
Karnataka कर्नाटक: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि देश की तरक्की के लिए समाज में आपसी मेलजोल और एकता बेहद जरूरी है। उन्होंने समाज से अपील की कि लोग जाति और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुटता के साथ आगे बढ़ें।
मोहन भागवत गुरुवार को मैसूर में JSS महाविद्यापीठ की गोल्डन जुबली लेक्चर सीरीज़ के तहत आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने “राष्ट्रीय विकास के लिए एक कैटलिस्ट के तौर पर सामाजिक मेलजोल” विषय पर अपना संबोधन दिया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संदर्भ में ‘समाज’ की अवधारणा पश्चिमी देशों की तुलना में अलग है। उनके अनुसार, समाज केवल लोगों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक साझा एकता और संबंधों की भावना पर आधारित संरचना है।
भागवत ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर देश का अपना एक उद्देश्य और मिशन होता है। भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह भूमि हमारी मातृभूमि है और हमारे पूर्वजों ने इस देश की पहचान और अस्तित्व को आकार दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि विकास का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह ऐसा समग्र विकास होना चाहिए जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उनके अनुसार, जब तक समाज के हर वर्ग को विकास का लाभ नहीं मिलेगा, तब तक सच्चे अर्थों में विकास पूरा नहीं माना जा सकता।
कार्यक्रम में उन्होंने सामाजिक एकता को मजबूत करने और आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि देश को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया और अधिक समावेशी और प्रभावी बन सके।





