कर्नाटक

महंगा हो सकता है नंदिनी दूध, 8 से 10 रुपये प्रति लीटर कीमत बढ़ाने की मांग; CM ने मांगी पूरी रिपोर्ट

Kavita2
23 Sept 2026 12:16 PM IST
महंगा हो सकता है नंदिनी दूध, 8 से 10 रुपये प्रति लीटर कीमत बढ़ाने की मांग; CM ने मांगी पूरी रिपोर्ट
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बेंगलुरु। कर्नाटक में लोकप्रिय नंदिनी दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की मांग सामने आई है। राज्य के सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को विधान सौधा में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात कर नंदिनी दूध की खरीद और खुदरा कीमत में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने तत्काल कीमत बढ़ाने की घोषणा नहीं की है, बल्कि अधिकारियों से उत्पादन लागत, दूध खरीद और पड़ोसी राज्यों की कीमतों समेत विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

प्रतिनिधिमंडल ने पशु चारे, हरे और सूखे चारे, पशुओं की दवाओं और डेयरी संचालन से जुड़े दूसरे खर्चों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा दरों पर दुग्ध उत्पादकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। प्रतिनिधिमंडल की ओर से BAMUL अध्यक्ष डी.के. सुरेश ने मुख्यमंत्री के सामने डेयरी किसानों से जुड़ी समस्याएं रखीं।

8 से 10 रुपये बढ़ाने की मांग

दुग्ध उत्पादक संघों ने सरकार से नंदिनी दूध की खरीद और बिक्री दोनों कीमतों में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी पर विचार करने की मांग की है।

यह मांग महत्वपूर्ण है क्योंकि खरीद मूल्य में बढ़ोतरी से किसानों को मिलने वाली राशि प्रभावित होगी, जबकि खुदरा मूल्य में बदलाव का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

हालांकि सरकार ने अभी इस मांग को मंजूरी नहीं दी है। मुख्यमंत्री ने पहले सभी संबंधित आंकड़ों का अध्ययन करने का निर्देश दिया है। इसलिए फिलहाल नंदिनी दूध की कीमत में 8 से 10 रुपये की बढ़ोतरी को प्रस्ताव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

10 साल के पशु चारे के दाम की मांगी जानकारी

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अधिकारियों से पिछले 10 वर्षों में पशु चारे की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की विस्तृत जानकारी देने को कहा है।

इसके साथ ही एक लीटर दूध के उत्पादन पर वर्तमान में कितना खर्च आता है, इसका भी आकलन करने का निर्देश दिया गया है। सरकार इन आंकड़ों के आधार पर यह समझना चाहती है कि डेयरी किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत कितनी बढ़ी है।

हर जिले के दूध उत्पादन का जुटेगा डेटा

मुख्यमंत्री ने जिलेवार दूध उत्पादन की जानकारी भी मांगी है। अधिकारियों को बताना होगा कि प्रत्येक जिले में कितना दूध पैदा हो रहा है और उसमें से कितना दूध सहकारी संघ खरीद रहे हैं।

इसके अलावा कितना दूध सहकारी व्यवस्था से बाहर दूसरे माध्यमों से बेचा जा रहा है, इसकी जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल करने को कहा गया है।

इन आंकड़ों से सरकार को राज्य में दूध उत्पादन और खरीद व्यवस्था की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।

पड़ोसी राज्यों की कीमतों से होगी तुलना

सरकार केवल कर्नाटक के आंकड़ों का अध्ययन नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पड़ोसी राज्यों में दूध की खरीद और खुदरा कीमतों का तुलनात्मक विवरण भी पेश करने को कहा है।

प्रतिनिधिमंडल की ओर से डी.के. सुरेश ने दावा किया कि कर्नाटक में सहकारी संघ फिलहाल उत्पादकों से टोंड दूध लगभग 35 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रहे हैं। उनके द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक आंध्र प्रदेश में यह दर 41.50 रुपये, केरल में 41.80 रुपये, महाराष्ट्र में 41 रुपये और तमिलनाडु में 42.24 रुपये प्रति लीटर है। ये आंकड़े दुग्ध संघों की ओर से मुख्यमंत्री के सामने रखे गए हैं।

कर्नाटक में खुदरा कीमत कम होने का दावा

डी.के. सुरेश ने यह भी दावा किया कि कर्नाटक में दूध का अधिकतम खुदरा मूल्य पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम से कम 12 रुपये प्रति लीटर कम है।

उनका कहना है कि उपभोक्ताओं के हित को ध्यान में रखते हुए पिछले करीब डेढ़ साल से दूध की कीमत नहीं बढ़ाई गई, जबकि डेयरी उत्पादन से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।

पशु चारा और दवाओं का खर्च बढ़ा

दुग्ध संघों ने कीमत बढ़ाने की मांग के पीछे उत्पादन लागत को प्रमुख कारण बताया है। उनके मुताबिक पशु चारा, हरा और सूखा चारा, पशुओं की दवाएं और रखरखाव का खर्च बढ़ने से दूध उत्पादन महंगा हुआ है।

BAMUL अध्यक्ष डी.के. सुरेश ने कहा कि डेयरी किसानों पर इन बढ़े हुए खर्चों का सीधा असर पड़ रहा है। सूखे की स्थिति के कारण चारे की उपलब्धता और कृषि आय पर भी असर पड़ा है, जिससे पशुपालकों की आर्थिक परेशानी बढ़ी है।

निजी डेयरियों से बढ़ रही प्रतिस्पर्धा

दुग्ध संघों ने निजी डेयरियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के सामने रखा। डी.के. सुरेश के अनुसार निजी कंपनियां ज्यादा मात्रा में दूध खरीदने की कोशिश कर रही हैं, जिससे सहकारी दुग्ध संघों के सामने पर्याप्त दूध जुटाने की चुनौती बढ़ रही है।

उनका तर्क है कि यदि किसानों को दूसरी जगह बेहतर खरीद मूल्य मिलता है तो वे सहकारी संस्थाओं के बजाय निजी डेयरियों को दूध बेच सकते हैं। इससे सहकारी दूध संघों की खरीद प्रभावित हो सकती है।

पहले KMF को भी दिया गया था ज्ञापन

दुग्ध संघों की ओर से कीमत बढ़ाने की मांग अचानक सामने नहीं आई है। प्रतिनिधियों ने कुछ दिन पहले कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) को भी इसी संबंध में ज्ञापन सौंपा था।

रिपोर्ट के मुताबिक 18 सितंबर को संघों ने KMF के सामने अपनी मांग रखी थी। इसके बाद सरकार तक मामला पहुंचाने की बात कही गई थी। मंगलवार को प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर सीधे कीमत संशोधन की मांग रखी।

किसानों और उपभोक्ताओं दोनों से जुड़ा फैसला

नंदिनी दूध की कीमत में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का असर दो स्तरों पर पड़ेगा। खरीद मूल्य बढ़ने पर डेयरी किसानों की आय में सुधार हो सकता है, जबकि खुदरा कीमत बढ़ने पर उपभोक्ताओं को दूध के लिए ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा।

यही वजह है कि सरकार ने तत्काल फैसला लेने के बजाय उत्पादन लागत और दूसरे राज्यों की कीमतों का विस्तृत अध्ययन कराने का निर्णय लिया है।

अधिकारियों की रिपोर्ट में पशु चारे की लागत, प्रति लीटर उत्पादन खर्च, जिलेवार दूध उत्पादन, सहकारी संघों की खरीद और खुले बाजार में बिक्री जैसे कई पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

रिपोर्ट के बाद सरकार करेगी विचार

फिलहाल नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी जरूरी आंकड़े जुटाकर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार दुग्ध उत्पादक संघों की 8 से 10 रुपये प्रति लीटर की मांग पर विचार करेगी। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए अभी यह समझना जरूरी है कि कीमत बढ़ाने की मांग जरूर की गई है, लेकिन नई कीमत या उसके लागू होने की तारीख घोषित नहीं हुई है।

अब नंदिनी दूध उत्पादकों और उपभोक्ताओं की नजर सरकार के अगले फैसले पर है। यदि कीमत में संशोधन होता है तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बढ़ी हुई राशि का कितना हिस्सा किसानों के खरीद मूल्य में जोड़ा जाता है और उपभोक्ताओं के लिए खुदरा कीमत में कितना बदलाव किया जाता है।

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