कर्नाटक

कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक बदलाव, CM सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार, मंत्रिपरिषद भंग

Kavita2
29 May 2026 10:14 AM IST
कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक बदलाव, CM सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार, मंत्रिपरिषद भंग
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां राज्यपाल Thawar Chand Gehlot ने मुख्यमंत्री Siddaramaiah का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और उनकी अगुवाई वाली मंत्रिपरिषद को भंग कर दिया गया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है।

राज्यपाल कार्यालय की ओर से 29 मई को जारी की गई कार्यवाही (प्रोसिडिंग्स) में बताया गया है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 28 मई की तारीख वाले एक पत्र के माध्यम से अपने पद से इस्तीफा सौंपा था। इसी पत्र के आधार पर राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मंत्रिपरिषद को भी भंग करने का निर्णय लिया।

इस फैसले के बाद कर्नाटक में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर नई परिस्थितियाँ बन गई हैं। मुख्यमंत्री पद के साथ-साथ पूरी कैबिनेट के भंग होने से अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अगले मुख्यमंत्री के चयन और नई सरकार के गठन को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से क्या रणनीति अपनाई जाएगी।



सूत्रों के अनुसार, यह कदम महीनों से चल रही राजनीतिक चर्चाओं और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर उठाए गए निर्णयों की एक कड़ी माना जा रहा है। कर्नाटक में पहले से ही कैबिनेट फेरबदल और संगठनात्मक संतुलन को लेकर अटकलें जारी थीं, जिनके बीच यह बड़ा फैसला सामने आया है।

राज्य में प्रशासनिक कामकाज पर भी इस निर्णय का प्रभाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि मंत्रिपरिषद के भंग होने के बाद अब राज्य में अंतरिम व्यवस्था के तहत कार्य चलाया जाएगा, जब तक कि नई सरकार का गठन नहीं हो जाता।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम कर्नाटक की सत्ता संरचना में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद अब कांग्रेस नेतृत्व के सामने राज्य में स्थिरता बनाए रखने और नए नेतृत्व को लेकर निर्णय लेने की चुनौती खड़ी हो गई है।

राज्यपाल के आदेश के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस पार्टी अगला कदम क्या उठाती है और क्या किसी नए नेता को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि आने वाले दिनों में विधायकों की बैठकों और पार्टी स्तर पर क्या रणनीति तय की जाती है।

कर्नाटक में यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब राज्य की राजनीति पहले से ही विभिन्न चर्चाओं और संभावित बदलावों के दौर से गुजर रही थी। अब मंत्रिपरिषद के भंग होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक नेतृत्व दोनों में नए फैसलों की आवश्यकता होगी।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार किए जाने और मंत्रिपरिषद के भंग होने से कर्नाटक की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है, जिसका असर आने वाले समय में राज्य के शासन और राजनीतिक दिशा दोनों पर दिखाई दे सकता है।

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