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कर्नाटक में दूध-दही की कीमतों में उछाल, बिगड़ेगा घर का बजट

Kavita2
31 Oct 2026 11:04 AM IST
कर्नाटक में दूध-दही की कीमतों में उछाल, बिगड़ेगा घर का बजट
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बेंगलुरु। कर्नाटक में आम लोगों को महंगाई का एक और झटका लगा है। राज्य सरकार की ओर से दूध की कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दिए जाने के बाद कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) ने नंदिनी ब्रांड के दूध और दही की नई कीमतें जारी कर दी हैं। संशोधित दरें रविवार, 1 नवंबर 2026 से लागू होंगी। नई कीमतों के अनुसार, नंदिनी का एक लीटर दही अब 54 रुपये के बजाय 68 रुपये में मिलेगा। वहीं, आधा लीटर दही खरीदने के लिए ग्राहकों को 28 रुपये की जगह 34 रुपये चुकाने होंगे। दूध के विभिन्न प्रकारों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है।

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 29 अक्टूबर को नंदिनी दूध की कीमत में आठ रुपये प्रति लीटर की वृद्धि को मंजूरी दी थी। इसके बाद शुक्रवार को संशोधित कीमतों को लेकर आदेश जारी किया गया। इस फैसले से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की संभावना है। हालांकि, सरकार का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी का उद्देश्य दुग्ध उत्पादक किसानों और सहकारी दुग्ध संघों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना है।

एक लीटर दही पर 14 रुपये की बढ़ोतरी

नंदिनी ब्रांड के दही की कीमतों में हुई वृद्धि ग्राहकों के लिए बड़ा बदलाव मानी जा रही है। खासकर उन परिवारों पर इसका अधिक असर पड़ेगा, जहां रोजाना दूध और दही का इस्तेमाल होता है।

नई दरों के मुताबिक, आधा लीटर दही का पैकेट अब छह रुपये महंगा मिलेगा। वहीं, एक लीटर दही की कीमत में 14 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

दही की कीमतों में यह बदलाव दूध की तुलना में कुछ पैकिंग श्रेणियों में अधिक दिखाई देता है। यदि कोई परिवार प्रतिदिन एक लीटर दही खरीदता है, तो उसे पहले के मुकाबले महीने में लगभग 420 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे।

इसी तरह रोजाना आधा लीटर दही खरीदने वाले परिवार का मासिक खर्च करीब 180 रुपये बढ़ जाएगा। यह गणना 30 दिनों की खपत के आधार पर की गई है।

दूध की कीमतों में भी बड़ा बदलाव

नंदिनी के सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले टोन्ड दूध की कीमत 46 रुपये से बढ़ाकर 54 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। यानी ग्राहकों को अब प्रति लीटर आठ रुपये अतिरिक्त देने होंगे।

होमोजेनाइज्ड टोन्ड दूध की कीमतों में भी संशोधन किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इसकी नई दर को लेकर अंतर दिखाई देता है। कुछ विवरणों में पुरानी कीमत 47 रुपये से बढ़ाकर 56 रुपये बताई गई है, जबकि अन्य रिपोर्टों में संशोधित कीमत 55 रुपये दर्ज है। ऐसे में ग्राहकों को खरीदारी के समय पैकेट पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य की पुष्टि करनी चाहिए।

दूध की कीमतों में वृद्धि से उन परिवारों का खर्च बढ़ेगा, जहां बच्चों, बुजुर्गों और अन्य सदस्यों के लिए प्रतिदिन दूध की नियमित खपत होती है।

घर के बजट पर पड़ेगा सीधा असर

दूध और दही रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल हैं। चाय, कॉफी, नाश्ते, भोजन और मिठाइयों में इनका नियमित इस्तेमाल होता है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ सकता है।

यदि कोई परिवार प्रतिदिन दो लीटर टोन्ड दूध खरीदता है, तो आठ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के हिसाब से उसे रोजाना 16 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।

इस तरह महीने भर में लगभग 480 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यदि इसके साथ दही की नियमित खरीद भी शामिल हो, तो कुल खर्च और बढ़ सकता है।

कम और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए यह वृद्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। पहले से घरेलू खर्च का प्रबंधन कर रहे लोगों को अब दूध और दही के लिए अधिक बजट रखना होगा।

होटल और रेस्टोरेंट कारोबार भी हो सकता है प्रभावित

दूध की कीमतों में वृद्धि का असर केवल घरों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। होटल, रेस्टोरेंट, चाय की दुकानों, बेकरी और मिठाई कारोबार में भी दूध तथा उससे बनने वाले उत्पादों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।

दूध और दही महंगे होने से इन प्रतिष्ठानों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है। खासकर चाय, कॉफी, लस्सी, दही आधारित व्यंजनों और मिठाइयों की बिक्री करने वाले कारोबारियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

हालांकि, बाजार में तैयार खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी या नहीं, यह संबंधित कारोबारियों के फैसले और अन्य लागतों पर निर्भर करेगा। बेंगलुरु के होटल कारोबारियों के बीच मूल्य संशोधन की संभावना को लेकर चर्चा होने की रिपोर्ट भी सामने आई है।

दुग्ध उत्पादक किसानों को राहत देने की कोशिश

राज्य सरकार ने कीमतों में वृद्धि के पीछे दुग्ध उत्पादक किसानों को बेहतर भुगतान दिलाने की जरूरत बताई है।

कर्नाटक के सहकारिता क्षेत्र में दूध उत्पादन लाखों ग्रामीण परिवारों की आय का महत्वपूर्ण साधन है। पशुओं के चारे, रखरखाव और परिवहन से जुड़े खर्चों में बदलाव का असर दुग्ध उत्पादन की लागत पर पड़ता है।

सरकार के अनुसार, प्रति लीटर आठ रुपये की वृद्धि में से सात रुपये का लाभ दुग्ध उत्पादक किसानों तक पहुंचाने और एक रुपये सहकारी दुग्ध संघों के लिए रखने की व्यवस्था की गई है।

सरकार का तर्क है कि इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा और दुग्ध सहकारी व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

किसानों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन की चुनौती

दूध की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार के सामने दो अलग-अलग जरूरतों का संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।

एक तरफ दूध उत्पादक किसान हैं, जिन्हें उत्पादन लागत के अनुसार बेहतर कीमत चाहिए। दूसरी तरफ आम उपभोक्ता हैं, जिनके लिए दूध और दही जरूरी खाद्य पदार्थ हैं।

कीमतों में वृद्धि से किसानों की आय में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन ग्राहकों को इसका अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा।

नंदिनी कर्नाटक का प्रमुख सहकारी डेयरी ब्रांड है। राज्य में इसके दूध और दुग्ध उत्पादों का व्यापक उपयोग होता है। इसलिए कीमतों में किसी भी तरह के बदलाव का प्रभाव बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

1 नवंबर से लागू होंगी नई दरें

केएमएफ की संशोधित कीमतें 1 नवंबर से लागू होंगी। ऐसे में ग्राहकों को रविवार से दूध और दही खरीदते समय नई दरों के अनुसार भुगतान करना होगा।

उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे खरीदारी करते समय पैकेट पर अंकित कीमत और मात्रा अवश्य जांचें। विशेष रूप से अलग-अलग प्रकार के दूध के पैकेटों की दरें अलग हो सकती हैं।

फिलहाल दूध और दही की बढ़ी हुई कीमतों ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार जहां इस फैसले को दुग्ध उत्पादकों के हित में जरूरी बता रही है, वहीं उपभोक्ताओं को अब रोजमर्रा की इन आवश्यक वस्तुओं पर पहले से अधिक खर्च करना होगा।

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