कर्नाटक

मेकेदातु परियोजना से कावेरी डॉक्यूमेंट्री के लैंडस्केप पर खतरे की आशंका

Kavita2
6 July 2026 10:01 AM IST
मेकेदातु परियोजना से कावेरी डॉक्यूमेंट्री के लैंडस्केप पर खतरे की आशंका
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Karnataka कर्नाटक: वाइल्डलाइफ़ कंज़र्वेशनिस्ट संजय गुब्बी ने प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि यह परियोजना लागू होती है, तो उनकी डॉक्यूमेंट्री ‘कावेरी: रिवर ऑफ लाइफ’ में दिखाए गए प्राकृतिक लैंडस्केप और जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) इतिहास बन सकते हैं और उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

यह बयान उन्होंने मैसूर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के बाद दिया। इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, नदी प्रणाली और जैव विविधता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। संजय गुब्बी ने कहा कि कावेरी नदी और उसके आसपास का पारिस्थितिक तंत्र बेहद संवेदनशील है और किसी भी बड़े निर्माण कार्य का उस पर गहरा असर पड़ सकता है।

उन्होंने बताया कि डॉक्यूमेंट्री को तैयार करने में लगभग चार साल का समय लगा, ताकि कावेरी नदी को सभी मौसमों में उसके प्राकृतिक रूप में दिखाया जा सके। इस दौरान नदी के बदलते स्वरूप, वन्यजीवों की गतिविधियों और मौसम के साथ उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों को विस्तार से रिकॉर्ड किया गया।

संजय गुब्बी ने कहा कि इस डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य केवल एक दृश्य प्रस्तुति देना नहीं था, बल्कि कावेरी नदी के पूरे पारिस्थितिक चक्र को समझना और दिखाना था। इसमें नदी के सालभर के बदलते स्वरूप, आसपास के जंगलों और वहां रहने वाले जीवों के जीवन चक्र को प्रमुखता से दर्शाया गया है।

उन्होंने कहा कि उनका प्रयास था कि नदी की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को पूरे मौसम चक्र के साथ रिकॉर्ड किया जाए, ताकि यह समझा जा सके कि प्रकृति किस तरह समय के साथ बदलती है और वन्यजीव इन परिवर्तनों के साथ कैसे सामंजस्य बनाते हैं।

कंज़र्वेशनिस्ट के अनुसार, कावेरी नदी केवल एक जल स्रोत नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन का आधार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है, तो इस क्षेत्र के कई प्राकृतिक आवास और वन्यजीव प्रभावित हो सकते हैं।

उनका कहना था कि ऐसे प्रोजेक्ट्स से न केवल नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर असर पड़ता है, बल्कि इससे जुड़े वन्यजीवों और पौधों की प्रजातियों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भी इस मुद्दे पर चर्चा की और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। कई विशेषज्ञों ने कहा कि विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान न पहुंचे।

संजय गुब्बी ने कहा कि उनकी डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य लोगों को कावेरी नदी की वास्तविक स्थिति और उसके पारिस्थितिक महत्व से अवगत कराना है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि इस तरह की प्रस्तुतियों से लोग प्रकृति के प्रति अधिक जागरूक होंगे और संरक्षण के प्रयासों को समर्थन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि प्रकृति को समझने के लिए समय और गहराई की आवश्यकता होती है, और यही कारण है कि इस डॉक्यूमेंट्री को तैयार करने में वर्षों का समय लगा। यह केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दस्तावेज भी है।

कुल मिलाकर, मेकेदातु परियोजना को लेकर उठी यह चिंता एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन की बहस को सामने लाती है। कावेरी नदी की जैव विविधता और प्राकृतिक स्वरूप को बचाने की आवश्यकता पर विशेषज्ञों का ध्यान केंद्रित हो रहा है।

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