
Karnataka कर्नाटक: नीति आयोग की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में देश के स्कूल शिक्षा सिस्टम में डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर गंभीर अंतर सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक जैसे तकनीकी रूप से अग्रणी राज्य में भी केवल 50.7% स्कूल ही इंटरनेट से जुड़े हैं। यह स्थिति राज्य की ग्लोबल डिजिटल पहचान और बुनियादी शैक्षणिक ढांचे के बीच बड़े अंतर को दर्शाती है।
यह खुलासा ‘भारत में स्कूल एजुकेशन सिस्टम: क्वालिटी बढ़ाने के लिए टेम्पोरल एनालिसिस और पॉलिसी रोडमैप 2026’ नामक रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक, जहां बेंगलुरु देश का प्रमुख आईटी हब है, वहां भी आधे से ज्यादा स्कूल इंटरनेट सुविधा से वंचित हैं। इसे शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल असमानता का गंभीर संकेत माना जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले दस वर्षों में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इंटरनेट कनेक्टिविटी के मामले में उल्लेखनीय प्रगति की है। दिल्ली, चंडीगढ़, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव जैसे क्षेत्रों में लगभग सभी स्कूलों में इंटरनेट पहुंच सुनिश्चित की जा चुकी है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश भी लगभग पूर्ण इंटरनेट कवरेज के करीब पहुंच चुका है।
राज्यों की तुलना में कुछ राज्यों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, जिनमें गुजरात (96.5%), गोवा (93.2%), केरल (91.7%) और पंजाब (88.9%) शामिल हैं। इन राज्यों में लगभग यूनिवर्सल कनेक्टिविटी हासिल कर ली गई है, जिससे डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिला है।
वहीं दूसरी ओर, कई राज्यों में स्थिति काफी चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल में केवल 18.6% स्कूलों में इंटरनेट सुविधा है, जो सबसे कम स्तरों में से एक है। इसके अलावा मेघालय (26.4%), अरुणाचल प्रदेश (33.6%), मणिपुर (36.6%), त्रिपुरा (41.7%), मध्य प्रदेश (45.7%) और उत्तर प्रदेश (45.9%) भी कम इंटरनेट कवरेज वाले राज्यों में शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा में डिजिटल संसाधनों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, ऐसे में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी छात्रों के सीखने के अवसरों को प्रभावित कर सकती है। खासकर महामारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा का महत्व और अधिक बढ़ गया है, जिससे इस अंतर को दूर करना और भी जरूरी हो गया है।
रिपोर्ट में यह संकेत भी दिया गया है कि अगर राज्यों ने समय रहते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत नहीं किया, तो शिक्षा की गुणवत्ता में क्षेत्रीय असमानता और बढ़ सकती है।
नीति आयोग ने इस दिशा में सुधारात्मक कदमों और बेहतर नीति निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि देश के सभी छात्रों को समान डिजिटल शिक्षा अवसर मिल सके।





