कर्नाटक

कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य के आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई

Subhi
23 Sept 2026 10:17 AM IST
कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य के आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई
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बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बेंगलुरु के एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई टाल दी, जिसमें राज्य सरकार के सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद गाने के फैसले को चुनौती दी गई थी, सिवाय राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधान मंत्री या राज्यपाल की उपस्थिति के।

जस्टिस अनु शिवरामन और टीपी विवेकानंद की खंडपीठ ने सुनवाई 15 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दी, जब महाधिवक्ता के शशिकिरण शेट्टी ने अदालत को सूचित किया कि विवादास्पद छंदों को नहीं गाने के दंडात्मक परिणामों के संबंध में एक समान मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है।

उन्होंने गृह मंत्रालय के संचार का हवाला देते हुए राज्य के फैसले को उचित ठहराया और तर्क दिया कि राष्ट्रीय गीत गाने का कोई आदेश नहीं है।

याचिकाकर्ता गिरीश भारद्वाज ने 3 सितंबर के कैबिनेट फैसले और उसके बाद इस मुद्दे पर राज्य सरकार द्वारा 8 सितंबर को पारित आदेश को चुनौती दी थी।

उन्होंने कहा, ''अनौपचारिक चर्चा'' के रूप में लिए गए निर्णय पर, बिना कैबिनेट नोट के, बिना किसी प्रायोजक विभाग के और बिना कानून विभाग की सलाह के, यह आदेश जारी किया गया।

राष्ट्रीय गीत सातवीं अनुसूची की सूची II या सूची III में वर्णित विषय नहीं है; उन्होंने कहा, यह अनुच्छेद 248 के साथ पढ़ी गई सूची I की प्रविष्टि 97 के तहत संसद की विशेष क्षमता के अंतर्गत है, और अनुच्छेद 162 के तहत राज्य की कार्यकारी शक्ति इस तक नहीं पहुंचती है।

यह आदेश अनुच्छेद 256 और 257(1) का और उल्लंघन करता है, जिसके तहत राज्य को अपनी कार्यकारी शक्ति का प्रयोग करने की आवश्यकता होती है ताकि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके और राज्य की कार्यकारी शक्ति में बाधा न डाली जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि राज्य यह निर्देश नहीं देगा कि संघ द्वारा निर्धारित गीत को छोटा कर दिया जाए।

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