
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के मैसूर शहर में सार्वजनिक स्वच्छता को बढ़ावा देने और खुले में पेशाब करने की समस्या पर रोक लगाने के लिए नगर प्रशासन ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। शहर के सबअर्बन बस स्टैंड के पास सड़क किनारे एक दीवार पर बड़े रिफ्लेक्टिव मिरर लगाए गए हैं, ताकि लोग अपनी हरकतों को देख सकें और शर्मिंदगी के कारण इस तरह की गतिविधियों से बचें।
यह पहल लंबे समय से चली आ रही उस समस्या के समाधान के रूप में देखी जा रही है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पेशाब करने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। अधिकारियों का मानना है कि यह तरीका लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने में मदद कर सकता है, क्योंकि जब व्यक्ति खुद को आईने में देखता है तो वह अपनी आदतों के प्रति अधिक जागरूक हो जाता है।
स्थानीय प्रशासन द्वारा लगाए गए ये बड़े चमकदार स्टील के मिरर सड़क किनारे दीवार पर इस तरह से लगाए गए हैं कि वहां से गुजरने वाले या रुकने वाले लोग आसानी से अपनी छवि देख सकते हैं। इस कदम का उद्देश्य न सिर्फ स्वच्छता को बढ़ावा देना है, बल्कि सार्वजनिक स्थानों को साफ-सुथरा बनाए रखना भी है।
इस पहल का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दीवार पर लगे कई बड़े रिफ्लेक्टिव मिरर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को एक यूज़र ‘@Theshashank_p’ ने साझा किया है, जिसने इस विचार की सराहना करते हुए लिखा कि इस तरह का आइडिया बेहद अनोखा और प्रभावी है।
Whoever came up with this idea deserves nothing less than a Nobel... Genius 🙏🙏🙏 pic.twitter.com/hI7cTkcKH8
— Akki Rotti (@Theshashank_p) May 6, 2026
पोस्ट में यूज़र ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने यह विचार दिया है, वह किसी बड़े सम्मान के योग्य है, क्योंकि यह समस्या के समाधान का एक सरल लेकिन प्रभावी तरीका है। सोशल मीडिया पर भी इस पहल को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहां कई लोग इसे रचनात्मक कदम बता रहे हैं।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक स्वच्छता को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है और इसके लिए केवल जुर्माना या चेतावनी पर्याप्त नहीं होती। ऐसे में व्यवहार परिवर्तन आधारित उपायों को भी अपनाना जरूरी है। मिरर लगाने की यह पहल इसी सोच का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उपाय मनोवैज्ञानिक प्रभाव के जरिए लोगों की आदतों में सुधार ला सकते हैं। जब लोग अपने व्यवहार को खुद देख पाते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से उसे बदलने की कोशिश करते हैं।
फिलहाल यह पहल बस स्टैंड के पास पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। यदि इसके सकारात्मक परिणाम मिलते हैं, तो इसे शहर के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।
मैसूर प्रशासन का यह कदम स्वच्छ भारत अभियान की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य शहर को साफ-सुथरा और बेहतर बनाना है।





