कर्नाटक

घर के सामने खड़ी बुजुर्ग महिला पर बंदर का हमला धक्का लगने से गिरीं सिर में चोट के बाद मौत

Kavita2
22 Sept 2026 11:28 AM IST
घर के सामने खड़ी बुजुर्ग महिला पर बंदर का हमला धक्का लगने से गिरीं सिर में चोट के बाद मौत
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कोप्पल: कर्नाटक के कोप्पल में बंदरों के आतंक से जुड़ी एक दर्दनाक घटना सामने आई है। बी.टी. पाटिल नगर में घर के सामने खड़ी 91 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर अचानक एक बंदर ने हमला कर दिया। बंदर के धक्का देने से महिला जमीन पर गिर गईं और उनके सिर में गंभीर चोट लगी। हादसे में बुजुर्ग महिला की मौके पर ही मौत हो गई।

मृतका की पहचान 91 वर्षीय नजमुनिसा बेगम के रूप में हुई है। घटना के बाद इलाके में शोक के साथ दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों के बीच आवासीय क्षेत्रों में घूमने वाले बंदरों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

घर के सामने खड़ी थीं नजमुनिसा बेगम

जानकारी के अनुसार नजमुनिसा बेगम बी.टी. पाटिल नगर स्थित अपने घर के सामने खड़ी थीं। इसी दौरान अचानक एक बंदर वहां पहुंच गया। इससे पहले कि बुजुर्ग महिला कुछ समझ पातीं, बंदर ने कथित तौर पर उन पर हमला करते हुए धक्का दे दिया।


91 वर्ष की उम्र होने के कारण नजमुनिसा खुद को संभाल नहीं सकीं और जमीन पर गिर गईं। गिरते समय उनके सिर में गंभीर चोट लगी।

घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोगों को भी उन्हें बचाने का मौका नहीं मिल पाया। सिर में लगी चोट गंभीर होने के कारण उनकी जान नहीं बच सकी।

सिर में लगी गंभीर चोट

बंदर के धक्के के बाद नजमुनिसा बेगम के गिरने से उनके सिर में गंभीर चोट आई। बुजुर्ग लोगों के लिए इस तरह गिरना बेहद खतरनाक हो सकता है। अधिक उम्र में शरीर का संतुलन कमजोर होने के साथ हड्डियों और अन्य अंगों को गंभीर चोट लगने का जोखिम भी बढ़ जाता है।

इस मामले में भी गिरने के बाद सिर पर लगी चोट घातक साबित हुई। घटना के बाद परिवार और आसपास के लोगों में मातम पसर गया।

कुछ समय पहले तक अपने घर के सामने खड़ी नजमुनिसा की अचानक मौत से परिवार के सदस्य सदमे में हैं।

इलाके में मचा हड़कंप

बुजुर्ग महिला की मौत की जानकारी मिलते ही बी.टी. पाटिल नगर में घटना की चर्चा फैल गई। आसपास रहने वाले लोग मौके पर पहुंचे। घटना ने क्षेत्र में घूम रहे बंदरों को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

रिहायशी इलाकों में बंदरों की मौजूदगी बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से जोखिम पैदा कर सकती है। अचानक हमला होने पर बुजुर्गों के लिए तेजी से भागना या खुद को बचाना मुश्किल होता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संबंधित विभागों को आवासीय इलाकों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।

बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरा

बंदर के हमले के दौरान सीधे काटने या खरोंचने से ही गंभीर चोट लगे, यह जरूरी नहीं है। अचानक बंदर के करीब आने या हमला करने पर डर के कारण व्यक्ति का संतुलन बिगड़ सकता है। सीढ़ियों, छत, सड़क या कठोर सतह पर गिरने से गंभीर चोट लग सकती है।

नजमुनिसा बेगम की मौत के मामले में भी बंदर के कथित धक्के के बाद गिरना जानलेवा साबित हुआ।

खास तौर पर अधिक उम्र के लोगों को ऐसी स्थिति में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। अचानक जानवर सामने आने पर घबराकर भागने की कोशिश करने से गिरने का खतरा बढ़ सकता है।

रिहायशी क्षेत्रों में बंदरों की मौजूदगी बनी समस्या

कई शहरों और कस्बों के रिहायशी क्षेत्रों में बंदरों का पहुंचना आम समस्या बन चुका है। भोजन की तलाश में बंदर घरों की छतों, बालकनियों और गलियों तक पहुंच जाते हैं।

लोगों द्वारा खुले में खाद्य सामग्री फेंकना या बंदरों को नियमित रूप से खाना देना भी उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों में आने के लिए आकर्षित कर सकता है। एक बार भोजन का स्रोत मिलने के बाद बंदरों के समूह बार-बार उसी क्षेत्र में लौट सकते हैं।

कई बार भोजन हासिल करने के दौरान बंदर आक्रामक व्यवहार भी कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में उनके बहुत करीब जाना या उन्हें भगाने की कोशिश करना जोखिम भरा हो सकता है।

बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा जरूरी

घटना के बाद बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत सामने आई है। जिन इलाकों में बंदरों की आवाजाही अधिक है, वहां परिवारों को बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बचना चाहिए।

घरों के बाहर फल, सब्जियां या दूसरी खाने की चीजें खुली नहीं छोड़नी चाहिए। कूड़ेदान भी ढककर रखना जरूरी है, ताकि जानवर भोजन की तलाश में घरों के आसपास जमा न हों।

बंदर के अचानक सामने आने पर उसे छेड़ने, पत्थर मारने या पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सुरक्षित दूरी बनाते हुए संबंधित विभाग को सूचना देना बेहतर विकल्प होता है।

स्थानीय प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद

नजमुनिसा बेगम की मौत के बाद इलाके में बंदरों की गतिविधियों को नियंत्रित करने की मांग उठ सकती है। ऐसे मामलों में वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

अगर किसी क्षेत्र में लगातार बंदरों के हमले सामने आ रहे हों तो विशेषज्ञ टीम के जरिए स्थिति का आकलन कराया जा सकता है। वन्यजीवों को पकड़ने या स्थानांतरित करने जैसे कदम भी प्रशिक्षित कर्मचारियों और लागू नियमों के तहत ही किए जाने चाहिए।

बंदरों और इंसानों के बीच बढ़ता टकराव केवल सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में वन्यजीव प्रबंधन से भी जुड़ा विषय है।

परिवार में पसरा मातम

91 वर्षीय नजमुनिसा बेगम की अचानक मौत से उनके परिवार में शोक का माहौल है। जिस समय हादसा हुआ, वह अपने घर के सामने ही मौजूद थीं। सामान्य परिस्थिति में घर के बाहर खड़ी महिला के साथ इस तरह की घटना होने से आसपास के लोग भी स्तब्ध हैं।

घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि आवासीय इलाकों में घूमने वाले आक्रामक बंदर गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। खास तौर पर बच्चों, बुजुर्गों और अकेले बाहर निकलने वाले लोगों के लिए खतरा ज्यादा हो सकता है।

कोप्पल के बी.टी. पाटिल नगर की इस घटना में बंदर के अचानक हमले और धक्का देने के बाद नजमुनिसा बेगम जमीन पर गिर गईं। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गई। घटना के बाद अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभागों पर है कि क्षेत्र में बंदरों से होने वाले खतरे को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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