कर्नाटक

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा आदेश, अब संविदा और आउटसोर्स कर्मियों की भी ऐप से लगेगी हाजिरी

Kavita2
19 Oct 2026 10:47 AM IST
सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा आदेश, अब संविदा और आउटसोर्स कर्मियों की भी ऐप से लगेगी हाजिरी
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने सरकारी विभागों में काम करने वाले संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों, कार्यालयों, बोर्डों, निगमों, प्राधिकरणों और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में कार्यरत संविदा तथा आउटसोर्स कर्मचारियों को भी 'कर्तव्य' मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इस संबंध में राज्य सरकार ने आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाना, कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करना और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाना है।

अब तक कर्तव्य ऐप का इस्तेमाल मुख्य रूप से नियमित सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए किया जाता था। लेकिन राज्य सरकार ने अब इस व्यवस्था को संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों तक विस्तारित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

1 दिसंबर से ऐप के माध्यम से लगेगी हाजिरी

सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, आगामी 1 दिसंबर 2026 से संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कर्तव्य ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद संबंधित कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए पारंपरिक मैनुअल रजिस्टर पर निर्भरता समाप्त की जाएगी। कर्मचारियों को कार्यालय पहुंचने और ड्यूटी समाप्त होने के दौरान मोबाइल ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज करनी होगी।

सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से कर्मचारियों के कार्यालय आने और जाने का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित तरीके से रखा जा सकेगा।

25 नवंबर तक कर्मचारियों का पंजीकरण अनिवार्य

राज्य सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों और कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिया है कि उनके अधीन कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों का पंजीकरण 25 नवंबर 2026 तक कर्तव्य ऐप पर पूरा कर लिया जाए।

इसके लिए कर्मचारियों की आवश्यक जानकारी डिजिटल प्रणाली में दर्ज की जाएगी। इसमें कर्मचारी का नाम, मोबाइल नंबर, आधार संबंधी विवरण और पद की जानकारी जैसे विवरण शामिल हो सकते हैं।

विभागाध्यक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पात्र कर्मचारियों का पंजीकरण पूरा हो जाए, ताकि दिसंबर से उपस्थिति दर्ज करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

सरकारी विभागों के साथ बोर्ड और निगम भी शामिल

यह आदेश केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके दायरे में सरकारी बोर्ड, निगम, प्राधिकरण, स्वायत्त संस्थाएं और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान भी आएंगे।

इन संस्थाओं में बड़ी संख्या में संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हैं।

कार्यालयों में डेटा एंट्री ऑपरेटर, वाहन चालक, सफाई कर्मचारी, सुरक्षा कर्मचारी, तकनीकी सहायक और अन्य श्रेणियों के कर्मचारी संविदा या आउटसोर्स व्यवस्था के अंतर्गत कार्यरत हैं।

नई व्यवस्था के लागू होने से इन कर्मचारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होगा।

चेहरे की पहचान और लोकेशन से दर्ज होगी उपस्थिति

कर्तव्य ऐप में कर्मचारियों की पहचान और कार्यालय में उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

इसमें चेहरे की पहचान और निर्धारित कार्यस्थल की लोकेशन के आधार पर उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था शामिल है।

इस प्रणाली के माध्यम से कर्मचारी के निर्धारित कार्यालय या कार्यक्षेत्र में मौजूद होने की पुष्टि की जा सकेगी।

इसके अलावा कार्यालय पहुंचने और ड्यूटी समाप्त होने का समय भी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होगा।

सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे एक कर्मचारी के स्थान पर दूसरा व्यक्ति उपस्थिति दर्ज न करा सके और वास्तविक कार्य दिवसों की जानकारी उपलब्ध रहे।

1 जनवरी से वेतन भुगतान से जुड़ेगा हाजिरी रिकॉर्ड

नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू कर्मचारियों के वेतन और आउटसोर्स एजेंसियों के बिलों से संबंधित है।

रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से संविदा कर्मचारियों के वेतन भुगतान और आउटसोर्स एजेंसियों के मासिक बिलों को कर्तव्य ऐप में दर्ज उपस्थिति से जोड़ा जाएगा।

इसका मतलब यह है कि संबंधित कर्मचारियों की डिजिटल उपस्थिति रिपोर्ट के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

इससे कर्मचारियों के वास्तविक कार्य दिवसों का रिकॉर्ड उपलब्ध होगा और भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।

फर्जी उपस्थिति और अनियमितताओं पर लगेगी रोक

सरकार के इस निर्णय के पीछे एक प्रमुख उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों की उपस्थिति से संबंधित अनियमितताओं को रोकना भी है।

कई सरकारी कार्यालयों में आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारी नियुक्त किए जाते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और उनकी उपस्थिति का सही रिकॉर्ड रखना आवश्यक होता है।

डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू होने से यह पता लगाना आसान होगा कि किसी कार्यालय में कितने कर्मचारी उपस्थित रहे और उन्होंने कितने दिनों तक काम किया।

इससे फर्जी उपस्थिति दर्ज करने और वास्तविक कर्मचारियों की संख्या से अधिक बिल प्रस्तुत करने जैसी अनियमितताओं को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कार्यालय प्रमुखों की जवाबदेही भी होगी तय

सरकार ने संबंधित विभागाध्यक्षों और कार्यालय प्रमुखों को नई प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधीन कार्यरत सभी संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी निर्धारित समय सीमा के भीतर ऐप पर पंजीकृत हो जाएं।

इसके अलावा उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया की निगरानी भी संबंधित अधिकारियों को करनी होगी।

नई व्यवस्था के पालन में लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी चुनौतियां भी संभव

डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के दौरान कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।

विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन की उपलब्धता से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

इसके अलावा तकनीकी जानकारी की कमी के कारण कुछ कर्मचारियों को ऐप का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षण की जरूरत हो सकती है।

ऐसी परिस्थितियों में संबंधित विभागों को कर्मचारियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल

कर्नाटक सरकार का यह निर्णय सरकारी कार्यालयों में डिजिटल प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नई प्रणाली से संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की उपस्थिति का एक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।

इसके माध्यम से कर्मचारियों के कार्य दिवसों, कार्यालय में मौजूदगी और भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं की निगरानी बेहतर ढंग से की जा सकेगी।

फिलहाल सरकार ने सभी संबंधित विभागों को 25 नवंबर तक पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद 1 दिसंबर से नई उपस्थिति व्यवस्था लागू होगी और 1 जनवरी 2027 से भुगतान प्रक्रिया को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने की योजना है।

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