कर्नाटक

प्रताप सिम्हा टिप्पणी केस में विधायक प्रदीप ईश्वर पर NBW

Kavita2
25 Aug 2026 5:44 PM IST
प्रताप सिम्हा टिप्पणी केस में विधायक प्रदीप ईश्वर पर NBW
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बेंगलुरु। भाजपा के पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में कांग्रेस विधायक प्रदीप ईश्वर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बेंगलुरु की 42वीं एसीजेएम अदालत ने सुनवाई में उपस्थित नहीं होने पर प्रदीप ईश्वर के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट (NBW) जारी किया है। अदालत के इस आदेश के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

मामला भाजपा के पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा के खिलाफ कथित आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी से जुड़ा है। शिकायत के आधार पर अदालत में मामला चल रहा है। सुनवाई के दौरान कांग्रेस विधायक की अनुपस्थिति को अदालत ने गंभीरता से लिया और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।

सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए विधायक

जानकारी के अनुसार, मामले की सुनवाई के लिए मंगलवार को 42वीं एसीजेएम अदालत में कार्यवाही हुई। इस दौरान प्रदीप ईश्वर अदालत में उपस्थित नहीं हुए। उनकी गैरहाजिरी के बाद अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।

अदालत की ओर से जारी वारंट का उद्देश्य आरोपी की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करना है। गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस के पास आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत के समक्ष पेश करने की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता खुल जाता है।

हालांकि, वारंट जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि मामले में आरोपी को दोषी ठहरा दिया गया है। कथित टिप्पणी से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

प्रताप सिम्हा से जुड़ा है मामला

यह मामला भाजपा के पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा की ओर से की गई शिकायत से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि प्रदीप ईश्वर ने उनके खिलाफ ऐसी टिप्पणी की, जिसे अपमानजनक माना गया। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।

प्रताप सिम्हा कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और मैसूरु-कोडगु लोकसभा सीट से भाजपा सांसद रह चुके हैं। वहीं प्रदीप ईश्वर कांग्रेस के विधायक हैं। दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद पहले भी सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं।

इस मामले में कथित टिप्पणी को लेकर शिकायत दर्ज होने के बाद न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अब गैर-जमानती वारंट जारी किया है।

अदालत के आदेश से बढ़ी राजनीतिक हलचल

प्रदीप ईश्वर के खिलाफ NBW जारी होने की खबर के बाद कर्नाटक की राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई है। मामला दो प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं के बीच का होने के कारण इसका राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।

भाजपा नेताओं की ओर से कांग्रेस विधायक के खिलाफ अदालत की कार्रवाई को मुद्दा बनाया जा सकता है, जबकि कांग्रेस की ओर से मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत देखा जाने की बात कही जा सकती है। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

गैर-जमानती वारंट क्या होता है?

गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट अदालत की ओर से जारी ऐसा आदेश है, जिसके आधार पर पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है और अदालत के सामने पेश कर सकती है। आम तौर पर किसी व्यक्ति की अदालत में बार-बार अनुपस्थिति या अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करने जैसी परिस्थितियों में ऐसा कदम उठाया जा सकता है।

इस मामले में अदालत ने सुनवाई के दौरान प्रदीप ईश्वर की गैरहाजिरी के बाद NBW जारी किया है। अब उनकी अदालत में पेशी सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियों को वारंट के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।

आगे की सुनवाई पर टिकी नजर

अब मामले में अगली कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। प्रदीप ईश्वर अदालत के समक्ष पेश होते हैं या वारंट के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में लाया जाता है, इस पर नजर रहेगी।

वहीं, मामले की मूल शिकायत में लगाए गए आरोपों और कथित टिप्पणी से जुड़े तथ्यों पर भी आगे की सुनवाई में चर्चा होगी। अदालत साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाएगी।

आरोपों की पुष्टि अभी बाकी

यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रदीप ईश्वर के खिलाफ लगाया गया आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है। अदालत द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किया जाना उनकी दोषसिद्धि नहीं है। मामले में आरोपों की सत्यता और जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगा।

फिलहाल, बेंगलुरु की 42वीं एसीजेएम अदालत द्वारा कांग्रेस विधायक प्रदीप ईश्वर के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने से मामला एक नए चरण में पहुंच गया है। अदालत ने यह कदम सुनवाई में उनकी अनुपस्थिति के बाद उठाया है। अब आगे की कार्रवाई और अगली सुनवाई में विधायक की पेशी महत्वपूर्ण होगी।

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