कर्नाटक

ड्रोन प्रताप को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, सोडियम मेटल धमाका मामले की FIR रद्द

Kavita2
29 Sept 2026 3:31 PM IST
ड्रोन प्रताप को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, सोडियम मेटल धमाका मामले की FIR रद्द
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बेंगलुरु। कर्नाटक के तुमकुर जिले के मधुगिरी तालुक स्थित जनकलोटी गांव में खेती के लिए बने कुएं में सोडियम मेटल के प्रयोग के दौरान हुए धमाके के मामले में ‘बिग बॉस कन्नड़’ के पूर्व कंटेस्टेंट ड्रोन प्रताप को बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की एफआईआर रद्द कर दी है। अदालत ने सुनवाई के दौरान माना कि संबंधित प्रयोग का उद्देश्य शैक्षिक था और इसमें किसी तरह की दुर्भावना नहीं पाई गई।

मामला जनकलोटी गांव में खेती के लिए बने जलस्रोत में किए गए एक प्रयोग से जुड़ा था। आरोप था कि सोडियम मेटल के इस्तेमाल के दौरान तेज धमाका हुआ, जिसके बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ड्रोन प्रताप के खिलाफ पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज किया गया।

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ड्रोन प्रताप को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई और वह रिहा हो गए। इसके बाद प्रताप ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

याचिका में प्रताप की ओर से मांग की गई थी कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द किया जाए। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने मामले से जुड़े तथ्यों, प्रयोग की प्रकृति और उपलब्ध सामग्री पर विचार किया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित प्रयोग का उद्देश्य शैक्षिक था। कोर्ट ने यह भी पाया कि मामले में किसी तरह की दुर्भावना या नुकसान पहुंचाने की नीयत स्पष्ट नहीं होती। इसी आधार पर प्रताप के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया गया।

हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद ड्रोन प्रताप को बड़ी कानूनी राहत मिली है। एफआईआर रद्द होने से इस मामले में उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई का आधार समाप्त हो गया है।

यह मामला सामने आने के बाद काफी चर्चा में रहा था, क्योंकि ड्रोन प्रताप पहले से ही सोशल मीडिया और टेलीविजन जगत में चर्चित चेहरा रहे हैं। ‘बिग बॉस कन्नड़’ में हिस्सा लेने के बाद उनकी लोकप्रियता और बढ़ी थी।

जनकलोटी गांव में किए गए प्रयोग के दौरान सोडियम मेटल के पानी के संपर्क में आने से विस्फोट जैसी स्थिति बनी थी। इस घटना के बाद सुरक्षा और प्रयोग के तरीके को लेकर सवाल उठे थे और मामला पुलिस तक पहुंचा था।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रताप के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद जांच प्रक्रिया शुरू हुई और उनकी गिरफ्तारी भी की गई। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

जमानत पर बाहर आने के बाद प्रताप ने कानूनी लड़ाई जारी रखी और हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मामले को निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि प्रयोग किसी गलत उद्देश्य से नहीं किया गया था।

हाई कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि प्रयोग का मकसद क्या था। अदालत ने पाया कि घटना के पीछे किसी को नुकसान पहुंचाने या कोई आपराधिक लाभ लेने की मंशा सामने नहीं आती।

कोर्ट ने इस आधार पर कहा कि आपराधिक मामला जारी रखना उचित नहीं होगा। इसके बाद एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया गया।

इस आदेश को प्रताप के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है, क्योंकि उनके खिलाफ दर्ज मामला अब आगे आपराधिक प्रक्रिया में नहीं बढ़ेगा।

घटना से जुड़े वीडियो और जानकारी भी पहले काफी वायरल हुई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की थी।

हाई कोर्ट के फैसले में शैक्षिक उद्देश्य को महत्वपूर्ण आधार माना गया। अदालत ने कहा कि केवल प्रयोग के दौरान धमाका हो जाने से ही दुर्भावनापूर्ण मंशा का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, जब तक कि ऐसा साबित करने वाली सामग्री मौजूद न हो।

मामले में यह भी देखा गया कि प्रयोग के पीछे कोई आपराधिक उद्देश्य था या नहीं। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अदालत को ऐसी कोई स्पष्ट मंशा नहीं मिली।

ड्रोन प्रताप की ओर से दायर याचिका में भी इसी पहलू पर जोर दिया गया था कि प्रयोग प्रदर्शन और शैक्षिक उद्देश्य से किया गया था, न कि किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब प्रताप के खिलाफ इस विशेष मामले में दर्ज एफआईआर प्रभावी नहीं रहेगी। इससे उनके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है।

यह मामला वैज्ञानिक प्रयोगों और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन की जरूरत को भी सामने लाता है। किसी भी रासायनिक या धातु आधारित प्रयोग के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी होता है।

हालांकि अदालत ने इस मामले में प्रताप की मंशा को शैक्षिक माना और दुर्भावना का अभाव पाया, फिर भी घटना ने ऐसे प्रयोगों के दौरान सावधानी की आवश्यकता पर ध्यान खींचा।

ड्रोन प्रताप तकनीक और प्रयोगों से जुड़े वीडियो तथा गतिविधियों को लेकर पहले भी चर्चा में रहे हैं। इसी पहचान के कारण यह मामला सामने आने के बाद तेजी से सुर्खियों में आया था।

उनकी गिरफ्तारी के बाद समर्थकों और आलोचकों दोनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। बाद में जमानत मिलने से उन्हें राहत मिली, लेकिन मामला तब तक जारी रहा जब तक हाई कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने का आदेश नहीं दिया।

अब अदालत के फैसले के बाद इस मामले में उनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है। कोर्ट ने यह मानते हुए एफआईआर रद्द कर दी कि प्रयोग का उद्देश्य शैक्षिक था और रिकॉर्ड पर ऐसी कोई सामग्री नहीं मिली जिससे दुर्भावनापूर्ण इरादा साबित हो।

फिलहाल हाई कोर्ट का आदेश ड्रोन प्रताप के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। जनकलोटी गांव में हुए सोडियम मेटल प्रयोग से जुड़े जिस आपराधिक मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, उसी मामले की एफआईआर अब अदालत ने रद्द कर दी है।

इस फैसले के साथ प्रताप के खिलाफ इस प्रकरण में आपराधिक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ेगी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में उद्देश्य और मंशा को प्रमुख आधार मानते हुए राहत दी है।

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