कर्नाटक

खड़गे कार्यक्रम स्थल सफाई विवाद पर मंत्री मुनियप्पा ने मांगी जांच कहा संविधान का अपमान

Kavita2
20 Aug 2026 12:23 PM IST
खड़गे कार्यक्रम स्थल सफाई विवाद पर मंत्री मुनियप्पा ने मांगी जांच कहा संविधान का अपमान
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बेंगलुरु। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड के हल्द्वानी में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद कार्यक्रम स्थल की सफाई किए जाने के मामले को लेकर विवाद बढ़ गया है। कर्नाटक के मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी तरह का जातिगत भेदभाव या छुआछूत से जुड़ा मामला सामने आता है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

विधानसभा में शून्यकाल के दौरान विधायक शरथ बाचेगौड़ा और डॉ. एन.टी. श्रीनिवास ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल की सफाई किए जाने की घटना की निंदा की और इसे गंभीर मामला बताया।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने कहा कि ऐसी घटनाएं संविधान की भावना के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि देश में सामाजिक समानता और सभी नागरिकों के सम्मान की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

मुनियप्पा ने कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में छुआछूत और जाति आधारित अपमान को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि दलित समुदाय की गरिमा, उनके संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच कराने और यदि जांच में किसी की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। मंत्री ने कहा कि समाज में समानता का संदेश मजबूत करने के लिए ऐसे मामलों पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है।

यह विवाद उस घटना के बाद सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि खड़गे के कार्यक्रम के बाद आयोजन स्थल की विशेष सफाई कराई गई। इसे कुछ लोगों ने जातिगत भेदभाव से जोड़कर देखा और इसकी आलोचना शुरू कर दी।

हालांकि, घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद सफाई सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती है, जबकि कुछ संगठनों ने इसे सामाजिक भेदभाव से जोड़कर जांच की मांग की है।

मंत्री मुनियप्पा ने कहा कि देश ने संविधान लागू होने के बाद सामाजिक सुधार की दिशा में लंबी यात्रा तय की है, लेकिन इसके बावजूद जातिगत भेदभाव की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म या सामाजिक पहचान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।

विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने वाले विधायकों ने भी कहा कि समाज में समानता और सम्मान की भावना को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने मांग की कि ऐसी घटनाओं की जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा पैदा न हो।

मुनियप्पा ने कहा कि सामाजिक न्याय केवल कानूनों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में व्यवहार और सोच में बदलाव भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ग के लोगों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रही है।

देश में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए कई संवैधानिक प्रावधान बनाए गए हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून भी लागू हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों और राजनीतिक कार्यक्रमों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतना जरूरी है। किसी भी घटना को लेकर निष्पक्ष जांच के बाद ही सही निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकता है।

फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। मंत्री की ओर से जांच और कार्रवाई की मांग के बाद अब सभी की नजर संबंधित अधिकारियों की जांच प्रक्रिया पर है।

मुनियप्पा ने दोहराया कि सरकार सामाजिक समानता और संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ अपमानजनक व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जाएगा

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