
Karnataka कर्नाटक: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को कांग्रेस पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए उस पर जनता को “धोखा देने” और शासन चलाने में “असफल” रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर हो गई है और विकास की गति प्रभावित हो रही है।
बेंगलुरु में आयोजित भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बड़ी सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि Bharatiya Janata Party और एनडीए गठबंधन स्थिरता और विकास के प्रतीक हैं, जबकि कांग्रेस की राजनीति इसके विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में राज्यों के भीतर “धोखे की राजनीति” और प्रशासनिक ठहराव देखने को मिल रहा है।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से Karnataka का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों से वहां की सरकार जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय आंतरिक राजनीतिक संघर्षों में उलझी रही है। उनके अनुसार, राज्य में नेतृत्व और सत्ता-साझेदारी को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना रहा, जिसका सीधा असर शासन व्यवस्था पर पड़ा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार के भीतर लगातार चल रही खींचतान ने विकास कार्यों को प्रभावित किया है और प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया कमजोर हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनता को बुनियादी सुविधाओं और विकास योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन अंदरूनी विवादों के कारण सरकार की प्राथमिकताएं भटक गई हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के बीच कथित नेतृत्व को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान का भी अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सत्ता के भीतर अनिश्चितता और मतभेदों ने शासन को प्रभावित किया है और इससे आम जनता की समस्याओं का समाधान धीमा हो गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एनडीए सरकार का मॉडल स्थिरता, विकास और सुशासन पर आधारित है, जबकि कांग्रेस की राजनीति में अस्थिरता और अंदरूनी विवाद प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता तक विकास की नीतियों को पहुंचाएं और संगठन को मजबूत करें।
सभा के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों का भी जिक्र किया और कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए स्थिर राजनीतिक नेतृत्व जरूरी है।
कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति को लेकर दिए गए इस बयान को राज्य की मौजूदा राजनीतिक बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस और भाजपा के बीच लगातार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, और इस तरह के बयान से राज्य की राजनीति में तापमान और बढ़ने की संभावना है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का यह संबोधन आगामी राजनीतिक गतिविधियों और कर्नाटक की सत्ता राजनीति पर असर डालने वाला माना जा रहा है, जिसमें दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर लगातार निशाना साधते दिख रहे हैं।





