
बेंगलुरु। सऊदी अरब के मक्का में उमराह यात्रा के लिए गए कर्नाटक के 600 से अधिक तीर्थयात्रियों की वापसी को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने संबंधित एयरलाइनों को चेतावनी दी है कि यदि 27 अक्टूबर तक सभी फंसे हुए तीर्थयात्रियों को सुरक्षित वापस नहीं लाया गया, तो वह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी। सरकार का कहना है कि यात्रियों ने वापसी के हवाई टिकटों का भुगतान पहले ही कर दिया है। ऐसे में संबंधित एयरलाइनों की जिम्मेदारी है कि वे यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाएं।
इस बीच फंसे हुए तीर्थयात्रियों के रहने और खाने-पीने की व्यवस्था हज कमेटी की ओर से की गई है। सरकार ने यात्रियों के परिजनों की सहायता के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। तीर्थयात्रियों के 27 अक्टूबर तक वापस लौटने की उम्मीद जताई गई है।
मक्का में फंसे कर्नाटक के 600 से अधिक तीर्थयात्री
जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के 600 से ज्यादा लोग उमराह यात्रा के लिए सऊदी अरब के मक्का गए थे।
यात्रा के बाद उनकी भारत वापसी में परेशानी सामने आई है। इसके कारण बड़ी संख्या में तीर्थयात्री निर्धारित समय पर वापस नहीं लौट सके हैं।
इस स्थिति को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है।
राज्य सरकार का कहना है कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना संबंधित एयरलाइनों की जिम्मेदारी है।
हालांकि उड़ानों में देरी या यात्रियों की वापसी प्रभावित होने के सटीक कारणों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
27 अक्टूबर तक वापसी की समयसीमा
कर्नाटक सरकार ने एयरलाइनों को 27 अक्टूबर तक फंसे हुए तीर्थयात्रियों को वापस लाने की चेतावनी दी है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा तक यात्रियों की वापसी नहीं होने की स्थिति में वह सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी।
इस चेतावनी से संकेत मिलता है कि राज्य सरकार तीर्थयात्रियों की वापसी में और देरी नहीं चाहती।
फिलहाल यात्रियों के 27 अक्टूबर तक भारत लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि सभी तीर्थयात्रियों की वापसी के लिए उड़ानों की निश्चित समय-सारिणी की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
एयरलाइनों की जिम्मेदारी पर उठाए सवाल
पत्रकारों से बातचीत में सरकार की ओर से कहा गया कि तीर्थयात्रियों ने अपने वापसी टिकटों का भुगतान पहले ही कर दिया है।
ऐसे में संबंधित एयरलाइनों को यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए।
इस मामले में इंडिगो, आकासा और एयर इंडिया जैसी एयरलाइनों का उल्लेख किया गया है।
सरकार का कहना है कि टिकट का भुगतान करने के बावजूद यात्रियों का फंसे रहना गंभीर चिंता का विषय है।
हालांकि संबंधित एयरलाइनों की ओर से इस मामले में क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसके अलावा कितने यात्री किस एयरलाइन की उड़ान से लौटने वाले थे, इसका विवरण भी स्पष्ट नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी
कर्नाटक सरकार ने तीर्थयात्रियों की वापसी के मुद्दे पर कानूनी कदम उठाने की संभावना जताई है।
सरकार के अनुसार, यदि 27 अक्टूबर तक यात्रियों को वापस नहीं लाया गया, तो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
इस संभावित कानूनी कार्रवाई का उद्देश्य यात्रियों की वापसी से संबंधित जिम्मेदारियों और व्यवस्थाओं पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करना हो सकता है।
हालांकि सरकार की ओर से अभी याचिका दायर किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल यह चेतावनी निर्धारित समयसीमा के भीतर यात्रियों की वापसी सुनिश्चित करने से जुड़ी है।
हज कमेटी ने की रहने और खाने की व्यवस्था
मक्का में फंसे तीर्थयात्रियों की परेशानियों को देखते हुए हज कमेटी ने सहायता की व्यवस्था की है।
जानकारी के अनुसार, तीर्थयात्रियों के लिए रहने और खाने-पीने का प्रबंध किया गया है।
इससे यात्रियों को वापसी की प्रतीक्षा के दौरान बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।
विदेश में यात्रा के दौरान वापसी प्रभावित होने पर आवास और भोजन की व्यवस्था विशेष महत्व रखती है।
हज कमेटी की इस पहल से फंसे हुए लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि तीर्थयात्रियों को किन स्थानों पर ठहराया गया है और यह व्यवस्था कितने दिनों के लिए की गई है, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
परिजनों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
कर्नाटक सरकार ने तीर्थयात्रियों के परिवारों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।
तीर्थयात्रियों के परिवार सहायता और जानकारी के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
इस हेल्पलाइन का उद्देश्य फंसे हुए यात्रियों के परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना है।
विदेश में किसी यात्री की वापसी में देरी होने पर उसके परिजनों के लिए सही जानकारी मिलना महत्वपूर्ण होता है।
हेल्पलाइन के माध्यम से परिवार संबंधित स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं।
हालांकि हेल्पलाइन के संचालन समय और उपलब्ध सेवाओं का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
तीर्थयात्रियों के परिवारों की बढ़ी चिंता
मक्का में 600 से अधिक तीर्थयात्रियों के फंसे होने से उनके परिवारों के लिए चिंता की स्थिति बनी हुई है।
यात्रा पूरी होने के बाद समय पर घर लौटना यात्रियों और उनके परिजनों के लिए महत्वपूर्ण होता है।
विशेष रूप से विदेश यात्रा के दौरान वापसी की उड़ान प्रभावित होने से आवास, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं की आवश्यकता बढ़ सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में समय पर जानकारी और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना जरूरी होता है।
राज्य सरकार की ओर से हेल्पलाइन जारी करना इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
हालांकि किसी विशेष तीर्थयात्री की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी या अन्य आपात स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
उमराह यात्रा से लौटने वालों को राहत की उम्मीद
उमराह इस्लाम धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है, जिसके लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सऊदी अरब जाते हैं।
कर्नाटक से भी श्रद्धालु इस धार्मिक यात्रा में शामिल होने के लिए मक्का पहुंचे थे।
वापसी की व्यवस्था प्रभावित होने से उन्हें निर्धारित समय से अधिक रुकना पड़ रहा है।
अब राज्य सरकार की चेतावनी और हज कमेटी की सहायता व्यवस्था के बीच यात्रियों की वापसी की उम्मीद बनी हुई है।
संबंधित एयरलाइनों की ओर से उड़ानों की व्यवस्था स्पष्ट होने पर यात्रियों और उनके परिवारों को राहत मिल सकेगी।
अब 27 अक्टूबर पर टिकी नजर
कर्नाटक सरकार ने मक्का में फंसे 600 से अधिक तीर्थयात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए 27 अक्टूबर की समयसीमा तय की है।
सरकार ने संबंधित एयरलाइनों को चेतावनी दी है कि निर्धारित तारीख तक यात्रियों की वापसी नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
फिलहाल हज कमेटी की ओर से यात्रियों के रहने और भोजन की व्यवस्था की गई है।
परिजनों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 948350 3132 भी जारी किया गया है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्धारित समयसीमा तक कितने तीर्थयात्री वापस लौट पाते हैं और एयरलाइनों की ओर से उनकी यात्रा के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।





