कर्नाटक

प्रेमी ने प्रेमिका की हत्या की, शव को गोकाक की पहाड़ी पर फेंक दिया

Subhi
6 Nov 2026 10:01 AM IST
प्रेमी ने प्रेमिका की हत्या की, शव को गोकाक की पहाड़ी पर फेंक दिया
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बेलगावी: 25 साल की एक महिला की उसके प्रेमी ने कथित तौर पर हत्या कर दी। महिला लगातार उससे शादी करने के लिए कह रही थी। चार साल के रिश्ते के बाद सामने आया यह मामला धोखे की एक चौंकाने वाली घटना है।

मृतक महिला की पहचान रायबाग तालुक के हरुगेरी गांव की रक्षिता सरिकर के रूप में हुई है। आरोपी की पहचान अथानी तालुक के अदलाहट्टी गांव के बसप्पा सिदप्पा सतनवर के रूप में हुई है।

महिला के परिवार की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपी पिछले चार साल से रक्षिता के साथ रिश्ते में था और उसने उससे शादी करने का वादा किया था। हालांकि, वह कथित तौर पर शादी को टालता रहा।

28 अक्टूबर को, आरोपी रक्षिता को हरुगेरी से गोकाक फॉल्स ले गया। शाम करीब 4 बजे, दोनों झरने के पास सड़क किनारे एक चबूतरे पर बैठे थे। तब रक्षिता ने उससे पूछा कि कई सालों तक शादी का वादा करने के बावजूद उसने शादी क्यों नहीं की। इस बात को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई।

परिवार का आरोप है कि आरोपी ने उसे जोरदार थप्पड़ मारा, उसका गला दबाया और फिर उसके गले में एक स्टोल (दुपट्टा) कस दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद, सबूत मिटाने और अपराध छिपाने के लिए उसने शव को झरने के पास एक खड़ी पहाड़ी पर कांटेदार झाड़ियों के बीच फेंक दिया।

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हत्या

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने PwD कमिश्नर की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया

जस्टिस एस. सुनील दत्त यादव ने बेलगावी के प्रवीण उल्लागड्डी की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। याचिका में सरकार द्वारा 31 अक्टूबर 2026 को जारी उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत डॉ. वेंकटरमनस्वामी को कमिश्नर नियुक्त किया गया था।

तस्वीर केवल सांकेतिक उद्देश्य के लिए है।

तस्वीर केवल सांकेतिक उद्देश्य के लिए है। (फोटो | ANI)

एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस

अपडेट किया गया:

06 नवंबर 2026, सुबह 9:00 बजे

पढ़ने में 2 मिनट

बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार को एक नोटिस जारी किया। यह नोटिस 'दिव्यांग व्यक्तियों के लिए राज्य आयुक्त' (State Commissioner for Persons with Disabilities) के पद पर डॉ. वेंकटरमनस्वामी एस.वी. की नियुक्ति के खिलाफ दायर एक याचिका पर दिया गया है।

जस्टिस एस. सुनील दत्त यादव ने बेलगावी के प्रवीण उल्लागड्डी की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। याचिका में सरकार द्वारा 31 अक्टूबर 2026 को जारी उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत डॉ. वेंकटरमनस्वामी को कमिश्नर नियुक्त किया गया था। याचिकाकर्ता, जो एक वकील हैं और 'स्टेट दिव्यांग पैरा-वैली एसोसिएशन ऑफ कर्नाटक' के अध्यक्ष भी हैं, ने आरोप लगाया है कि यह नियुक्ति प्रक्रिया अपारदर्शी और मनमानी है। उन्होंने कहा कि 'सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी' (खोज एवं चयन समिति) के गठन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। याचिकाकर्ता का तर्क है कि उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने का तरीका या डॉ. वेंकटरमनस्वामी को चुनने का आधार प्रथम दृष्टया अवैध है, क्योंकि यह 'कर्नाटक राज्य दिव्यांगजन नियम, 2018' के नियम 32 का उल्लंघन करता है।

7 मार्च, 2026 के विज्ञापन के अनुसार, याचिकाकर्ता ने 'आयुक्त' (कमिश्नर) के पद के लिए आवेदन किया था। उनके पास दिव्यांग कल्याण और 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) को लागू करने का प्रासंगिक अनुभव है।

याचिका में आरोप लगाया गया है, "एक योग्य आवेदक होने के बावजूद, याचिकाकर्ता को न तो चयन प्रक्रिया के बारे में बताया गया, न ही इसमें शामिल होने के लिए बुलाया गया, और न ही उनके न चुने जाने का कोई कारण बताया गया। इससे पूरी चयन प्रक्रिया और नियुक्ति ही दूषित हो जाती है।

KSPCB अध्यक्ष की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका: राज्य सरकार को नोटिस

बेंगलुरु के एक वकील ने कांग्रेस के अनेकल विधायक बी. शिवन्ना को 'कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' (KSPCB) का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। इस पर गुरुवार को हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।

न्यायमूर्ति अनु शिवरामन और न्यायमूर्ति के. एस. भरत कुमार की खंडपीठ ने KSPCB के सदस्य सचिव और शिवन्ना को भी नोटिस जारी किया है। सुधा कटवा द्वारा दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि अध्यक्ष के रूप में शिवन्ना का नामांकन निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन है, जो कि कानूनी रूप से अमान्य (ultra vires) है।

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