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Bengaluru बेंगलुरु: विशेष अदालत ने मुडा घोटाले मामले में लोकायुक्त पुलिस की 'बी रिपोर्ट' को स्वीकार कर लिया है, जिससे कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती बीएम, मल्लिकार्जुन स्वामी और देवराजू को क्लीन चिट मिल गई है। मुडा (मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी) मामले में आरोप था कि सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को मैसूर के केसरे गांव में 3 एकड़ 16 गुंटा जमीन के बदले विजयनगर इलाके में 50:50 योजना के तहत 14 प्राइम प्लॉट आवंटित किए गए थे। इन प्लॉट की कीमत करोड़ों में बताई गई और आरोप लगाया गया कि इससे राज्य को नुकसान हुआ और नियमों का उल्लंघन हुआ।
लोकायुक्त पुलिस ने इसकी गहन जांच की। जांच में आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। पुलिस ने 'सबूतों की कमी' का हवाला देते हुए 'बी रिपोर्ट' (क्लोजर रिपोर्ट) दाखिल की, जिसमें कहा गया कि आरोप साबित नहीं हो सके। विशेष अदालत ने इस रिपोर्ट को मंजूर कर लिया, जिससे सिद्धारमैया और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। दूसरी ओर, अदालत ने अन्य आरोपियों (मुडा अधिकारियों आदि) के खिलाफ आगे की जांच की अनुमति दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी अपनी जांच जारी रखने की इजाजत है, क्योंकि ईडी अलग से मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है।
यह मामला 2024 से चर्चा में था, जब आरटीआई एक्टिविस्ट स्नेहमयी कृष्णा ने शिकायत दर्ज की थी। इसके बाद लोकायुक्त ने एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू हुई। बाद में पार्वती ने विवाद बढ़ने पर उन 14 प्लॉट को मुडा को वापस कर दिया था। विपक्ष ने इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाया था, लेकिन लोकायुक्त की रिपोर्ट और कोर्ट के फैसले से सिद्धारमैया को राहत मिली है। ईडी की जांच अलग चल रही है, जिसका नतीजा आने पर स्थिति स्पष्ट होगी।
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