कर्नाटक
कर्नाटक में महंगा हुआ दूध, सरकार ने 8 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए दाम
Ratna Netam
29 Oct 2026 8:36 PM IST

x
बेंगलुरु : 29 अक्टूबर 2026। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने आम उपभोक्ताओं को बड़ा झटका देते हुए दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। बढ़ी हुई कीमतें 1 नवंबर 2026 से लागू होंगी। सरकार के इस निर्णय के बाद कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) के लोकप्रिय नंदिनी ब्रांड का दूध महंगा हो जाएगा। सरकार ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि दूध उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और उत्पादन लागत में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी था।मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने पत्रकारों को बताया कि दूध की कीमत में होने वाली 8 रुपये की बढ़ोतरी में से 7 रुपये सीधे दूध उत्पादक किसानों को दिए जाएंगे, जबकि शेष एक रुपया दुग्ध सहकारी समितियों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से राज्य के लाखों पशुपालक परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी।
46 रुपये वाला दूध अब 54 रुपये में मिलेगा
कर्नाटक सरकार के फैसले के अनुसार, नंदिनी ब्रांड के नीले पैकेट में बिकने वाले सामान्य टोंड दूध की कीमत 46 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी।दूध की नई कीमतें लागू होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक खर्च में भी बढ़ोतरी होगी। विशेष रूप से ऐसे परिवारों पर इसका असर पड़ेगा, जो रोजाना एक से दो लीटर दूध खरीदते हैं।दूध की कीमतों में वृद्धि से चाय की दुकानों, होटलों, मिठाई विक्रेताओं और डेयरी उत्पादों से जुड़े कारोबारियों की लागत भी प्रभावित हो सकती है।हालांकि, अन्य प्रकार के दूध की अंतिम खुदरा कीमतें संबंधित दुग्ध संघों की ओर से निर्धारित की जाएंगी। कीमत तय करते समय दूध में वसा और अन्य गुणवत्ता संबंधी मानकों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
कृष्ण बायरे गौड़ा ने बताया कि वर्तमान में राज्य के दूध उत्पादक किसानों को प्रति लीटर लगभग 35 रुपये का खरीद मूल्य मिलता है। इसके अतिरिक्त सरकार की ओर से 5 रुपये प्रति लीटर का प्रोत्साहन दिया जाता है।नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को मिलने वाला खरीद मूल्य 35 रुपये से बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा।सरकारी प्रोत्साहन राशि को शामिल करने पर किसानों की कुल प्राप्ति 47 रुपये प्रति लीटर होगी।मंत्री ने कहा कि सरकार ने यह निर्णय किसानों की आर्थिक परेशानियों को देखते हुए लिया है। पशुपालन से जुड़े लाखों परिवार अपनी आजीविका के लिए दूध की बिक्री पर निर्भर हैं।उन्होंने बताया कि किसानों और दुग्ध सहकारी समितियों ने लगातार खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग उठाई थी।
किसानों ने मांगी थी 10 रुपये की बढ़ोतरी
सरकार के अनुसार, दूध उत्पादक किसान खरीद मूल्य में कम से कम 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी चाहते थे।किसानों का कहना था कि पशुओं के चारे, दवाओं, परिवहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है।इस कारण दूध उत्पादन पर आने वाला खर्च काफी बढ़ गया है, जबकि उन्हें मिलने वाला खरीद मूल्य अपेक्षाकृत कम था।कई दूध उत्पादकों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किए थे। इसके बाद सरकार ने संबंधित मंत्रियों और सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बातचीत की।मंत्रिमंडल में चर्चा के बाद 10 रुपये के बजाय 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई।सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों और सहकारी समितियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर सर्वसम्मति से लिया गया है।
दूसरे राज्यों से तुलना कर फैसले का बचाव
दूध की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार ने अन्य राज्यों में प्रचलित दरों का भी उल्लेख किया।मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने बताया कि दिल्ली और महाराष्ट्र में दूध की कीमत लगभग 59 रुपये प्रति लीटर, गुजरात में 57 रुपये, तेलंगाना में 64 रुपये और केरल में करीब 56 रुपये प्रति लीटर है।उनके अनुसार, कर्नाटक में बढ़ोतरी के बाद भी नंदिनी दूध की कीमत लगभग 54 रुपये प्रति लीटर रहेगी, जो कई दूसरे राज्यों और प्रतिस्पर्धी ब्रांडों की तुलना में कम है।सरकार का तर्क है कि किसानों को उचित मूल्य देने के साथ उपभोक्ताओं के हितों को भी ध्यान में रखा गया है।हालांकि, विभिन्न राज्यों में दूध के ब्रांड, गुणवत्ता और प्रकार के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है। इसलिए इस तुलना को समान श्रेणी के सभी दूध उत्पादों की सीधी तुलना नहीं माना जा सकता।
सूखे और बढ़ती लागत ने बढ़ाई मुश्किलें
कर्नाटक सरकार के मुताबिक, राज्य में सूखे की स्थिति और मौसम संबंधी परेशानियों का असर दूध उत्पादन पर पड़ा है।मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने बताया कि राज्य के लगभग 228 तालुकों में सूखे की स्थिति से पशुपालकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।चारे की कमी, पशुओं के रखरखाव पर बढ़ता खर्च और उत्पादन में गिरावट डेयरी क्षेत्र के लिए चुनौती बने हुए हैं।सरकार के अनुसार, राज्य में प्रतिदिन दूध की खरीद लगभग 10 लाख लीटर कम हुई है।इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री, परिवहन और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने सहकारी दुग्ध संघों का परिचालन खर्च भी बढ़ाया है।इसी वजह से मूल्य वृद्धि का एक रुपया प्रति लीटर हिस्सा दुग्ध सहकारी समितियों को देने का फैसला किया गया है।
पहले भी कई बार बढ़ चुके हैं दूध के दाम
कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई बार बढ़ोतरी की जा चुकी है।मार्च 2025 में दूध की कीमत 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई थी। इससे पहले जून 2024 में कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी।उस समय उपभोक्ताओं को प्रति लीटर पैकेट में अतिरिक्त 50 मिलीलीटर दूध देने की व्यवस्था की गई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।इससे पहले भी दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। ताजा फैसला ऐसे समय में आया है, जब आम परिवार पहले से ही खाद्य पदार्थों और घरेलू जरूरतों पर होने वाले खर्च को लेकर चिंतित हैं।
उपभोक्ताओं की जेब पर बढ़ेगा बोझ
दूध की कीमतों में आठ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ेगा।जो परिवार प्रतिदिन एक लीटर दूध खरीदता है, उसे 30 दिनों में लगभग 240 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। वहीं, रोजाना दो लीटर दूध खरीदने वाले परिवार का मासिक खर्च लगभग 480 रुपये बढ़ जाएगा।दूध से तैयार होने वाली चाय, कॉफी, मिठाई, दही और अन्य उत्पादों की उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है। हालांकि, इन वस्तुओं की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी होगी या नहीं, यह संबंधित कारोबारियों पर निर्भर करेगा।
एक नवंबर से नई दरें लागू
सरकार ने स्पष्ट किया है कि दूध की संशोधित कीमतें एक नवंबर से लागू होंगी। इससे पहले प्रस्ताव पर विचार किया गया था, लेकिन विधान परिषद चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण घोषणा में देरी हुई।मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब दुग्ध सहकारी समितियां नई दरों को लागू करने की तैयारी करेंगी।कर्नाटक सरकार का कहना है कि दूध की कीमत बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों की आय में सुधार करना है। वहीं, उपभोक्ताओं को अब रोजमर्रा की जरूरत के दूध पर अधिक खर्च करना पड़ेगा। ऐसे में यह फैसला किसानों को आर्थिक राहत देने और उपभोक्ताओं पर बढ़ते महंगाई के बोझ के बीच संतुलन की चुनौती को भी सामने लाता है।
Next Story





