
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में लोकायुक्त अधिकारियों ने गुरुवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी मल्लिकार्जुन बी. से जुड़ी 11 संपत्तियों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति जमा करने के आरोपों की जांच के तहत की गई। अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी के दौरान अब तक 18 करोड़ रुपये से अधिक की कथित तौर पर गैर-कानूनी संपत्ति का पता चला है।
लोकायुक्त की टीम ने बेंगलुरु में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इनमें सुब्रह्मण्य नगर, गुद्दादहल्ली और हेब्बल समेत अन्य स्थान शामिल बताए गए हैं। अधिकारी के कार्यालय और उनसे जुड़े आवासीय परिसरों पर भी तलाशी ली गई।
11 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई
लोकायुक्त अधिकारियों ने मल्लिकार्जुन बी. से संबंधित कुल 11 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान अलग-अलग टीमों ने संबंधित परिसरों में दस्तावेजों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की।
एक साथ इतने ठिकानों पर कार्रवाई किए जाने का उद्देश्य कथित तौर पर अधिकारी की कुल संपत्ति और उनके आय के स्रोतों का मिलान करना था। लोकायुक्त की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि अधिकारी की घोषित आय और उनके नाम या उनसे जुड़े लोगों के नाम पर मौजूद संपत्तियों के बीच कितना अंतर है।
तलाशी के दौरान सामने आई संपत्तियों और दस्तावेजों की जांच अभी जारी है। इसलिए बरामदगी और संपत्ति के कुल मूल्य से जुड़ा अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होने की संभावना है।
18 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का पता
लोकायुक्त अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में 18 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की कथित तौर पर गैर-कानूनी संपत्ति का पता चला है। जांच एजेंसी इस संपत्ति को अधिकारी की वैध आय और ज्ञात स्रोतों से मिलाकर देख रही है।
अधिकारियों के अनुसार, तलाशी के दौरान सामने आई संपत्तियों की मात्रा और स्वरूप ने जांच टीम का ध्यान आकर्षित किया। आरोप है कि मल्लिकार्जुन बी. ने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में काफी अधिक संपत्ति अर्जित की।
हालांकि, किसी भी संपत्ति को अंतिम रूप से आय से अधिक या अवैध घोषित करने से पहले जांच एजेंसी को संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय स्रोतों की विस्तृत जांच करनी होगी।
100 एकड़ कृषि भूमि की जानकारी
जांच के दौरान लोकायुक्त अधिकारियों को अधिकारी के पास करीब 100 एकड़ कृषि भूमि होने की जानकारी भी मिली है। इतनी बड़ी कृषि भूमि के स्वामित्व और उसे हासिल करने के स्रोत की भी जांच की जा रही है।
अधिकारी ने यह जमीन कब और किस माध्यम से खरीदी, इसके लिए भुगतान किस स्रोत से किया गया और जमीन उनके स्वयं के नाम पर है या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर, इन सभी पहलुओं की जांच की जा सकती है।
लोकायुक्त टीम संबंधित भूमि रिकॉर्ड, खरीद-बिक्री के दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। कृषि भूमि की कीमत भी स्थान और मौजूदा बाजार दर के आधार पर जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।
कार्यालय और घरों की भी तलाशी
छापेमारी के दौरान अधिकारी के कार्यालयों के अलावा उनके आवासीय परिसरों को भी खंगाला गया। सुब्रह्मण्य नगर, गुद्दादहल्ली और हेब्बल में स्थित ठिकानों पर टीमों ने दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की।
भूमि अधिग्रहण से जुड़े पद पर होने के कारण अधिकारी के कामकाज से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दायरे में हो सकते हैं। लोकायुक्त यह पता लगाने का प्रयास कर सकता है कि अधिकारी की संपत्ति और उनकी सरकारी सेवा के दौरान प्राप्त आय के बीच कोई असामान्य संबंध तो नहीं है।
दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों की जांच लोकायुक्त अधिकारी कर रहे हैं। संपत्ति के कागजात, बैंक लेनदेन, निवेश, जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर अधिकारी की कुल संपत्ति का आकलन किया जाएगा।
जांच एजेंसी के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सामने आई संपत्तियां किसके नाम पर हैं और उन्हें खरीदने के लिए रकम कहां से आई। यदि किसी संपत्ति या लेनदेन का संबंध किसी तीसरे व्यक्ति से मिलता है तो उसकी भी जांच की जा सकती है।
आगे और जानकारी सामने आने की संभावना
लोकायुक्त की यह कार्रवाई अभी जांच के शुरुआती चरण में है। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य सामग्री का विस्तृत विश्लेषण होने के बाद संपत्तियों का वास्तविक मूल्य और आय से अधिक संपत्ति का आंकड़ा बदल भी सकता है।
जांच एजेंसी अधिकारी की वैध आय, सेवा अवधि के दौरान प्राप्त वेतन और अन्य घोषित स्रोतों का मिलान उनके नाम पर मिली संपत्तियों से करेगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति कितनी है।
फिलहाल 11 ठिकानों पर एक साथ हुई कार्रवाई ने बेंगलुरु के प्रशासनिक और सरकारी हलकों में चर्चा तेज कर दी है। लोकायुक्त की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आय से अधिक संपत्ति के आरोप कितने सही हैं और कथित संपत्तियों का स्रोत क्या है।





