
बेंगलुरु। कर्नाटक में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को लेकर प्रवासी मतदाताओं (Overseas Voters) के सामने नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। ऑनलाइन एन्यूमरेशन फॉर्म भरने वाले कई प्रवासी मतदाताओं को अब डेटा मैपिंग में गड़बड़ी और अन्य तकनीकी कारणों के चलते नोटिस जारी किए गए हैं।
इन मतदाताओं को अब SIR सुनवाई के लिए इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ सकता है। इससे विदेशों में रहने वाले कई भारतीय मतदाताओं के लिए परेशानी बढ़ गई है।
ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद भी आई समस्या
जानकारी के अनुसार, कई प्रवासी मतदाताओं ने SIR प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किया था। उन्हें उम्मीद थी कि डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और उन्हें भारत आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
लेकिन अब कुछ मामलों में डेटा मैपिंग नहीं होने, रिकॉर्ड में असंगतियों और लॉजिकल गड़बड़ियों के कारण नोटिस भेजे जा रहे हैं।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, जिन मतदाताओं के दस्तावेज या जानकारी सिस्टम में सही तरीके से मेल नहीं खा रही है, उन्हें सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सिर्फ 951 NRI मतदाता
कर्नाटक में SIR के तहत 24 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में केवल 951 NRI मतदाताओं के नाम शामिल थे।
हालांकि, अधिकारियों और जानकारों को आशंका है कि वास्तविक संख्या इससे काफी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों ने ऑनलाइन एन्यूमरेशन प्रक्रिया का विकल्प चुना था।
अब सवाल उठ रहा है कि ऑनलाइन आवेदन करने वाले कई प्रवासी मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं।
ERO के सामने व्यक्तिगत उपस्थिति की चुनौती
SIR प्रक्रिया में नोटिस मिलने वाले प्रवासी मतदाताओं को अब ERO के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखना पड़ सकता है।
विदेशों में रहने वाले मतदाताओं के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि उन्हें इसके लिए भारत यात्रा करनी पड़ सकती है।
कई प्रवासी मतदाता लंबे समय से विदेशों में रह रहे हैं और अचानक व्यक्तिगत सुनवाई में शामिल होना उनके लिए आसान नहीं होगा।
डेटा सत्यापन प्रक्रिया बनी वजह
चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, मतदाता सूची को अपडेट करने के दौरान डेटा सत्यापन एक महत्वपूर्ण चरण होता है।
इस प्रक्रिया में मतदाता की पहचान, पते और अन्य जानकारी का मिलान किया जाता है। यदि रिकॉर्ड में कोई अंतर मिलता है तो संबंधित व्यक्ति से अतिरिक्त जानकारी मांगी जाती है।
SIR के दौरान भी ऐसी ही तकनीकी समस्याओं के कारण कुछ प्रवासी मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं।
प्रवासी भारतीयों में बढ़ी चिंता
नोटिस मिलने के बाद कई प्रवासी मतदाताओं में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि उन्होंने नियमों के अनुसार ऑनलाइन फॉर्म भरा था, फिर भी उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।
उनका कहना है कि विदेशों से भारत आकर प्रक्रिया पूरी करना समय और आर्थिक रूप से कठिन हो सकता है।
कुछ प्रवासी संगठनों ने भी चुनाव अधिकारियों से अपील की है कि ऐसी स्थिति में ऑनलाइन सत्यापन या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे विकल्पों पर विचार किया जाए।
मतदाता सूची की शुद्धता पर जोर
चुनाव आयोग का उद्देश्य SIR के जरिए मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करना है। इसके तहत गलत, डुप्लीकेट या अपात्र नामों को हटाने और पात्र मतदाताओं को शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है।
अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया का उद्देश्य किसी योग्य मतदाता को हटाना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड को सही करना है।
आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के दौरान आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर चुनाव अधिकारी लगातार समीक्षा कर रहे हैं।
प्रवासी मतदाताओं के मामलों में भी अधिकारियों द्वारा डेटा की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कितने NRI मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल किए जाते हैं।
प्रवासी मतदाताओं के लिए जरूरी है सतर्कता
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी मतदाताओं को जारी नोटिस का समय पर जवाब देना जरूरी है, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में बना रहे।
कर्नाटक में SIR प्रक्रिया अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। जहां एक ओर चुनाव आयोग मतदाता सूची को मजबूत बनाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर ऑनलाइन आवेदन करने वाले कई प्रवासी मतदाता तकनीकी समस्याओं के कारण परेशानियों का सामना कर रहे हैं।





