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कर्नाटक कैबिनेट का बड़ा फैसला, 32,611 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी

Kavita2
19 Sept 2026 10:44 AM IST
कर्नाटक कैबिनेट का बड़ा फैसला, 32,611 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी
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मंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने राज्य में ग्रामीण बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण को मजबूत करने के लिए 32,611 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी है। शुक्रवार को मंगलुरु में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इनमें राज्यभर में 15 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का विकास और वन विभाग के ग्रुप-C तथा ग्रुप-D पदों में 13 अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का निर्णय प्रमुख है।

कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर करने के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना’ के तहत 10 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। इस राशि से राज्यभर में करीब 15 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों को विकसित करने की योजना है।

सरकार का उद्देश्य गांवों को बेहतर और टिकाऊ सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराना है। ग्रामीण इलाकों में अच्छी सड़कें उपलब्ध होने से स्थानीय लोगों के आवागमन के साथ कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने, विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों तक आने-जाने और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा गांवों में सीमेंट-कंक्रीट यानी CC सड़कें और ड्रेनेज सिस्टम तैयार करने के लिए छह हजार करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस तरह केवल ग्रामीण सड़क और उससे संबंधित बुनियादी ढांचे की इन दो प्रमुख योजनाओं के लिए कुल 16 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

ग्रामीण इलाकों में बारिश के दौरान जलभराव और सड़कों को होने वाले नुकसान जैसी समस्याओं को देखते हुए सड़क निर्माण के साथ ड्रेनेज सिस्टम पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि केवल सड़क बनाने के बजाय उसके साथ पानी निकासी की बेहतर व्यवस्था होने से बुनियादी ढांचा अधिक टिकाऊ हो सकता है।

कैबिनेट की बैठक का एक और महत्वपूर्ण फैसला वन विभाग की नौकरियों में अनुसूचित जनजाति समुदायों को प्रतिनिधित्व देने से जुड़ा है। मंत्रिमंडल ने वन विभाग के ग्रुप-C और ग्रुप-D पदों पर 13 वनवासी अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दी है।

इन समुदायों में सोलिगा, हलासा, जेनू कुरुबा, गौडालू, सिद्दी, कुडिया, मलेकुडिया, काडु कुरुबा, इरुलिगा, कोरागा, बेट्टा कुरुबा, येरावा और पनियन जैसे समुदाय शामिल हैं। इन 13 वनवासी अनुसूचित जनजातियों को सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व देने की दिशा में पहले भी राज्य सरकार ने विशेष भर्ती की बात कही थी। कर्नाटक के 2025-26 के बजट में भी इन समुदायों के लिए राज्य सिविल सेवाओं में विशेष सीधी भर्ती की कार्रवाई का उल्लेख किया गया था।

सरकार के इस फैसले का सीधा संबंध ऐसे समुदायों से है जिनका जीवन लंबे समय से जंगल और उसके आसपास के क्षेत्रों से जुड़ा रहा है। वन क्षेत्रों के स्थानीय भूगोल, वन्यजीव और पारंपरिक परिस्थितियों की जानकारी रखने वाले समुदायों को वन विभाग की नौकरियों में अवसर उपलब्ध कराने को सरकार सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में कदम बता रही है।

हालांकि 30 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित विस्तृत भर्ती नियम, पदों की संख्या और इसे लागू करने की प्रक्रिया संबंधित सरकारी आदेश तथा भर्ती अधिसूचनाओं से और स्पष्ट होगी। इसलिए इसे वन विभाग की सभी नौकरियों में सामान्य 30 प्रतिशत ST आरक्षण के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक फैसला विशेष रूप से चिन्हित 13 अनुसूचित जनजाति समुदायों और ग्रुप-C व ग्रुप-D पदों से संबंधित है।

सरकार की ओर से वन विभाग में भर्ती की प्रक्रिया भी चल रही है। कर्नाटक वन विभाग के आधिकारिक भर्ती पोर्टल पर वर्तमान में फॉरेस्ट वॉचर पदों की भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया दिखाई गई है, जिसकी अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। हालांकि कैबिनेट के नए 30 प्रतिशत आरक्षण फैसले का मौजूदा भर्ती प्रक्रिया पर क्या प्रभाव होगा, इसके लिए संबंधित आधिकारिक आदेश या संशोधित भर्ती अधिसूचना देखना जरूरी होगा।

मंगलुरु की कैबिनेट बैठक में ग्रामीण विकास के अलावा तटीय कर्नाटक के विकास पर भी व्यापक चर्चा हुई। सरकार ने पर्यटन, मत्स्य पालन, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा, बंदरगाह, सड़क संपर्क और शहरी सुविधाओं से संबंधित कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। कुल मिलाकर बैठक में मंजूर परियोजनाओं और प्रस्तावों की राशि 32,611 करोड़ रुपये बताई गई है।

तटीय कर्नाटक को पर्यटन और ब्लू इकोनॉमी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके तहत पर्यटन नीति, समुद्री परिवहन, द्वीप पर्यटन और मत्स्य शिक्षा से संबंधित प्रस्तावों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने क्षेत्रीय संतुलन पर भी जोर दिया है। सरकार का कहना है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह कैबिनेट बैठकें आयोजित करने की योजना है, ताकि क्षेत्र विशेष की जरूरतों और विकास परियोजनाओं पर सीधे निर्णय लिए जा सकें।

32,611 करोड़ रुपये की मंजूरियों में ग्रामीण क्षेत्रों को बड़ा हिस्सा मिलना सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है। अकेले 15 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़क नेटवर्क के लिए 10 हजार करोड़ और गांवों में CC रोड तथा ड्रेनेज के लिए छह हजार करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इन परियोजनाओं के जमीन पर उतरने के बाद राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन और नागरिक सुविधाओं में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।

दूसरी ओर वन विभाग में 13 अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का फैसला सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अब इस फैसले के क्रियान्वयन के लिए सरकार की विस्तृत अधिसूचना और भर्ती नियमों पर नजर रहेगी।

मंगलुरु में हुई कैबिनेट बैठक के जरिए सरकार ने एक साथ ग्रामीण बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण से लेकर तटीय विकास तक कई क्षेत्रों में बड़े निवेश की रूपरेखा पेश की है। इनमें से कई योजनाओं के लिए आगे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, प्रशासनिक प्रक्रिया, निविदा और चरणबद्ध क्रियान्वयन की आवश्यकता होगी। इसलिए अलग-अलग परियोजनाओं के पूरा होने की वास्तविक समयसीमा आगे संबंधित विभागों की कार्रवाई के साथ स्पष्ट होगी।

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