
Karnataka कर्नाटक: राज्य में नकली ताड़ी के निर्माण और बिक्री के खिलाफ एक्साइज विभाग ने पिछले तीन वर्षों में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग के अनुसार, इस अवधि में पूरे राज्य से करीब 1,500 किलोग्राम क्लोरल हाइड्रेट (CH) पाउडर जब्त किया गया है, जो नकली ताड़ी बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक खतरनाक रसायन माना जाता है।
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, इस अवैध कारोबार का सबसे ज्यादा प्रभाव कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में देखने को मिला है। यहां के सात जिलों में नकली ताड़ी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और उत्पादन दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस अवैध शराब का सेवन करने से सीधे तौर पर इंसानों के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) पर गंभीर असर पड़ता है।
पिछले तीन वर्षों में नकली ताड़ी बनाने और उसके सेवन से जुड़े मामलों में कुल 771 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन मामलों में कई लोग निर्माण, वितरण और बिक्री में शामिल पाए गए हैं।
एक्साइज विभाग के अनुसार, इस अवैध ताड़ी का सबसे अधिक उपयोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, खासकर मजदूर समुदाय में देखा गया है। इसका मुख्य कारण इसकी कम कीमत और तुरंत नशा देने वाली प्रवृत्ति बताई जा रही है। यही वजह है कि यह खतरनाक मिश्रण तेजी से फैलता जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि क्लोरल हाइड्रेट को अन्य केमिकल्स के साथ मिलाकर इस नशे को और अधिक प्रभावी बनाया जाता है। हालांकि, बिना वैज्ञानिक तरीके से इन रसायनों का मिश्रण अत्यंत खतरनाक साबित होता है और इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं या यहां तक कि मौत भी हो सकती है।
सरकार और एक्साइज विभाग का कहना है कि इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए अभियान को और तेज किया जाएगा। इसके लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और सप्लाई चेन को तोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अवैध शराब या रासायनिक मिश्रण का सेवन न करें और ऐसे मामलों की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता और सख्त कार्रवाई के माध्यम से ही इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, नकली ताड़ी का यह बढ़ता चलन न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है, जिस पर तत्काल और कठोर कदम उठाने की जरूरत है।





