
बेंगलुरु। कर्नाटक की अनुभवी एथलीट एम. आर. पूवम्मा ने 2026 एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए दो पदक जीते हैं। उन्होंने महिलाओं की 4x400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले में भारतीय टीम के साथ रजत पदक जीता। इस उपलब्धि के बाद पूवम्मा और उनके परिवार ने खुशी और भावनाओं से भरे अनुभव साझा किए।
महिलाओं की 4x400 मीटर रिले में भारतीय टीम में किरण पहल, एम. आर. पूवम्मा, प्राची चौधरी और विथ्या रामराज शामिल थीं। इस चौकड़ी ने शानदार तालमेल दिखाते हुए 3 मिनट 29.69 सेकंड में रेस पूरी की और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। बहरीन की टीम 3:30.21 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि चीन ने 3:31.02 के साथ कांस्य पदक जीता।
इस जीत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पिछली एशियाई खेलों की महिला 4x400 मीटर रिले में भारत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। इस बार भारतीय महिला टीम ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक वापस अपने नाम किया। रेस के दौरान चारों धाविकाओं ने अपनी-अपनी लेग में दबाव को संभाला और अंतिम चरण तक भारत की बढ़त बनाए रखी।
पूवम्मा का अनुभव भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। वह लंबे समय से भारतीय एथलेटिक्स का हिस्सा रही हैं और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इस बार भी उन्होंने अहम मौके पर टीम को मजबूती दी। 36 वर्ष की उम्र में एशियाई खेलों का स्वर्ण जीतना उनके लंबे करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
महिला रिले के स्वर्ण के अलावा पूवम्मा ने मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले में भी भारत के लिए पदक जीता। मिक्स्ड रिले टीम में मनु टीएस, एम. आर. पूवम्मा, विशाल टीके और विथ्या रामराज शामिल थे। भारतीय टीम ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया। इस मुकाबले में भारत और वियतनाम के बीच पदक के लिए कड़ी टक्कर देखने को मिली और भारतीय टीम बेहद कम अंतर से दूसरे स्थान पर रही।
एक ही एशियाई खेलों में गोल्ड और सिल्वर जीतने के बाद पूवम्मा के लिए यह प्रतियोगिता खास बन गई है। सफलता के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने टीम की मेहनत और लंबे समय से की जा रही तैयारियों को इस उपलब्धि का आधार बताया। महिला रिले टीम का लक्ष्य इस बार पिछली बार के रजत पदक से आगे बढ़कर स्वर्ण हासिल करना था और खिलाड़ियों ने इसे पूरा कर दिखाया।
पूवम्मा और उनके परिवार के लिए यह जीत बेहद भावुक क्षण रहा। लंबे खेल करियर के दौरान उन्होंने कई उतार-चढ़ाव का सामना किया है। इसके बावजूद उन्होंने प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से दूरी नहीं बनाई। परिवार ने भी उनके लंबे संघर्ष, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण को याद किया।
महिलाओं की 4x400 मीटर रिले लंबे समय से भारतीय एथलेटिक्स की मजबूत स्पर्धाओं में शामिल रही है। भारत ने इस प्रतियोगिता में एशियाई खेलों के दौरान कई बार पदक जीते हैं। 2026 में मिला स्वर्ण इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाला परिणाम बना। इस जीत ने भारतीय महिला एथलीटों की निरंतरता और रिले स्पर्धाओं में उनकी ताकत को एक बार फिर साबित किया।
रेस की शुरुआत से ही मुकाबला कड़ा रहा। भारतीय टीम ने शुरुआती चरणों में अपनी स्थिति बनाए रखी और बीच की लेग में बढ़त मजबूत की। आखिरी लेग में विथ्या रामराज पर बढ़त बचाने की जिम्मेदारी थी। बहरीन की धाविका ने अंतिम मीटरों में दबाव बनाया, लेकिन भारतीय टीम ने बढ़त नहीं छोड़ी और सबसे पहले फिनिश लाइन पार की।
पूवम्मा की उपलब्धि कर्नाटक के लिए भी गर्व का विषय बनी है। राज्य की इस अनुभवी धाविका ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतकर अपनी पहचान मजबूत की है। उनकी उपलब्धि युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा मानी जा रही है, खासकर उन एथलीटों के लिए जो लंबे समय तक खेल में बने रहकर प्रदर्शन करना चाहते हैं।
पूवम्मा ने उम्र को अपने प्रदर्शन के रास्ते में नहीं आने दिया। 36 साल की उम्र में भी उन्होंने एशिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने भविष्य में भी प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स जारी रखने और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में हिस्सा लेने की इच्छा जताई है।
2026 एशियाई खेलों में भारतीय एथलेटिक्स टीम के लिए महिलाओं की 4x400 मीटर रिले का यह स्वर्ण बेहद खास रहा। यह इन खेलों में भारत के एथलेटिक्स अभियान का स्वर्ण पदक भी बना। रिले टीम की जीत ने भारत की कुल पदक संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
किरण पहल, प्राची चौधरी, एम. आर. पूवम्मा और विथ्या रामराज की चौकड़ी ने जिस तरह दबाव के बीच प्रदर्शन किया, उसने भारतीय महिला रिले टीम को दोबारा एशियाई खेलों के शीर्ष स्थान पर पहुंचा दिया। पिछली बार रजत हासिल करने वाली टीम के लिए इस बार स्वर्ण जीतना बड़ी उपलब्धि रही।
पूवम्मा के लिए इन खेलों का सफर दोहरी खुशी लेकर आया। महिला रिले में गोल्ड और मिक्स्ड रिले में सिल्वर जीतकर उन्होंने एक बार फिर भारतीय एथलेटिक्स में अपनी अहमियत साबित की। उनके अनुभव, निरंतरता और दबाव में प्रदर्शन ने दोनों रिले टीमों को मजबूत आधार दिया।
अब उनकी इस सफलता की चर्चा केवल पदकों तक सीमित नहीं है। लंबे करियर के बावजूद उच्च स्तर पर प्रदर्शन करना और युवा साथियों के साथ तालमेल बनाकर देश को स्वर्ण दिलाना उनकी उपलब्धि को और खास बनाता है। 2026 एशियाई खेलों में एम. आर. पूवम्मा का यह प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स की यादगार सफलताओं में शामिल हो गया है।





