
बेंगलुरु: सोमवार को बैंगलोर चैंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स (BCIC) ने तोकुशिमा प्रान्त के सहयोग से चौथे 'भारत-जापान बिजनेस समिट 2026' का आयोजन किया। बेंगलुरु में जापान के महावाणिज्य दूत (Consul General) हिरोशी नवाता ने कहा कि कर्नाटक की युवा कार्यबल (वर्कफोर्स) जापानी कंपनियों के लिए एक बहुमूल्य संपत्ति है।
इस समिट में एक स्टार्टअप पोर्टल की घोषणा की गई, जिसे BCIC और जापान के 'ऑर्गेनाइजेशन फॉर स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज एंड रीजनल इनोवेशन' (SMRJ) ने मिलकर तैयार किया है। इसका उद्देश्य कर्नाटक सहित भारत के 1,000 से अधिक MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को जापानी कंपनियों और निवेशकों से जोड़ना है।
नवाता ने कहा, "कर्नाटक में 200 से अधिक जापानी कंपनियां और 500 से ज्यादा जापानी प्रतिष्ठान मौजूद हैं, जो दोनों पक्षों के बीच गहरे आर्थिक संबंधों को दर्शाते हैं। जापान को टेक्नोलॉजी सेक्टर में युवा कार्यबल की जरूरत है।"
वाणिज्य और उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ. एस. सेल्वकुमार ने बताया कि भारत की कुल इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन गतिविधियों में कर्नाटक का योगदान 40%, एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण में 65%, सॉफ्टवेयर निर्यात में 40% और मशीन-टूल विनिर्माण में 52% है। उन्होंने जापानी कंपनियों को अपनी तकनीक और निवेश के साथ राज्य में आने के लिए आमंत्रित किया।
BCIC के अध्यक्ष के. रवि ने बताया कि चैंबर ने गार्डन सिटी कॉलेज, जैन कॉलेज और HKBK कॉलेज के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत छात्रों को जापानी भाषा का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे जापान और भारत में मौजूद जापानी कंपनियों में उनके रोजगार के अवसर बेहतर होंगे।





