कर्नाटक

टाइगर सफारी में मोबाइल फोन पर बैन, अब जंगल में नहीं ले सकेंगे सेल्फी और वीडियो

Kavita2
10 Oct 2026 3:51 PM IST
टाइगर सफारी में मोबाइल फोन पर बैन, अब जंगल में नहीं ले सकेंगे सेल्फी और वीडियो
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बेंगलुरु। जंगल सफारी के दौरान बाघ, हिरण और अन्य वन्यजीवों की तस्वीरें मोबाइल फोन में कैद करने के शौकीन पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। कर्नाटक के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन क्षेत्रों में सफारी के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू करने का निर्देश दिया गया है। राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक कुमार पुष्कर ने चामराजनगर जिले के बांदीपुर, के. गुडी (बीआरटी) और पी.जी. पाल्या (एमएम हिल्स) सफारी क्षेत्रों में मोबाइल फोन के उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद इन क्षेत्रों में जंगल सफारी करने वाले पर्यटकों को नए नियमों का पालन करना होगा।

वन्यजीव पर्यटन के दौरान मोबाइल फोन से फोटो और वीडियो बनाना पर्यटकों के बीच आम बात है। कई लोग जंगल में बाघ की झलक पाने या हिरणों की गतिविधियां देखने के बाद उन पलों को अपने फोन में रिकॉर्ड करते हैं। लेकिन वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगल के प्राकृतिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए मोबाइल फोन के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की पहल की गई है।

बांदीपुर, के. गुडी और पी.जी. पाल्या में नियम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के चामराजनगर जिले में स्थित बांदीपुर, के. गुडी और पी.जी. पाल्या सफारी क्षेत्रों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू करने की बात कही गई है।

बांदीपुर देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में शामिल है। यहां बाघों के अलावा हाथी, तेंदुए, हिरण और अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं।

के. गुडी बीआरटी वन्यजीव क्षेत्र से जुड़ा है, जबकि पी.जी. पाल्या एमएम हिल्स क्षेत्र का हिस्सा है।

इन स्थानों पर जंगल सफारी के दौरान पर्यटक वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने पहुंचते हैं।

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में मोबाइल फोन को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय फोन को एयरप्लेन मोड में रखने और सेल्फी लेने से रोकने संबंधी निर्देशों का उल्लेख भी मिलता है। इसलिए पर्यटकों को संबंधित सफारी केंद्र के नवीनतम नियमों की पुष्टि करनी चाहिए।

वन विभाग ने क्यों उठाया कदम?

जंगल सफारी का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों को वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर देना है।

सफारी के दौरान मोबाइल फोन की घंटी, तेज आवाज, कैमरे की फ्लैश और पर्यटकों की अनावश्यक गतिविधियां वन्यजीवों के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं।

इसी कारण वन विभाग सफारी के दौरान अनुशासन बनाए रखने पर जोर देता है।

कर्नाटक के प्रधान मुख्य वन संरक्षक कुमार पुष्कर ने पहले भी सफारी के दौरान ऐसी वस्तुओं और गतिविधियों से बचने की आवश्यकता बताई थी, जो वन्यजीवों को परेशान कर सकती हैं।

मोबाइल से सेल्फी और वीडियो बनाने पर असर

जंगल सफारी में पर्यटक अक्सर बाघ या अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर मोबाइल निकालकर फोटो और वीडियो बनाने लगते हैं।

कई बार बेहतर तस्वीर लेने के लिए पर्यटक सफारी वाहन में अपनी जगह बदलते हैं या वन्यजीवों की ओर अधिक ध्यान केंद्रित कर देते हैं।

ऐसी गतिविधियों से सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं।

मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर नियंत्रण का उद्देश्य पर्यटकों को वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और सफारी के नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना है।

हालांकि, सामान्य कैमरों के उपयोग को लेकर प्रत्येक सफारी क्षेत्र में अलग नियम लागू हो सकते हैं। उपलब्ध जानकारी में सभी प्रकार के कैमरों पर समान प्रतिबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरे टाइगर रिजर्व में भी नियम

देश के कई प्रमुख टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के नियम लागू किए गए हैं।

इनमें राजस्थान के रणथंभौर और सरिस्का जैसे अभयारण्यों का उल्लेख मिलता है।

जिम कॉर्बेट, ताडोबा, कान्हा और पेंच जैसे अन्य प्रमुख वन्यजीव पर्यटन क्षेत्रों में भी पर्यटकों के लिए स्थानीय वन विभाग के दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि, इन सभी टाइगर रिजर्व के प्रत्येक कोर जोन में मोबाइल फोन पर एक जैसी पूर्ण पाबंदी लागू होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए किसी भी टाइगर रिजर्व में जाने से पहले वहां के वर्तमान नियमों की जानकारी लेना आवश्यक है।

कोर जोन की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

टाइगर रिजर्व का कोर जोन वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

यह क्षेत्र वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए निर्धारित किया जाता है।

बांदीपुर टाइगर रिजर्व भी महत्वपूर्ण बाघ संरक्षण क्षेत्रों में शामिल है। वन्यजीव संस्थान की जानकारी के अनुसार, यह प्रोजेक्ट टाइगर के शुरुआती नौ अभयारण्यों में शामिल था।

ऐसे क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को नियंत्रित रखना वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

वन विभाग के नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटकों की उपस्थिति से जंगल की प्राकृतिक गतिविधियों में अनावश्यक हस्तक्षेप न हो।

सफारी पर जाने से पहले जान लें नियम

नए निर्देशों के बाद पर्यटकों के लिए सफारी से पहले मोबाइल फोन संबंधी नियमों की जानकारी लेना महत्वपूर्ण होगा।

सफारी केंद्र पर यह स्पष्ट किया जा सकता है कि मोबाइल फोन वाहन में ले जाने की अनुमति है या नहीं, उसे एयरप्लेन मोड में रखना होगा अथवा किसी विशेष क्षेत्र में उसका इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है।

इसके अलावा पर्यटकों को वन विभाग के कर्मचारियों और सफारी गाइड के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

वन्यजीव दिखाई देने पर शोर मचाने, वाहन से उतरने या जानवरों के पास जाने जैसी गतिविधियों से बचना भी आवश्यक है।

वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता

कर्नाटक के वन्यजीव पर्यटन क्षेत्रों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर सख्त निर्देशों का उद्देश्य जंगल सफारी को अधिक सुरक्षित और अनुशासित बनाना है।

पर्यटकों के लिए बाघ और अन्य वन्यजीवों को करीब से देखना रोमांचक अनुभव होता है, लेकिन इस दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक वातावरण का सम्मान करना भी जरूरी है।

बांदीपुर, के. गुडी और पी.जी. पाल्या सफारी क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों को अब मोबाइल फोन से जुड़े स्थानीय निर्देशों पर विशेष ध्यान देना होगा। फोन के इस्तेमाल, सेल्फी और फोटोग्राफी से संबंधित प्रतिबंधों का सटीक दायरा संबंधित वन विभाग की नवीनतम अधिसूचना से स्पष्ट होगा।

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