
मैसूर। दुनिया भर में मशहूर मैसूर दशहरा उत्सव रविवार से शुरू होने जा रहा है। कर्नाटक का ऐतिहासिक शहर मैसूर कला, संस्कृति, विरासत, भक्ति और वीरता के अनूठे संगम के लिए तैयार है। नवरात्रि और दशहरा के इस खास अवसर पर पूरे शहर को सजाया गया है। मैसूर पैलेस से लेकर प्रमुख सड़कों और आयोजन स्थलों तक रोशनी की व्यवस्था की गई है। शहर की जगमगाहट के बीच दशहरा उत्सव को बड़े पैमाने पर मनाने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
हालांकि, राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात, बारिश की कमी और फसल खराब होने से किसान मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन मैसूर में पारंपरिक ‘नादाहब्बा’ उत्सव की तैयारियां जारी हैं। कर्नाटक में दशहरा को नादाहब्बा यानी राज्य का त्योहार भी कहा जाता है। इस आयोजन में धार्मिक परंपराओं के साथ मैसूर की राजसी विरासत और सांस्कृतिक पहचान की झलक देखने को मिलती है।
चामुंडी पहाड़ियों पर होगा उद्घाटन
मैसूर दशहरा उत्सव का उद्घाटन चामुंडी पहाड़ियों पर स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर में किया जाएगा। इसके लिए मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस वर्ष कोप्पल के गावी मठ के श्री अभिनव गविसिद्धेश्वर स्वामीजी उत्सव का उद्घाटन करेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, उद्घाटन रविवार को सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:13 बजे के बीच शुभ ‘धनु लग्न’ में होगा। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार होने वाला यह समारोह मैसूर दशहरा के औपचारिक शुभारंभ का प्रतीक रहेगा।
चामुंडेश्वरी देवी मैसूर की आराध्य देवी मानी जाती हैं। दशहरा उत्सव में उनकी पूजा का विशेष महत्व है। इसी वजह से चामुंडी पहाड़ियों पर होने वाला उद्घाटन समारोह इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। मंदिर में कार्यक्रम की तैयारियां पूरी होने के बाद अब श्रद्धालुओं और शहरवासियों की नजर उद्घाटन पर है।
रोशनी से जगमगाया मैसूर शहर
दशहरा से पहले मैसूर शहर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। ऐतिहासिक महल वाले इस शहर में उत्सव का माहौल दिखाई देने लगा है। प्रमुख स्थलों और सड़कों पर रोशनी की सजावट की गई है, जिससे शहर की खूबसूरती और बढ़ गई है।
मैसूर पैलेस दशहरा समारोह की प्रमुख पहचान है। इसकी ऐतिहासिक वास्तुकला और रोशनी हर साल लोगों का ध्यान आकर्षित करती है। दशहरा के दौरान शहर में धार्मिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अन्य आयोजनों के माध्यम से उत्सव का माहौल बना रहता है।
मैसूर की पहचान उसकी राजसी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है। दशहरा के अवसर पर इन परंपराओं को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाता है। शहर को सजाने और आयोजन स्थलों को तैयार करने का उद्देश्य उत्सव के पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखना है।
कला, संस्कृति और वीरता का संगम
मैसूर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस उत्सव में कला, लोकसंस्कृति, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक परंपराओं का संगम देखने को मिलता है।
‘नादाहब्बा’ के रूप में प्रसिद्ध यह उत्सव कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। दशहरा के दौरान मैसूर शहर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय परंपराओं को सामने लाया जाता है। इस आयोजन का संबंध मैसूर की ऐतिहासिक राजपरंपरा से भी है।
दशहरा का उत्सव विजय, शक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश से जुड़ा है। इस दौरान देवी दुर्गा और चामुंडेश्वरी की आराधना की जाती है। मैसूर में यह पर्व अपनी विशिष्ट परंपराओं और भव्य आयोजनों के कारण विशेष पहचान रखता है।
किसानों की चुनौतियों के बीच उत्सव की तैयारी
इस वर्ष मैसूर दशहरा ऐसे समय मनाया जा रहा है, जब कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बारिश की कमी, सूखे जैसे हालात और फसल खराब होने से किसानों की परेशानियां बढ़ी हैं। इसके बावजूद मैसूर शहर में पारंपरिक उत्सव को भव्य रूप देने की तैयारियां जारी हैं।
कृषि पर निर्भर परिवारों के लिए मौसम और फसल की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में बारिश की कमी और फसल को नुकसान पहुंचने की खबरें राज्य के ग्रामीण इलाकों की चुनौतियों को सामने रखती हैं। वहीं, मैसूर में दशहरा आयोजन की तैयारियां शहर की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं।
हालांकि, किसानों की समस्याओं और दशहरा आयोजन के खर्च के बीच किसी विशेष संबंध या सरकारी निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल, दोनों परिस्थितियां राज्य में एक ही समय पर सामने हैं।
उद्घाटन के साथ शुरू होगा उत्सव
मैसूर दशहरा का उद्घाटन रविवार को चामुंडेश्वरी मंदिर में शुभ मुहूर्त के दौरान होगा। श्री अभिनव गविसिद्धेश्वर स्वामीजी इस समारोह का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही शहर में दशहरा से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत होगी।
पूरे मैसूर को रोशनी से सजाया गया है और प्रमुख आयोजन स्थलों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। धार्मिक परंपराओं से लेकर सांस्कृतिक विरासत तक, इस उत्सव में कर्नाटक की पहचान के कई रंग देखने को मिलेंगे।
मैसूर दशहरा हर वर्ष शहर के सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण आयोजन रहता है। इस बार भी ‘नादाहब्बा’ उत्सव को लेकर तैयारियां पूरी हैं। अब उद्घाटन समारोह के साथ मैसूर में दशहरा का उत्सवी माहौल औपचारिक रूप से शुरू होगा





