कर्नाटक

बिल्डरों पर CBI का बड़ा एक्शन तीन शहरों में 12 ठिकानों पर छापे

nidhi
11 Sept 2026 7:54 AM IST
बिल्डरों पर CBI का बड़ा एक्शन तीन शहरों में 12 ठिकानों पर छापे
x
बिल्डरों के 12 ठिकानों पर CBI की रेड मचा हड़कंप
नई दिल्ली: रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बेंगलुरु, मुंबई और पुणे में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने बिल्डरों और उनसे जुड़े लोगों के परिसरों समेत कुल 12 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के बाद रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों में हलचल बढ़ गई है। सीबीआई की टीमों ने तीनों बड़े शहरों में अलग-अलग ठिकानों पर पहुंचकर तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान संबंधित कंपनियों के कार्यालयों और अन्य परिसरों में दस्तावेजों तथा डिजिटल रिकॉर्ड की जांच किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी मामले में वित्तीय लेनदेन और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।
दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल
छापेमारी के दौरान सीबीआई का विशेष ध्यान उन दस्तावेजों पर रहा, जिनसे संबंधित परियोजनाओं और वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिल सकती है। कंप्यूटर, डिजिटल डेटा, बैंकिंग रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी से संबंधित कागजात और अन्य दस्तावेज जांच के दायरे में आ सकते हैं। जांच एजेंसी तलाशी के दौरान मिली सामग्री का विश्लेषण करने के बाद आगे की कार्रवाई तय कर सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित कंपनियों के अधिकारियों और अन्य लोगों से पूछताछ भी की जा सकती है।
रियल एस्टेट सेक्टर पर बढ़ी निगरानी
देश के बड़े शहरों में रियल एस्टेट कारोबार का दायरा काफी बड़ा है। बेंगलुरु, मुंबई और पुणे देश के प्रमुख प्रॉपर्टी बाजारों में शामिल हैं। यहां आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश होता है। ऐसे में इन शहरों में एक साथ हुई सीबीआई की कार्रवाई ने रियल एस्टेट क्षेत्र का ध्यान खींचा है। हाल के वर्षों में घर खरीदारों की शिकायतों, अधूरी परियोजनाओं और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों को लेकर बिल्डरों पर विभिन्न जांच एवं नियामक एजेंसियों की निगरानी बढ़ी है। सुप्रीम कोर्ट भी घर खरीदारों से जुड़े मामलों में कई बार सख्त टिप्पणियां और निर्देश दे चुका है।
घर खरीदारों के हित भी अहम
रियल एस्टेट परियोजनाओं में अपनी जीवनभर की बचत लगाने वाले घर खरीदारों के लिए समय पर मकान मिलना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। परियोजनाओं के बीच में रुकने या वित्तीय गड़बड़ी सामने आने पर हजारों खरीदार प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे मामलों की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि परियोजनाओं के लिए जुटाए गए धन का इस्तेमाल तय उद्देश्य के लिए किया गया या नहीं। इसके अलावा वित्तीय संस्थानों और संबंधित कंपनियों के बीच हुए लेनदेन की भी जांच हो सकती है। फिलहाल 12 स्थानों पर की गई तलाशी से हासिल दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच जारी रहने की उम्मीद है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जाती है। जांच पूरी होने तक संबंधित पक्षों के खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
Next Story