
होसुर। तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले के होसुर स्थित सिपकॉट (SIPCOT) औद्योगिक क्षेत्र में गुरुवार शाम एक बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। एक निजी फैक्ट्री में निर्माण कार्य के दौरान अचानक सेंट्रिंग और कंक्रीट का ढांचा ढह गया। इसकी चपेट में आने से तीन मजदूरों की दबकर मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। कई घंटे तक चले राहत एवं बचाव अभियान के बाद मलबे से तीनों मजदूरों के शव निकाले गए। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियर और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
कंक्रीट का ढांचा गिरने से हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, दुर्घटना गुरुवार, 5 नवंबर की शाम होसुर के सिपकॉट फेज-1 औद्योगिक क्षेत्र के बेदारापल्ली इलाके में स्थित एक्सेल ऑटो प्रोडक्ट्स कंपनी में हुई। यहां फैक्ट्री के प्रवेश द्वार के लिए एक नए आर्च (मेहराबनुमा ढांचे) और सुरक्षा कक्ष का निर्माण किया जा रहा था। इस काम में करीब 17 मजदूर लगे हुए थे।
बताया जा रहा है कि निर्माणाधीन ढांचे पर कंक्रीट डालने का काम चल रहा था। इसी दौरान कंक्रीट को सहारा देने के लिए लगाई गई सेंट्रिंग और मचान जैसी अस्थायी संरचना अचानक ढह गई। देखते ही देखते भारी कंक्रीट का हिस्सा नीचे काम कर रहे मजदूरों पर गिर पड़ा।
हादसा इतना अचानक हुआ कि वहां काम कर रहे मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई लोग मलबे के नीचे दब गए, जबकि आसपास काम कर रहे अन्य कर्मचारी घबराकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे।
मलबे में दबे तीन मजदूरों की मौत
घटना की जानकारी मिलते ही सिपकॉट पुलिस और अग्निशमन एवं बचाव सेवा विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचावकर्मियों ने मलबे में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए अभियान शुरू किया। भारी कंक्रीट और निर्माण सामग्री को हटाने के लिए अर्थमूवर और अन्य मशीनों की मदद ली गई।
काफी मशक्कत के बाद मलबे से तीन मजदूरों के शव निकाले गए। मृतकों की पहचान कुमारेशन (39), माइकल (26) और श्रीनिवासन (26) के रूप में हुई है। हालांकि, कुछ स्थानीय रिपोर्टों में कुमारेशन की उम्र 35 वर्ष बताई गई है। तीनों मजदूर अलग-अलग क्षेत्रों के रहने वाले थे और फैक्ट्री में निर्माण कार्य कर रहे थे।
इस हादसे में चार अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों की पहचान गणेश (39), राजू (28), रोहित (25) और रघु (35) के रूप में बताई गई है। उन्हें तत्काल होसुर सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार, घायलों की स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।
कलेक्टर और एसपी ने किया घटनास्थल का निरीक्षण
हादसे की सूचना मिलने के बाद कृष्णागिरी के जिला कलेक्टर सी. दिनेश कुमार और पुलिस अधीक्षक जी.एस. अनिता घटनास्थल पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने दुर्घटनास्थल का निरीक्षण किया और बचाव अभियान की जानकारी ली।
जिला कलेक्टर ने अस्पताल पहुंचकर घायल मजदूरों से भी मुलाकात की और उनके उपचार की स्थिति के बारे में चिकित्सकों से जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बचाव कार्य में तेजी लाने और मलबे के नीचे किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की आशंका को पूरी तरह दूर करने के निर्देश दिए।
सुरक्षा के लिहाज से घटनास्थल की बिजली आपूर्ति भी बंद कराई गई, ताकि राहत अभियान के दौरान कोई अतिरिक्त दुर्घटना न हो।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, इंजीनियर हिरासत में
इस हादसे के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला कलेक्टर सी. दिनेश कुमार ने प्रारंभिक निरीक्षण के बाद बताया कि निर्माणाधीन ढांचे में कंक्रीट का भार सहन करने के लिए पर्याप्त सहायक संरचना दिखाई नहीं दे रही थी।
उन्होंने आशंका जताई कि कमजोर निर्माण व्यवस्था और तकनीकी लापरवाही के कारण ढांचा गिरा हो सकता है। उन्होंने होसुर नगर निगम के कार्यकारी अभियंता को निर्माण की तकनीकी जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
प्रारंभिक कार्रवाई के तहत निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियर और कुछ अन्य पर्यवेक्षकों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि निर्माण की डिजाइन, सेंट्रिंग और कंक्रीट डालने की प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
मृतकों के परिवारों को 8-8 लाख रुपये की सहायता
इस दर्दनाक हादसे के बाद तमिलनाडु सरकार ने मृतक मजदूरों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। तमिलनाडु निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड निधि से प्रत्येक मृतक के परिवार को आठ लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।
इस सहायता का उद्देश्य दुर्घटना में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों को तत्काल आर्थिक संबल प्रदान करना है। वहीं, घायल मजदूरों के इलाज की व्यवस्था भी की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
होसुर की यह घटना औद्योगिक और निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। निर्माण कार्य के दौरान सेंट्रिंग, मचान और अन्य अस्थायी ढांचों की मजबूती बेहद महत्वपूर्ण होती है। कंक्रीट डालने से पहले इन संरचनाओं की तकनीकी जांच और उनकी भार सहने की क्षमता सुनिश्चित करना जरूरी होता है।
यदि निर्माण कार्य में तय मानकों की अनदेखी की जाती है, तो इसका खामियाजा सीधे मजदूरों को भुगतना पड़ता है। इस हादसे में भी प्रारंभिक जांच में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल सामने आए हैं।
फिलहाल सिपकॉट पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रशासन ने निर्माण स्थल की तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। अब जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि हादसा सेंट्रिंग की कमजोरी, गलत डिजाइन या निर्माण कार्य में लापरवाही के कारण हुआ था।
तीन मजदूरों की मौत ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब सभी की नजर जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।





