कर्नाटक

सूखा राहत पर परमेश्वर का बड़ा बयान

Kavita2
2 Sept 2026 10:50 AM IST
सूखा राहत पर परमेश्वर का बड़ा बयान
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मैसूर। कर्नाटक में सूखे की स्थिति के बीच उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने स्पष्ट किया है कि किसी क्षेत्र को राज्य सरकार के नियमों के तहत सूखा प्रभावित घोषित कर देना ही केंद्रीय राहत राशि पाने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि सूखा घोषित करने और राहत राशि जारी करने की प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों और मानदंडों के अनुसार पूरी करनी होगी। राज्य सरकार अब सूखे से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अगले दो सप्ताह के भीतर केंद्र को अपील भेजने की तैयारी कर रही है।

मंगलवार को हुंसूर तालुक के कट्टेमालालावाडी गांव में सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार के नियमों के अनुसार अब तक 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। हालांकि इन सभी क्षेत्रों को राहत राशि मिलने के लिए आगे निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होगा।

उन्होंने बताया कि एक सप्ताह बाद राज्य में सूखे की स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी। इस दौरान बारिश, फसलों की स्थिति और अन्य निर्धारित मानदंडों के आधार पर आकलन किया जाएगा। यदि कुछ और इलाके सूखा घोषित किए जाने के मानकों को पूरा करते हैं तो उन्हें भी सूची में शामिल किया जाएगा।

101 तालुक सूखा प्रभावित घोषित

परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने स्तर पर निर्धारित नियमों के आधार पर 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। इन इलाकों में बारिश की स्थिति और कृषि क्षेत्र पर पड़े प्रभाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

राज्य सरकार अब प्रभावित क्षेत्रों में जमीनी स्थिति का लगातार आकलन कर रही है। अधिकारियों को भी स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक आंकड़े जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

सूखे का सबसे अधिक प्रभाव किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। बारिश की कमी के कारण फसल उत्पादन प्रभावित होने के साथ पेयजल और पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। ऐसे में सरकार के लिए प्रभावित क्षेत्रों की सही पहचान करना महत्वपूर्ण है।

एक सप्ताह बाद फिर होगी समीक्षा

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान सूची अंतिम नहीं है। एक सप्ताह बाद राज्य सरकार सूखे की स्थिति की फिर समीक्षा करेगी।

यदि इस दौरान अन्य तालुक या इलाके निर्धारित मानदंडों के तहत सूखे की श्रेणी में आते हैं तो उन्हें भी सूखा प्रभावित घोषित किया जा सकता है। इससे राज्य में प्रभावित क्षेत्रों की संख्या बढ़ सकती है।

सरकार का प्रयास है कि वास्तविक स्थिति और निर्धारित मानकों के आधार पर ही क्षेत्रों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए। इसके लिए विभिन्न विभागों से प्राप्त आंकड़ों और जमीनी रिपोर्ट का इस्तेमाल किया जाएगा।

केंद्र के दिशानिर्देशों के अनुसार मिलेगी राहत

परमेश्वर ने साफ किया कि राज्य द्वारा किसी तालुक को सूखा प्रभावित घोषित करने और केंद्र से राहत राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया अलग-अलग है। केंद्रीय सहायता के लिए केंद्र सरकार की गाइडलाइंस और निर्धारित मानकों का पालन करना जरूरी है।

इसका अर्थ है कि केवल राज्य की घोषणा के आधार पर किसी इलाके को स्वतः केंद्रीय राहत राशि नहीं मिल जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार को नुकसान का विस्तृत आकलन कर केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांग रखनी होगी।

इसके बाद केंद्र की ओर से भी स्थिति की जांच की जाएगी। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही राहत कोष जारी करने पर निर्णय लिया जाएगा।

दो सप्ताह में केंद्र को भेजी जाएगी अपील

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अगले दो सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को सूखे से संबंधित विस्तृत अपील सौंपेगी। इसमें प्रभावित क्षेत्रों, फसलों को हुए नुकसान और सूखे की स्थिति से संबंधित आवश्यक विवरण शामिल किए जाएंगे।

राज्य सरकार द्वारा भेजी जाने वाली रिपोर्ट केंद्रीय सहायता की मांग का आधार बनेगी। इसलिए विभिन्न जिलों और तालुकों से सूखे से जुड़े आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।

रिपोर्ट तैयार करते समय यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि नुकसान का आकलन सटीक तरीके से किया जाए ताकि केंद्र सरकार के सामने कर्नाटक की स्थिति को प्रभावी रूप से रखा जा सके।

केंद्रीय टीमें करेंगी दौरा

राज्य सरकार की अपील मिलने के बाद केंद्र सरकार की टीमें कर्नाटक का दौरा करेंगी। ये टीमें सूखा प्रभावित इलाकों में जाकर जमीनी स्थिति का आकलन करेंगी।

केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट राहत राशि तय करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। टीम के सदस्य फसल नुकसान और अन्य प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर सकते हैं तथा राज्य सरकार के अधिकारियों से उपलब्ध आंकड़ों की जानकारी ले सकते हैं।

केंद्र की टीम द्वारा निरीक्षण और मूल्यांकन पूरा होने के बाद आगे राहत कोष जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

किसानों के लिए राहत का इंतजार

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों के लिए राहत राशि महत्वपूर्ण है। बारिश की कमी के कारण फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में सरकारी सहायता उनके लिए कुछ राहत प्रदान कर सकती है।

हालांकि परमेश्वर के बयान से स्पष्ट है कि राहत राशि जारी होने में कुछ समय लग सकता है क्योंकि इसके लिए राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

राज्य को पहले नुकसान का आकलन कर केंद्र को रिपोर्ट भेजनी होगी। इसके बाद केंद्रीय टीम का निरीक्षण होगा और फिर सहायता राशि पर निर्णय लिया जाएगा।

जमीनी हालात देखने पहुंचे परमेश्वर

परमेश्वर ने मंगलवार को हुंसूर तालुक के कट्टेमालालावाडी गांव का दौरा कर सूखे की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की परिस्थितियों को देखा और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी ली।

सरकार के वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों के इस तरह के दौरे से वास्तविक स्थिति को समझने और राहत संबंधी जरूरतों का आकलन करने में मदद मिलती है।

राज्य सरकार की प्राथमिकता यह पता लगाना है कि किन क्षेत्रों में सूखे का प्रभाव सबसे अधिक है और वहां तत्काल किस तरह के कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

पेयजल और पशुओं की जरूरत भी अहम

सूखे का असर केवल फसलों तक सीमित नहीं रहता। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता और पशुओं के लिए पानी तथा चारे की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती बन सकती है।

यदि बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो जलाशयों, तालाबों और भूजल स्तर पर भी दबाव बढ़ सकता है। इसलिए सूखा प्रबंधन के दौरान कृषि के साथ पेयजल और पशुपालन की जरूरतों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

राज्य सरकार को राहत व्यवस्था तैयार करते समय इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना होगा।

केंद्र और राज्य के बीच समन्वय जरूरी

सूखा राहत प्रक्रिया में राज्य और केंद्र सरकार के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार जमीनी स्तर से नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करती है जबकि केंद्रीय सहायता निर्धारित प्रक्रिया और निरीक्षण के बाद जारी होती है।

परमेश्वर ने स्पष्ट किया है कि कर्नाटक सरकार केंद्र के निर्धारित मानदंडों के अनुसार आगे बढ़ेगी। अगले दो सप्ताह के भीतर विस्तृत अपील केंद्र को भेजने की तैयारी है।

फिलहाल राज्य के 101 तालुक सूखा प्रभावित घोषित किए जा चुके हैं और एक सप्ताह बाद फिर स्थिति की समीक्षा होगी। यदि अन्य क्षेत्र भी मानदंडों पर खरे उतरते हैं तो उन्हें सूची में जोड़ा जाएगा। इसके बाद केंद्र को रिपोर्ट भेजी जाएगी और केंद्रीय टीमों के निरीक्षण के बाद राहत राशि जारी करने पर फैसला होगा।

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