कर्नाटक

परप्पना अग्रहारा जेल में प्रज्वल रेवन्ना के पास मोबाइल मिला, VIP सुविधाओं के आरोपों की जांच तेज

Kavita2
12 Aug 2026 9:49 AM IST
परप्पना अग्रहारा जेल में प्रज्वल रेवन्ना के पास मोबाइल मिला, VIP सुविधाओं के आरोपों की जांच तेज
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बेंगलुरु: कर्नाटक की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल एक बार फिर विवादों में है। यौन उत्पीड़न मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हासन के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना के पास मोबाइल फोन मिलने के बाद जेल प्रशासन की व्यवस्था और कैदियों को कथित VIP सुविधाएं दिए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मंगलवार को केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) के अधिकारियों ने जेल में अचानक तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान प्रज्वल रेवन्ना के पास एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन मिलने की जानकारी सामने आई।

प्रज्वल रेवन्ना फिलहाल जेल की आइसोलेशन बैरक में बंद हैं। ऐसे में उनके पास मोबाइल फोन मिलने की घटना को सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक माना जा रहा है। CCB अब यह पता लगाने में जुटी है कि मोबाइल फोन जेल के भीतर उनके पास कैसे पहुंचा, वह इसका इस्तेमाल कितने समय से कर रहे थे और उन्हें यह फोन किसने उपलब्ध कराया।

अचानक तलाशी में मिला मोबाइल

जानकारी के मुताबिक, CCB अधिकारियों ने मंगलवार को परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में अचानक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान अधिकारियों को प्रज्वल रेवन्ना के पास एंड्रॉयड मोबाइल फोन मिला। जेल नियमों के तहत कैदियों के पास मोबाइल फोन रखना प्रतिबंधित है। इसलिए फोन की बरामदगी के बाद जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रज्वल रेवन्ना को यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। उन्हें जेल में सामान्य कैदियों से अलग आइसोलेशन बैरक में रखा गया है। इसके बावजूद उनके पास मोबाइल फोन मिलने से जेल में निगरानी और तलाशी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

VIP सुविधाओं के आरोपों की जांच

मोबाइल फोन की बरामदगी ने जेल में VIP कैदियों को कथित तौर पर विशेष सुविधाएं दिए जाने के पुराने आरोपों को भी फिर चर्चा में ला दिया है। जांच एजेंसियां अब इस पहलू को भी खंगाल रही हैं कि क्या प्रज्वल रेवन्ना को जेल के भीतर किसी तरह की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही थी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आइसोलेशन बैरक में रहने वाले कैदी तक मोबाइल फोन कैसे पहुंचा। यदि फोन बाहर से जेल के भीतर पहुंचाया गया, तो सुरक्षा जांच के दौरान इसे पकड़ा क्यों नहीं गया। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि जेल का कोई कर्मचारी या अन्य व्यक्ति इस मामले में शामिल था या नहीं।

कितने समय से इस्तेमाल कर रहे थे फोन?

CCB अधिकारियों की जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि प्रज्वल रेवन्ना के पास मोबाइल फोन कितने समय से था। यदि उन्होंने लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किया है तो कॉल डिटेल, संपर्कों और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा सकती है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि फोन के जरिए किन लोगों से संपर्क किया गया। हालांकि, मोबाइल फोन मिलने की घटना के बाद जांच पूरी होने तक इन पहलुओं पर आधिकारिक तौर पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

किसने उपलब्ध कराया मोबाइल?

जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि प्रज्वल रेवन्ना को मोबाइल फोन किसने दिया। जेल में मोबाइल फोन ले जाना और कैदी तक पहुंचाना सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। इसलिए यदि जांच में किसी जेल कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

CCB इस बात की जांच करेगी कि फोन जेल के अंदर किस रास्ते से पहुंचा और क्या इसमें एक से अधिक लोग शामिल थे। अधिकारियों की अचानक तलाशी के दौरान फोन बरामद होने से अब जेल की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है।

परप्पना अग्रहारा पुलिस स्टेशन में दर्ज होगा मामला

CCB ने इस मामले में परप्पना अग्रहारा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज करने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रज्वल रेवन्ना और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ जेल नियमों के उल्लंघन समेत विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की जाएगी।

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की औपचारिक जांच शुरू करेगी। इसमें मोबाइल फोन की बरामदगी, उसके स्रोत और इस्तेमाल की अवधि से जुड़े पहलुओं की जांच शामिल हो सकती है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि फोन उपलब्ध कराने या जेल के अंदर इस्तेमाल कराने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल

परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल पहले भी कैदियों को कथित विशेष सुविधाएं मिलने के आरोपों के कारण चर्चा में रही है। ऐसे में एक हाई-प्रोफाइल कैदी के पास मोबाइल फोन मिलना जेल प्रशासन के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

जेल में कैदियों की नियमित तलाशी, बैरकों की निगरानी और प्रतिबंधित वस्तुओं की रोकथाम के लिए सुरक्षा व्यवस्था होती है। इसके बावजूद यदि कोई कैदी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था तो यह सुरक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है।

डिजिटल जांच भी महत्वपूर्ण

मोबाइल फोन की बरामदगी के बाद डिजिटल साक्ष्यों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। पुलिस यह जानने की कोशिश कर सकती है कि फोन में कौन से नंबर सेव थे, किन लोगों से संपर्क किया गया और फोन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।

हालांकि, इन सभी पहलुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल CCB और पुलिस का ध्यान मोबाइल फोन के जेल में पहुंचने और इसके इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों को सामने लाने पर है।

प्रज्वल रेवन्ना के पास मोबाइल मिलने की घटना ने एक बार फिर परप्पना अग्रहारा जेल की सुरक्षा व्यवस्था और हाई-प्रोफाइल कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर बहस छेड़ दी है। CCB की अचानक तलाशी में फोन बरामद होने के बाद अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रतिबंधित मोबाइल जेल के भीतर कैसे पहुंचा और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं। FIR दर्ज होने के बाद जांच आगे बढ़ेगी और इसी के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि मामले में प्रज्वल रेवन्ना के अलावा और कौन-कौन लोग जांच के दायरे में आते हैं।

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