
बेंगलुरु। कर्नाटक में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। घर-घर जाकर किए गए सत्यापन अभियान के बाद राज्य में 1.08 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने की संभावना है।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, यदि अगले चरण में संबंधित मतदाता जरूरी दस्तावेज जमा नहीं करते हैं, तो मतदाता सूची से उनके नाम हटाए जा सकते हैं। इसके अलावा करीब 25 लाख अन्य मतदाताओं के नाम भी सूची से बाहर हो सकते हैं, यदि वे तय प्रक्रिया के तहत अपनी पात्रता साबित नहीं कर पाते हैं।
जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक में 30 जून से 17 अगस्त तक घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन अभियान चलाया गया। इस दौरान चुनाव अधिकारियों ने मतदाताओं की जानकारी की जांच की और यह पता लगाने की कोशिश की कि कौन से मतदाता वर्तमान में अपने पते पर मौजूद हैं।
सत्यापन प्रक्रिया के बाद 17 अगस्त शाम 7 बजे तक कुल 5.54 करोड़ मतदाताओं में से 1,08,31,945 मतदाताओं को ASDDO श्रेणी में दर्ज किया गया है। यह कुल मतदाताओं का करीब 19.54 प्रतिशत है।
ASDDO श्रेणी में ऐसे मतदाता शामिल किए जाते हैं, जो अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), मृत (Dead), डुप्लिकेट (Duplicate) या अन्य कारणों से संदिग्ध पाए जाते हैं। चुनाव विभाग का कहना है कि इन नामों की आगे जांच की जाएगी और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
राज्य में वर्तमान मतदाताओं की कुल संख्या 5,54,32,314 बताई गई है। SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है, ताकि केवल योग्य और वास्तविक मतदाताओं के नाम ही सूची में बने रहें।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, ASDDO श्रेणी में शामिल किए गए सभी मतदाताओं को प्रक्रिया के तहत अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जाएगा। यदि कोई मतदाता जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराता है और यह साबित करता है कि वह पात्र मतदाता है, तो उसका नाम सूची में बनाए रखा जा सकता है।
वहीं, यदि मतदाता निर्धारित समय में दस्तावेज जमा नहीं करता है या सत्यापन में वह पात्र नहीं पाया जाता है तो उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ दलों ने मतदाता सूची की शुद्धता के लिए इसे जरूरी कदम बताया है, जबकि कुछ नेताओं ने बड़ी संख्या में नाम हटने की संभावना को लेकर चिंता जताई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की स्थिति में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से न हटे।
चुनाव विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार की जा रही है और किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन के दौरान सामने आए मामलों की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।
घर-घर सत्यापन अभियान के दौरान चुनाव कर्मचारियों ने मतदाताओं के पते, पहचान और अन्य जानकारी की जांच की। इस प्रक्रिया का उद्देश्य लंबे समय से स्थान बदल चुके, मृत या दोहरे नाम वाले मतदाताओं की पहचान करना है।
कर्नाटक में आने वाले चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची का यह संशोधन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक दल भी इस प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि मतदाता सूची में बदलाव का सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
फिलहाल 1.08 करोड़ मतदाताओं के नाम ASDDO श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। अब अगले चरण में दस्तावेजों की जांच और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी।





