कर्नाटक

कर्नाटक ने बैंकों को 'गृह लक्ष्मी' योजना का इस्तेमाल करने से रोका

Subhi
10 Oct 2026 8:53 AM IST
कर्नाटक ने बैंकों को गृह लक्ष्मी योजना का इस्तेमाल करने से रोका
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बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे 'गृह लक्ष्मी योजना' के तहत महिलाओं को दी जाने वाली 2,000 रुपये की मासिक सहायता राशि को बकाया लोन की किस्तों, ब्याज या अन्य बकाया राशि के साथ एडजस्ट न करें। साथ ही, सरकार ने लाभार्थियों की लिखित सहमति के बिना काटी गई राशि को तुरंत वापस करने का आदेश भी दिया है।

एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और डेवलपमेंट कमिश्नर उमा महादेवन ने स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (SLBC) के कन्वीनर को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी कमर्शियल बैंक, कोऑपरेटिव बैंक, रीजनल रूरल बैंक और अन्य फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन इन निर्देशों का पालन करें।

यह कदम MLC और 'गारंटी योजना कार्यान्वयन प्राधिकरण' के राज्य उपाध्यक्ष दिनेश गूलीगौडा की मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से की गई अपील के बाद उठाया गया है। गूलीगौडा ने महिला लाभार्थियों की उन शिकायतों की ओर ध्यान दिलाया था जिनमें कहा गया था कि बैंक पुरानी लोन की अदायगी के लिए योजना की सहायता राशि काट रहे हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, राज्य सरकार ने SLBC कन्वीनर से सभी बैंकों को एक सर्कुलर जारी करने और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि योजना के तहत क्रेडिट की गई राशि अपने आप डेबिट न हो या लोन के बकाया के साथ एडजस्ट न की जाए। बैंकों से यह भी कहा गया है कि वे ऐसी कटौती को रोकने के लिए ज़रूरी टेक्निकल उपाय करें और ब्रांच-लेवल के कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करें।

राज्य सरकार ने बैंकों को यह भी निर्देश दिया है कि वे लाभार्थियों की स्पष्ट लिखित सहमति के बिना लोन के बकाया के लिए पहले ही काटी गई राशि को वापस क्रेडिट करें। इस संबंध में ज़िला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) को भी निर्देश जारी किए गए हैं।

SLBC कन्वीनर से कहा गया है कि वे सभी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन द्वारा सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और सरकार को की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपें। इस कम्युनिकेशन की कॉपी महिला एवं बाल विकास विभाग के सेक्रेटरी, डिप्टी कमिश्नरों और ZP CEOs को भी भेजी गई हैं।

मुख्यमंत्री को दी गई अपनी अर्ज़ी में गूलीगौडा ने तर्क दिया था कि बैंकों और माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन द्वारा की जाने वाली कटौती से योजना का मकसद ही खत्म हो जाता है। इस योजना का मकसद महिलाओं के घर के खर्च, बच्चों की शिक्षा और आर्थिक आज़ादी में मदद करना था।

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