
गदग। कर्नाटक के गदग जिले में सूखे की स्थिति को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। किसानों की मांग है कि गदग तालुक को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित किया जाए। इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच पहुंचे पूर्व मंत्री और विधायक एच.के. पाटिल ने अपनी ही सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 10 अक्टूबर तक गदग तालुक को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया तो वह अपने विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे।
एच.के. पाटिल ने यह बयान उन किसानों को संबोधित करते हुए दिया, जो गदग जिले के मुलगुंड शहर के पास कारवार-कैगा और गदग-इलकल को जोड़ने वाले स्टेट हाईवे को जाम कर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। बड़ी संख्या में किसान सड़क पर उतरकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे विधायक पाटिल ने किसानों की समस्याएं सुनीं और कहा कि सूखे की स्थिति को देखते हुए गदग तालुक को सूखाग्रस्त घोषित किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार समय सीमा के भीतर गदग तालुक को सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सूची में शामिल नहीं करती है तो वह सरकार पर दबाव बनाने के लिए बड़ा कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह विधायक पद से इस्तीफा देकर किसानों के मुद्दे को और मजबूती से उठाएंगे।
किसानों का आरोप है कि गदग तालुक में बारिश की कमी के कारण खेती प्रभावित हुई है। फसलों को नुकसान पहुंचा है और किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को जमीनी स्थिति को देखते हुए राहत उपायों की घोषणा करनी चाहिए।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने मांग की कि गदग तालुक को जल्द से जल्द सूखाग्रस्त घोषित किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को सरकारी सहायता और राहत योजनाओं का लाभ मिल सके। किसानों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में खेती करना मुश्किल हो गया है।
स्टेट हाईवे जाम होने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। हालांकि किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखते रहे।
एच.के. पाटिल ने कहा कि वह किसानों की मांग के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति का आकलन कर सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को राजनीतिक मुद्दे के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि कर्नाटक के कई इलाकों में बारिश की कमी और फसल नुकसान को लेकर किसान लगातार सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं। सूखाग्रस्त घोषित होने से किसानों को मुआवजा, राहत योजनाओं और अन्य सरकारी सहायता मिलने का रास्ता आसान हो सकता है।
राज्य सरकार की ओर से अभी तक एच.के. पाटिल की चेतावनी और किसानों की मांग को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। हालांकि प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
राजनीतिक रूप से भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि एक विधायक द्वारा अपनी ही सरकार को इस तरह की चेतावनी देना चर्चा का विषय बन गया है। एच.के. पाटिल ने स्पष्ट किया है कि वह किसानों के हितों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे।
अब सभी की नजर 10 अक्टूबर तक सरकार के फैसले पर टिकी हुई है। यदि सरकार गदग तालुक को सूखाग्रस्त घोषित करती है तो किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं फैसला नहीं होने पर विधायक के अगले कदम पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।





