
उत्तर कन्नड़। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के येल्लापुर क्षेत्र में वन विभाग और सिरसी फॉरेस्ट मोबाइल स्क्वाड ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए वन्यजीव शिकार और अवैध तस्करी से जुड़े मामले का खुलासा किया है। इस अभियान में दो शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में वन्यजीवों से जुड़े उत्पाद बरामद किए गए हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें वन्यजीवों के शिकार और अवैध कारोबार से जुड़ी पुख्ता जानकारी मिली थी। सूचना के आधार पर अधिकारियों ने विशेष अभियान चलाया और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों पर नजर रखी। इसके बाद कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को पकड़ लिया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी एक ऐसे गिरोह से जुड़े हो सकते हैं, जो लंबे समय से वन्यजीवों का शिकार कर रहा था। अधिकारियों को आशंका है कि यह गिरोह गोवा और उत्तर कन्नड़ जिले के जंगलों में सक्रिय था और वहां वन्यजीवों का शिकार कर अवैध रूप से उनके उत्पादों की तस्करी करता था।
वन विभाग की टीम ने आरोपियों के पास से कई प्रकार के वन्यजीव उत्पाद जब्त किए हैं। हालांकि अधिकारियों ने बरामद किए गए सभी उत्पादों की विस्तृत जानकारी जांच पूरी होने के बाद साझा करने की बात कही है। फिलहाल जब्त सामग्री की पहचान और उसके स्रोत का पता लगाया जा रहा है।
वन अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी किन-किन क्षेत्रों में सक्रिय थे और इस अवैध नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि शिकार किए गए वन्यजीवों को कहां भेजा जाता था और तस्करी का तरीका क्या था।
वन्यजीवों का शिकार और उनके अंगों की तस्करी वन कानूनों के तहत गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। वन विभाग लगातार जंगलों में निगरानी बढ़ाकर अवैध शिकार और तस्करी रोकने के लिए अभियान चला रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर कन्नड़ जिले के जंगल जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यहां कई दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में शिकारियों की गतिविधियां पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ा खतरा पैदा करती हैं।
सिरसी फॉरेस्ट मोबाइल स्क्वाड और स्थानीय वन अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी ऐसी गतिविधियों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस नेटवर्क के तार दूसरे राज्यों तक जुड़े हुए हैं।
वन विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें जंगलों में किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो तुरंत इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दें। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
इस कार्रवाई के बाद वन विभाग ने जंगल क्षेत्रों में निगरानी और गश्त बढ़ाने की तैयारी की है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि अवैध शिकार करने वाले गिरोहों पर लगाम लगाई जाए और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
फिलहाल दो शिकारियों की गिरफ्तारी के बाद जांच जारी है। वन विभाग बरामद वन्यजीव उत्पादों की जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आरोपी कितने समय से इस अवैध गतिविधि में शामिल थे। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।





