
बेंगलुरु: कर्नाटक में ईसाई समुदाय के नेताओं ने धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून को रद्द करने के लिए AICC अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से दखल देने की मांग की। बेंगलुरु के आर्कबिशप रेवरेंड डॉ. पीटर मचाडो के नेतृत्व में ईसाई समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने खड़गे से मुलाकात की और राज्य में ईसाई समुदाय से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए उनसे दखल और समर्थन मांगा।
उन्होंने 'कर्नाटक धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का संरक्षण अधिनियम' (जिसे आम तौर पर धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून कहा जाता है) को रद्द करने, विधान परिषद में ईसाई समुदाय के एक प्रतिनिधि को नामित करने, ईसाई समुदाय के लिए 1% आरक्षण और बोर्ड व निगमों में प्रतिनिधित्व देने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून के प्रावधानों और ईसाई समुदाय पर इसके असर को लेकर चिंता जताई, खासकर संवैधानिक स्वतंत्रता और अपने धर्म का पालन करने व उसका प्रचार-प्रसार करने के अधिकार के संदर्भ में।
उन्होंने कहा कि विधान परिषद में ईसाई समुदाय के प्रतिनिधि के नामांकन से समुदाय को अपनी बात रखने और विधायी प्रक्रिया में रचनात्मक रूप से योगदान देने के लिए एक उचित मंच मिलेगा। प्रतिनिधिमंडल ने ईसाई समुदाय के कुछ वर्गों के सामने आने वाली सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला और शिक्षा, रोजगार व विकास के अन्य क्षेत्रों में बेहतर अवसर सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने का आग्रह किया।





