
बेंगलुरु। कर्नाटक में नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज (NICE) प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि राज्य सरकार केंद्रीय मंत्री और जेडीएस अध्यक्ष एच.डी. कुमारस्वामी की मांग पर कानून के अनुसार सभी जरूरी कदम उठाएगी।
कुमारस्वामी ने राज्य सरकार से NICE प्रोजेक्ट को अपने नियंत्रण में लेने और टोल वसूली तुरंत बंद करने की मांग की है। इस मांग को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि उन्हें कुमारस्वामी का पत्र मिला है और वह इसकी जांच करेंगे।
कुमारस्वामी ने सरकार को लिखा पत्र
जेडीएस अध्यक्ष एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार को पत्र लिखकर NICE प्रोजेक्ट से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की है।
कुमारस्वामी का आरोप है कि प्रोजेक्ट के तहत की जा रही टोल वसूली अवैध है और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि NICE प्रोजेक्ट को अपने हाथ में लेकर आगे की कार्रवाई की जाए।
अपने पत्र में कुमारस्वामी ने बैंगलोर-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC) प्रोजेक्ट से जुड़े भूमि अधिग्रहण और परियोजना के कार्यान्वयन का भी उल्लेख किया है।
हाई कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
एच.डी. कुमारस्वामी ने अपने पत्र में कर्नाटक हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा 29 जुलाई को दिए गए फैसले का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि इस फैसले में BMIC परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई है। कुमारस्वामी का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश के आधार पर सरकार को NICE प्रोजेक्ट की समीक्षा करनी चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
डीके शिवकुमार ने दिया जवाब
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कुमारस्वामी की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा, "हम कानून के मुताबिक सभी जरूरी कदम उठाएंगे। उन्होंने जो पत्र लिखा है, वह अभी मेरे ध्यान में आया है। मैं उस पत्र की जांच करूंगा।"
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी फैसले से पहले संबंधित दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।
NICE प्रोजेक्ट लंबे समय से विवादों में
नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज (NICE) प्रोजेक्ट कर्नाटक में लंबे समय से विवादों में रहा है।
यह परियोजना बेंगलुरु और मैसूर के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसमें सड़क निर्माण, भूमि अधिग्रहण और टोल वसूली जैसे मुद्दों को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं।
कई राजनीतिक दलों और संगठनों ने अतीत में भी इस परियोजना को लेकर सवाल उठाए हैं।
टोल वसूली पर विवाद
कुमारस्वामी ने अपने पत्र में सबसे प्रमुख मुद्दा टोल वसूली को बताया है। उनका कहना है कि जब तक परियोजना से जुड़े सभी विवादों का समाधान नहीं होता, तब तक टोल वसूली रोकनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा स्थिति में लोगों से टोल लेना उचित नहीं है।
हालांकि, इस मामले में परियोजना संचालक कंपनी और सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
भूमि अधिग्रहण को लेकर भी सवाल
BMIC परियोजना में भूमि अधिग्रहण एक प्रमुख मुद्दा रहा है। कई वर्षों से किसानों और जमीन मालिकों से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं।
कुमारस्वामी ने अपने पत्र में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं को उठाया है।
उन्होंने सरकार से पूरे मामले की समीक्षा करने की मांग की है।
राजनीतिक नजरिए से भी अहम मुद्दा
NICE प्रोजेक्ट को लेकर उठे विवाद का राजनीतिक महत्व भी है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार और विपक्षी दलों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर टकराव चल रहा है।
कुमारस्वामी की मांग के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
जेडीएस और बीजेपी जहां सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस सरकार कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कदम उठाने की बात कह रही है।
सरकार करेगी पत्र की समीक्षा
डीके शिवकुमार ने संकेत दिया है कि सरकार कुमारस्वामी के पत्र का अध्ययन करेगी और इसके बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह कानूनी प्रक्रिया, हाई कोर्ट के निर्देश और जनता से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कोई निर्णय ले।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल NICE प्रोजेक्ट और टोल वसूली का मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है। यदि सरकार इस मामले में कोई बड़ा फैसला लेती है तो इसका असर परियोजना, टोल व्यवस्था और हजारों यात्रियों पर पड़ सकता है।





