
बेंगलुरु: राज्य सरकार शहरी इलाकों में इकोसिस्टम सेवाओं (पर्यावरण से मिलने वाली सेवाओं) के लिए शुल्क लगाने पर विचार कर रही है। इसका मकसद जंगल के किनारों पर रहने वाले लोगों, खासकर किसानों की मदद करना और इंसानों व जानवरों के बीच होने वाले टकराव को कम करने के लिए फंड जुटाना है।
वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इसका मकसद लोगों में 'लंग स्पेस' (शहर के फेफड़े कहे जाने वाले हरे-भरे इलाके), जंगल के इलाकों और बढ़ते शहरीकरण की वजह से होने वाले टकराव के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है, तो कर्नाटक ऐसा शुल्क लगाने वाला पहला राज्य होगा। हालांकि, इस शुल्क की रकम अभी तय नहीं की गई है।
अधिकारियों ने कहा कि सर्विस चार्ज का इस्तेमाल जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों की भलाई के लिए किया जाएगा। यह विभाग की ओर से टकराव कम करने के लिए बनाई गई कई योजनाओं में से एक है।
अधिकारियों ने बताया कि इसे लागू करने से पहले एक वैज्ञानिक डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। यह समझना ज़रूरी है कि जंगल और 'लंग स्पेस' कौन सी इकोलॉजिकल सेवाएं देते हैं और उनकी कीमत क्या है। एक और सीनियर अधिकारी ने कहा, "हालांकि यह विचार अच्छा है, लेकिन इसे कैसे लागू किया जाए - ग्रीन सेस (पर्यावरण उपकर) के तौर पर या टैक्स के तौर पर - यह अभी तय नहीं हुआ है।"





