कर्नाटक
प्रज्वल रेवन्ना को सजा दिलाने वाली SIT टीम के तीन अधिकारियों को मेडल
Ratna Netam
2 Nov 2026 2:35 PM IST

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बेंगलुरु। कर्नाटक के चर्चित पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना यौन उत्पीड़न मामले की जांच करने वाली विशेष जांच टीम (SIT) के तीन अधिकारियों को केंद्र सरकार ने सम्मानित किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इन अधिकारियों को उत्कृष्ट जांच कार्य के लिए पदक प्रदान किया गया है। सम्मानित होने वाले अधिकारियों में इंस्पेक्टर शोभा एन, सहायक उपनिरीक्षक (ASI) रत्नम्मा के और कांस्टेबल बालकृष्ण वाई शामिल हैं। तीनों अधिकारियों ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी टीम ने साक्ष्य जुटाने से लेकर पीड़िता के बयान और तकनीकी तथ्यों को अदालत के सामने प्रस्तुत करने तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इस जांच के परिणामस्वरूप पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को दुष्कर्म के एक मामले में दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से 31 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, इन अधिकारियों को जांच में उत्कृष्टता के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय का मेडल फॉर एक्सीलेंस इन इन्वेस्टिगेशन प्रदान किया गया है। इसे केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक-2026 के रूप में भी रिपोर्ट किया गया है। यह सम्मान उन पुलिस अधिकारियों और जांचकर्मियों को दिया जाता है, जिन्होंने आपराधिक मामलों की जांच में पेशेवर क्षमता, तकनीकी दक्षता और प्रभावी कार्यप्रणाली का परिचय दिया हो। कर्नाटक के इन तीन अधिकारियों का चयन इस बात का संकेत है कि प्रज्वल रेवन्ना मामले की जांच में उनकी भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।
तीनों अधिकारियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
पदक पाने वाले अधिकारियों में इंस्पेक्टर शोभा एन, सहायक उपनिरीक्षक रत्नम्मा के और सिविल पुलिस हेड कांस्टेबल बालकृष्ण वाई शामिल हैं। ये सभी कर्नाटक पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (CID) के अंतर्गत गठित विशेष जांच दल का हिस्सा थे। इस टीम ने प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म से संबंधित मामलों की जांच की थी।इस मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए जांच टीम के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं। मामले में डिजिटल वीडियो, तस्वीरें, पीड़िता के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का परीक्षण करना जरूरी था। जांच अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना था कि प्रत्येक साक्ष्य को उचित तरीके से सुरक्षित किया जाए और अदालत में उसकी प्रमाणिकता स्थापित हो सके।
वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों की जांच बनी बड़ी चुनौती
प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े मामले में सामने आए वीडियो और डिजिटल सामग्री ने पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा छेड़ दी थी। जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध वीडियो की सत्यता, उनमें दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान और घटनाओं से संबंधित तथ्यों को प्रमाणित करने की थी।रिपोर्टों के मुताबिक, कई वीडियो में आरोपी का चेहरा स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में जांचकर्ताओं ने तकनीकी और फोरेंसिक तरीकों का सहारा लिया। शरीर पर मौजूद जन्मचिह्न, तिल और टैटू जैसे विशिष्ट पहचान चिह्नों की तुलना मेडिकल परीक्षण से प्राप्त तस्वीरों के साथ की गई। इसके अलावा सैकड़ों वीडियो और हजारों डिजिटल स्क्रीनशॉट का विश्लेषण किया गया। अलग-अलग पीड़िताओं से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर घटनाओं और स्थानों के बीच संबंधों की जांच की गई।
2024 में हुआ था SIT का गठन
प्रज्वल रेवन्ना का मामला अप्रैल 2024 में उस समय देशभर में सुर्खियों में आया, जब लोकसभा चुनाव के दौरान कथित यौन शोषण से जुड़े कई वीडियो सामने आए। इन वीडियो में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे। मामला सामने आने के बाद कर्नाटक की राजनीति में भी भारी हलचल मच गई थी। प्रज्वल रेवन्ना उस समय हासन लोकसभा सीट से जनता दल (सेक्युलर) के सांसद थे और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते हैं।मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने अप्रैल 2024 में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। इस टीम की जिम्मेदारी अपराध जांच विभाग (CID) के अधिकारियों को सौंपी गई थी। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बीके सिंह ने इस SIT का नेतृत्व किया था। टीम को वीडियो की जांच, पीड़ित महिलाओं की शिकायतों पर कार्रवाई और संबंधित मामलों में साक्ष्य एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई थी।मामला सार्वजनिक होने के बाद प्रज्वल रेवन्ना विदेश चले गए थे। जांच एजेंसियों ने उनकी तलाश तेज की और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई। बाद में 31 मई 2024 को जर्मनी से लौटने पर बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उन्हें हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की जांच के लिए हिरासत में रखा गया।
अदालत ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा
इस मामले में जांच के बाद बेंगलुरु की सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने 1 अगस्त 2025 को प्रज्वल रेवन्ना को एक घरेलू सहायिका के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया था। इसके अगले दिन यानी 2 अगस्त 2025 को अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।अदालत ने उन्हें शेष प्राकृतिक जीवन तक जेल में रखने का आदेश दिया था। इसके साथ ही विभिन्न संबंधित अपराधों में भी सजा और 11.50 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया था। इसमें लगभग 11.25 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के तौर पर देने का आदेश शामिल था। इस फैसले को मामले की सुनवाई में एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव माना गया।हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ एक से अधिक मामले दर्ज हुए थे। अगस्त 2025 का दोषसिद्धि और आजीवन कारावास का फैसला एक विशेष दुष्कर्म मामले से संबंधित था। अन्य मामलों की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग चल रही है। रेवन्ना ने दोषसिद्धि और सजा को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती भी दी है। दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने और जमानत देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी।
SIT प्रमुख ने भी की अधिकारियों की सराहना
SIT का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बीके सिंह ने तीनों अधिकारियों को मिले सम्मान पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि जांच दल के सदस्यों ने वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही पीड़िता और उसके परिवार के साथ लगातार खड़े रहना भी एक चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी थी। जांच के दौरान अधिकारियों ने संवेदनशीलता और पेशेवर क्षमता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।कर्नाटक पुलिस के लिए यह सम्मान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मामला काफी संवेदनशील होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बना रहा। ऐसी परिस्थितियों में जांच की निष्पक्षता, साक्ष्यों की विश्वसनीयता और पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस के सामने बड़ी चुनौती थी।केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से मिले इस सम्मान ने एक बार फिर जांच अधिकारियों की भूमिका को चर्चा में ला दिया है। तीनों अधिकारियों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान उनके कार्य और जांच प्रक्रिया में योगदान का सम्मान है। वहीं, प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई और उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ लंबित कानूनी चुनौती के चलते इस पूरे प्रकरण पर आगे भी नजर बनी रहेगी।
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