
Karnataka कर्नाटक : माईशुगर के अध्यक्ष सी.डी. गंगाधर ने रविवार को बताया कि माईशुगर फैक्ट्री में गन्ना पेराई की प्रक्रिया जून के अंत तक शुरू हो जाएगी। रविवार को किसानों और विभिन्न संगठनों के सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि माईशुगर फैक्ट्री बिना सरकार के वित्तीय सहयोग के काम शुरू करेगी। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री का इस बार 4.50 लाख टन गन्ना पेराई का लक्ष्य है और 4.53 लाख टन गन्ना के लिए किसानों से अनुबंध हो चुका है। चीनी मिल शुरू करने में कोई दिक्कत नहीं है। हम पिछली बार की तरह इस बार भी बिना सरकारी मदद लिए गन्ना पिसाई करेंगे। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री की क्षमता प्रतिदिन पांच हजार टन गन्ना पीसने की है और हम कम से कम 4 हजार टन गन्ना पिसाई करेंगे। पिछले दो दशक के इतिहास में पहली बार फैक्ट्री को मुनाफा हुआ। फैक्ट्री ने 2 लाख टन गन्ना पेराई कर 122 रुपये प्रति टन के हिसाब से 2.44 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। उन्होंने बताया कि माईशुगर शुगर फैक्ट्री में पिछले साल 5 अगस्त को गन्ने की पेराई शुरू हुई थी और 25,000 मीट्रिक टन गन्ने के लक्ष्य में से 2,01,900 मीट्रिक टन (97.5%) गन्ने की पेराई हो चुकी है।
5,000 टन प्रतिदिन गन्ना पीसने की क्षमता वाला ब्वॉयलिंग हाउस स्थापित करने के लिए सरकार को 60 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। इस बीच, फैक्ट्री ने मौजूदा ब्वॉयलिंग हाउस की मरम्मत के लिए 2 से 3 करोड़ रुपए निवेश करने की योजना बनाई है। फिलहाल फैक्ट्री ने 3,500 टन प्रतिदिन गन्ना पीसने की मिल स्थापित की है और ब्वॉयलर हाउस को अपग्रेड किया गया है। इससे उच्च गुणवत्ता वाली चीनी का उत्पादन करने में मदद मिलेगी। पिछले साल का चीनी उत्पादन भी अच्छी गुणवत्ता का था। उन्होंने बताया कि इस गुणवत्ता को और बेहतर बनाने की योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा, "माईशुगर को आरबी टेक से घाटा हुआ है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार आरबी टेक को 3.6 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। अब यह घाटा माईशुगर एजेंसी की सुरक्षा जमा राशि से काटा जाएगा।"





