
Karnataka कर्नाटक: दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाला जापान का मियाज़ाकी आम अब भारत में भी कम कीमत पर उपलब्ध होने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है, जिसके कारण यह आम आम उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर माना जाता है।
हालांकि अब कर्नाटक के कोप्पल जिले में यही प्रीमियम किस्म का आम काफी सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। यहां मियाज़ाकी आम की कीमत लगभग 3,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक है, जो अंतरराष्ट्रीय कीमत की तुलना में काफी कम है। इससे स्थानीय बाजार में इस खास फल को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।
करीब तीन साल पहले कर्नाटक के बागवानी विभाग ने किसानों को मियाज़ाकी आम की खेती के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया था। विभाग का उद्देश्य था कि उच्च मूल्य वाली इस फसल की खेती से किसानों की आय बढ़ाई जा सके और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार जैसी प्रीमियम फसलों की ओर प्रेरित किया जा सके।
अधिकारियों को उम्मीद थी कि मियाज़ाकी आम की खेती से किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा, क्योंकि इसकी वैश्विक मांग और कीमत बहुत अधिक है। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। किसानों को जल्द ही यह महसूस हुआ कि स्थानीय बाजार में इतने ऊंचे दाम पर इस आम की मांग सीमित है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मियाज़ाकी आम की असली चुनौती इसकी मार्केटिंग और उपभोक्ता पहुंच है। हालांकि यह किस्म स्वाद और गुणवत्ता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन इसकी अत्यधिक कीमत इसे आम ग्राहकों से दूर कर देती है। इसी कारण भारत में इसकी खेती के बावजूद इसे वैश्विक स्तर जैसी कीमत नहीं मिल पा रही है।
कोप्पल क्षेत्र में अब इसे अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर बेचने की कोशिश की जा रही है ताकि अधिक से अधिक लोग इस प्रीमियम फल का स्वाद ले सकें। इससे स्थानीय किसानों को भी कुछ हद तक फायदा मिल रहा है, हालांकि यह लाभ पहले की अपेक्षाओं से कम है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही विपणन रणनीति और ब्रांडिंग की जाए तो मियाज़ाकी आम भारत में भी एक विशेष प्रीमियम उत्पाद के रूप में स्थापित हो सकता है। लेकिन इसके लिए उत्पादन, वितरण और मांग के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।
फिलहाल कर्नाटक में इस आम की उपलब्धता ने उपभोक्ताओं के बीच उत्सुकता जरूर बढ़ाई है, लेकिन इसकी उच्च कीमत अब भी इसे एक लक्ज़री फ्रूट की श्रेणी में बनाए हुए है।





