। इसके माध्यम से राज्य की 700 से अधिक नागरिक सेवाओं को स्थानीय भाषाओं और बोलियों में अधिक सुलभ बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।फिलहाल सरकार ने अधिकारियों के साथ कार्यशाला आयोजित कर इस तकनीक के संभावित उपयोग पर चर्चा शुरू की है। आने वाले समय में विभिन्न विभागों द्वारा इसे अपनाने और नागरिक सेवाओं में लागू करने की प्रक्रिया से इसके वास्तविक परिणाम स्पष्ट होंगे।
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