कर्नाटक

किसानों के प्रदर्शन से पहले प्रशासन का बड़ा फैसला, पुणे-बेंगलुरु समेत 4 हाईवे पर पाबंदी

Kavita2
31 Oct 2026 1:39 PM IST
किसानों के प्रदर्शन से पहले प्रशासन का बड़ा फैसला, पुणे-बेंगलुरु समेत 4 हाईवे पर पाबंदी
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बेंगलुरु। कर्नाटक में गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। गन्ना किसान अपनी उपज के लिए 5,500 रुपये प्रति टन की कीमत निर्धारित करने की मांग कर रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन और राष्ट्रीय राजमार्गों पर चक्काजाम की आशंका को देखते हुए धारवाड़ जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। जिला मजिस्ट्रेट एवं उपायुक्त स्नेहल आर ने जिले के चार प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)-2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। इसके साथ ही संबंधित राजमार्गों के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में भी प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। प्रशासन का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य यातायात व्यवस्था बनाए रखना, राजमार्गों को जाम होने से बचाना और कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित रखना है।

जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब राज्य में गन्ना किसानों का आंदोलन लगातार व्यापक होता जा रहा है और किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध तेज करने की चेतावनी दी है।

इन चार राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू हुई निषेधाज्ञा

धारवाड़ जिला प्रशासन ने जिन चार राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रतिबंध लागू किए हैं, उनमें पुणे-बेंगलुरु, हुबली-अंकोला, नवलगुंड-सोलापुर और हुबली-बेल्लारी राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं।

इन राजमार्गों के आसपास पांच किलोमीटर तक के क्षेत्र को भी प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है। ये मार्ग कर्नाटक के महत्वपूर्ण परिवहन नेटवर्क का हिस्सा हैं और इनके जरिए बड़ी संख्या में यात्री तथा मालवाहक वाहन आवाजाही करते हैं।

प्रशासन को आशंका थी कि किसान संगठन अपनी मांगों के समर्थन में इन प्रमुख मार्गों पर प्रदर्शन और चक्काजाम कर सकते हैं। ऐसा होने पर दूसरे राज्यों को जोड़ने वाले मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। आवश्यक सेवाओं, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही में भी बाधा आने की आशंका जताई गई थी।

इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए निषेधाज्ञा जारी की है।

पुलिस और NHAI की रिपोर्ट के बाद लिया फैसला

धारवाड़ की जिला मजिस्ट्रेट स्नेहल आर ने यह आदेश जिला पुलिस अधीक्षक और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अध्यक्ष से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर जारी किया है।

रिपोर्ट में किसान आंदोलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों पर संभावित अवरोध और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। प्रशासन ने इसे सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से गंभीर माना।

जारी आदेश के मुताबिक, प्रतिबंध तत्काल लागू कर दिए गए हैं। अगले आदेश तक संबंधित क्षेत्रों में निषेधाज्ञा प्रभावी रहेगी। इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी ऐसी गतिविधि को रोकना है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की आवाजाही बाधित हो।

5,500 रुपये प्रति टन की कीमत मांग रहे किसान

दरअसल, कर्नाटक में गन्ना उत्पादक किसान लंबे समय से अपनी उपज का बेहतर मूल्य निर्धारित करने की मांग कर रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर खेती की लागत, मजदूरी, खाद, बीज, सिंचाई और परिवहन का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।

किसानों की प्रमुख मांग गन्ने की कीमत 5,500 रुपये प्रति टन तय करने की है। इसके अलावा चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP), एथेनॉल उत्पादन और खरीद नीति में बदलाव तथा किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य दिलाने जैसे मुद्दे भी आंदोलन का हिस्सा हैं।

किसानों का तर्क है कि जब चीनी और अन्य उत्पादों की कीमतों में बदलाव होता है, तो उसका उचित लाभ गन्ना उत्पादकों को भी मिलना चाहिए। वे चाहते हैं कि सरकार चीनी मिलों को किसानों को बेहतर भुगतान करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाए।

बेलगावी में भी प्रदर्शन तेज, राज्यव्यापी बंद की चेतावनी

गन्ना किसानों का आंदोलन केवल धारवाड़ तक सीमित नहीं है। बेलगावी सहित उत्तर कर्नाटक के कई इलाकों में भी किसान संगठनों ने विरोध तेज किया है। बेलगावी सेंट्रल बस स्टेशन के पास किसानों का प्रदर्शन शुरू होने की खबर है। स्थिति को देखते हुए पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई है।

किसान संगठनों की ओर से राज्यव्यापी बंद का आह्वान किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इससे प्रशासन को आशंका है कि आने वाले दिनों में सार्वजनिक परिवहन और सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है।

इससे पहले अक्टूबर में किसानों ने पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई प्रमुख मार्गों पर प्रदर्शन और चक्काजाम किया था। उस दौरान वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई थी और प्रशासन को यातायात के लिए वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था करनी पड़ी थी।

राज्य सरकार ने किसानों से की धैर्य रखने की अपील

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने किसानों से आंदोलन के मुद्दे पर सहयोग और धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों के साथ खड़ी है और गन्ने की कीमत से जुड़े विवाद का समाधान निकालने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

शिवकुमार के मुताबिक, चीनी की बिक्री कीमत में लंबे समय से अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में चीनी मिलों के लिए किसानों को अधिक भुगतान करना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर केंद्र सरकार से भी बातचीत की जाएगी।

गन्ना किसानों की मांगों की समीक्षा के लिए केंद्र सरकार ने पूर्व नीति आयोग सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति भी गठित की है। इस समिति को किसानों की मांगों और चीनी उद्योग से जुड़े आर्थिक पहलुओं का अध्ययन करना है।

किसानों की मांग और यातायात व्यवस्था के बीच संतुलन की चुनौती

धारवाड़ में चार राष्ट्रीय राजमार्गों पर निषेधाज्ञा लागू होने के बाद अब प्रशासन के सामने किसानों के आंदोलन और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।

एक तरफ किसान अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय राजमार्गों पर जाम लगने से आम यात्रियों, व्यापारियों और परिवहन सेवाओं को परेशानी हो सकती है।

फिलहाल जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। अब देखना होगा कि सरकार किसानों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और आंदोलन को समाप्त कराने के लिए आगे कौन से कदम उठाए जाते हैं। गन्ने की कीमत को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब कर्नाटक की राजनीति और प्रशासन के लिए भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

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