कर्नाटक

पूर्व सांसद के फोन से मिला आपत्तिजनक कंटेंट जांच में सामने आई कई बातें

Ratna Netam
12 Sept 2026 4:16 PM IST
पूर्व सांसद के फोन से मिला आपत्तिजनक कंटेंट जांच में सामने आई कई बातें
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बेंगलुरु। रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना एक बार फिर गंभीर विवाद में घिर गए हैं। बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में उनकी सेल से बरामद मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में कई अश्लील वीडियो मिलने की बात सामने आई है। फोन के अलावा जेल की तलाशी में पेन ड्राइव, चार्जर और एक नोटबुक भी बरामद की गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रतिबंधित मोबाइल जेल के हाई-सिक्योरिटी हिस्से तक कैसे पहुंचा और उसका इस्तेमाल किन-किन लोगों से संपर्क करने या अन्य गतिविधियों के लिए किया गया।
मामला 11 अगस्त को हुई अचानक तलाशी से जुड़ा है। सेंट्रल क्राइम ब्रांच की टीम ने जेल के सिक्योरिटी डिवीजन में छापेमारी की थी। इसी दौरान प्रज्वल रेवन्ना की सेल से एक 5G स्मार्टफोन समेत इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद हुआ। इसके बाद मोबाइल और दूसरे उपकरणों को जांच के लिए भेजा गया।
फोन में मिले अश्लील वीडियो
फॉरेंसिक जांच में मोबाइल में कई अश्लील वीडियो होने की पुष्टि हुई है। इससे पहले जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों में मोबाइल में करीब 80 से 90 डाउनलोडेड पोर्न वीडियो मिलने का दावा किया गया था। अधिकारियों ने वीडियो, तस्वीरों और दूसरे डिजिटल डेटा की जांच शुरू की ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामग्री कब और कहां से डाउनलोड हुई तथा इसका इस्तेमाल किसने किया।
ताजा जांच में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक पेन ड्राइव में अश्लील सामग्री के बजाय फिल्में और वेब सीरीज मिली हैं। यानी मोबाइल और पेन ड्राइव में मिली सामग्री अलग-अलग तरह की बताई गई है।
WhatsApp से Netflix तक कई ऐप
जेल की सेल से मिले स्मार्टफोन में केवल वीडियो ही नहीं थे। जांच अधिकारियों के मुताबिक फोन में WhatsApp, Facebook, Instagram, Netflix और Amazon Prime Video सहित कई ऐप इंस्टॉल थे। इनमें से कई एप्लिकेशन पासवर्ड से सुरक्षित बताए गए थे। इससे जांच एजेंसियों की दिलचस्पी फोन के इस्तेमाल के तरीके और उसमें मौजूद अन्य डिजिटल रिकॉर्ड में भी बढ़ गई।
फोन में मौजूद कॉल रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बने। ताजा रिपोर्ट के अनुसार कॉल लॉग में परिवार के सदस्यों और एक महिला मित्र से अनधिकृत संपर्क के संकेत मिले हैं। प्रज्वल ने इन कॉल्स की बात स्वीकार की, लेकिन मोबाइल का मालिक होने और अश्लील वीडियो डाउनलोड करने से इनकार किया है। उनका दावा है कि फोन का इस्तेमाल दूसरे कैदी भी करते थे।
सेल से और क्या-क्या मिला?
तलाशी में मोबाइल फोन के साथ चार्जर, पेन ड्राइव और एक नोटबुक या स्क्रिबलिंग पैड भी मिला था। पुलिस के मुताबिक नोटबुक में परिवार के सदस्यों, दोस्तों और वकील सहित कुछ लोगों के फोन नंबर लिखे हुए थे। शुरुआती पूछताछ में प्रज्वल ने नोटबुक को अपना बताया था।
जांच के दौरान प्रज्वल के साथ उसी जेल में रहे प्रताप राय का नाम भी सामने आया। शुरुआती पूछताछ में प्रताप ने कथित तौर पर फोन, चार्जर और पेन ड्राइव अपना होने की बात कही थी। इसके बावजूद पुलिस यह पता लगा रही है कि इन उपकरणों का वास्तविक इस्तेमाल कौन कर रहा था और जेल के अंदर इन्हें पहुंचाने में किसने मदद की।
जेल में मोबाइल पहुंचा कैसे?
यही इस मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। हाई-सिक्योरिटी जेल के अंदर कैदी के पास स्मार्टफोन मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस की जांच अब केवल प्रज्वल तक सीमित नहीं है बल्कि जेल के भीतर कथित तौर पर चल रहे प्रतिबंधित सामान पहुंचाने के नेटवर्क तक पहुंच चुकी है।
जांच में जेल कर्मचारियों और कैदियों की कथित मिलीभगत का भी मामला सामने आया है। *इंडियन एक्सप्रेस* की रिपोर्ट के अनुसार इस नेटवर्क की जांच में जेल वार्डरों और कैदियों समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। जांच में आरोप सामने आया कि जेल के भीतर अवैध मोबाइल फोन 75 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक में उपलब्ध कराए जाते थे। अधिकारियों को संदेह है कि यह केवल एक फोन का मामला नहीं बल्कि लंबे समय से चल रहे बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
जेल अधिकारियों पर भी कार्रवाई
प्रतिबंधित मोबाइल और अन्य सामान मिलने के बाद जेल प्रशासन की जवाबदेही भी सवालों के घेरे में आई। पहले की जांच के बाद जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई और दूसरे अधिकारी को कारण बताओ नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई थी।
जांच एजेंसियां अब यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि मोबाइल को सुरक्षा जांच से बचाकर अंदर कैसे पहुंचाया गया। यदि जेल कर्मचारियों की मिलीभगत साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अलग से कार्रवाई हो सकती है।
दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेजे गए थे प्रज्वल
मोबाइल इस्तेमाल के मामले में जांच आगे बढ़ने के बाद प्रज्वल रेवन्ना और उनके पूर्व सेलमेट प्रताप राय को बेंगलुरु की 42वीं अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट अदालत के सामने पेश किया गया था। अदालत ने दोनों को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। पुलिस उनसे यह जानना चाहती थी कि मोबाइल किसने उपलब्ध कराया, कब जेल में पहुंचाया गया और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
इस मामले में अलग एफआईआर भी दर्ज की गई है। इसका मतलब है कि पहले से रेप केस में सजा काट रहे प्रज्वल को अब जेल के अंदर प्रतिबंधित मोबाइल के कथित इस्तेमाल से जुड़े अलग मामले की जांच का भी सामना करना पड़ रहा है।
रेप केस में उम्रकैद की सजा
प्रज्वल रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते और कर्नाटक की हासन लोकसभा सीट से पूर्व सांसद हैं। उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।
अगस्त 2025 में विशेष अदालत ने एक रेप केस में उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामला एक महिला के साथ बार-बार यौन उत्पीड़न, वीडियो रिकॉर्ड करने और सबूत नष्ट करने से संबंधित था। प्रज्वल अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दे रहे हैं और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट से बढ़ीं मुश्किलें
जेल से मोबाइल मिलने का मामला शुरुआत में जेल नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा चूक से जुड़ा दिखाई दे रहा था, लेकिन फॉरेंसिक जांच के बाद इसका दायरा बढ़ गया है। फोन में मिली सामग्री, कॉल रिकॉर्ड और ऐप्स की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि डिवाइस का वास्तविक इस्तेमाल कैसे हुआ।
पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि फोन किसका था, उसे जेल में कौन लेकर आया और किन लोगों ने उसका इस्तेमाल किया। इसके साथ ही मोबाइल से किए गए कॉल और इंटरनेट गतिविधियों की भी जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
प्रज्वल की ओर से फोन का मालिक होने और अश्लील वीडियो डाउनलोड करने से इनकार किया गया है। इसलिए जांच में सामने आए डिजिटल साक्ष्यों और आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। फोन के इस्तेमाल और उसमें मौजूद सामग्री की जिम्मेदारी किसकी थी, इसका निर्धारण जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से होगा।
जेल सुरक्षा पर गंभीर सवाल
पूरे घटनाक्रम ने बेंगलुरु सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाई-प्रोफाइल और गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदियों तक स्मार्टफोन और सिम कार्ड पहुंचने के आरोप जेल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती हैं।
ताजा जांच में कथित मोबाइल तस्करी नेटवर्क का सामने आना बताता है कि मामला केवल एक कैदी तक सीमित नहीं हो सकता। पुलिस अब जेल के भीतर प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
प्रज्वल रेवन्ना के मामले में फिलहाल मोबाइल की फॉरेंसिक जांच ने कई नई जानकारियां सामने रखी हैं—फोन में अश्लील वीडियो, सोशल मीडिया और OTT ऐप्स, कॉल रिकॉर्ड, जबकि पेन ड्राइव में फिल्में और वेब सीरीज मिलीं। अब जांच का सबसे अहम हिस्सा यह तय करना है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल किसने किया और इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद ये जेल की सेल तक कैसे पहुंचे।
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