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Bengaluru बेंगलुरु। कर्नाटक में बेंगलुरु मेट्रो (नम्मा मेट्रो) के किराए में प्रस्तावित बढ़ोतरी पर राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। विपक्ष के नेता और भाजपा विधायक आर. अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल से फोन पर विस्तार से चर्चा की है। अशोक के अनुसार, मनोहर लाल ने प्रस्तावित किराया बढ़ोतरी को फिलहाल रोकने के निर्देश दिए हैं, जो 9 फरवरी से लागू होने वाली थी।
आर. अशोक ने अपने पोस्ट में लिखा कि बेंगलुरु मेट्रो का किराया पहले से ही देश में सबसे महंगा है। कोई भी अतिरिक्त बढ़ोतरी लाखों दैनिक यात्रियों, कामकाजी वर्ग, छात्रों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर नागरिकों पर भारी बोझ डालेगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बढ़ोतरी को रोक दिया जाए। मनोहर लाल ने आश्वासन दिया है कि वे किराया निर्धारण समिति (एफएफसी) की सिफारिशों में कमियों और विसंगतियों की व्यक्तिगत समीक्षा करेंगे। अगर राज्य सरकार औपचारिक अनुरोध करेगी, तो एक नई समिति गठित की जा सकती है ताकि किराए में वैज्ञानिक और तर्कसंगत संशोधन हो।
अशोक ने कर्नाटक के लोगों की ओर से मनोहर लाल का आभार व्यक्त किया और कहा कि अब यह कांग्रेस सरकार पर निर्भर है कि वह लोगों के हित में काम करे। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और कर्नाटक कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य सरकार को अपना कठोर और असंवेदनशील रवैया छोड़ना चाहिए और नई किराया निर्धारण समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक मेट्रो यात्रा हर आम नागरिक के लिए सस्ती और सुलभ नहीं हो जाती।"
बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) ने 5 फरवरी को 5 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी की घोषणा की थी, जो 9 फरवरी से प्रभावी होनी थी। न्यूनतम किराया 10 से बढ़कर 11 रुपए और अधिकतम किराया 95 रुपए तक पहुंच सकता था। यह बढ़ोतरी पिछले साल की 50-71 प्रतिशत की भारी वृद्धि के बाद आई थी, जिससे नम्मा मेट्रो देश की सबसे महंगी मेट्रो बन गई। यात्रियों और विपक्षी दलों ने इसकी कड़ी आलोचना की।
कांग्रेस सरकार ने आरोप लगाया कि किराया निर्धारण केंद्र के अधीन है, जबकि भाजपा ने कहा कि राज्य सरकार बीएमआरसीएल बोर्ड में बहुमत होने के बावजूद कुछ नहीं कर रही। अशोक के हस्तक्षेप से बढ़ोतरी रुकने के बाद यात्रियों में राहत है, लेकिन स्थायी समाधान की मांग जारी है। यह मुद्दा कर्नाटक में राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है, जहां आम जनता मेट्रो को किफायती बनाने की अपेक्षा कर रही है।
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