Court की समस्याओं को लेकर भड़के वकील, हाई कोर्ट गेट पर किया प्रदर्शन

बेंगलुरु : देश के कई हिस्सों में इन दिनों विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, पटना और अन्य शहरों के बाद अब कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी सड़कों पर प्रदर्शन हुआ। इस बार आंदोलन की अगुवाई वकीलों ने की, जिन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
बेंगलुरु एडवोकेट्स एसोसिएशन (AAB) के सदस्यों ने बुधवार 23 जुलाई को कर्नाटक हाई कोर्ट के गोल्डन जुबली गेट के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी वकीलों ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस विभु बखरू पर प्रशासनिक उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि अदालतों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं और उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।
वकीलों का कहना है कि बेंगलुरु की अदालतों में प्रशासनिक व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई मामलों का निपटारा नहीं हो पा रहा है। इसके कारण न्यायिक कामकाज प्रभावित हो रहा है और वकीलों के साथ-साथ आम लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान AAB के सदस्यों ने कोर्ट परिसर के अंदर और बाहर धरना दिया। वकीलों ने मांग की कि अदालतों के प्रशासनिक ढांचे को बेहतर बनाया जाए और लंबे समय से लंबित समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इस विरोध प्रदर्शन में बेंगलुरु एडवोकेट्स एसोसिएशन के कई पूर्व पदाधिकारी भी शामिल हुए। इनमें पूर्व अध्यक्ष डीएल जगदीश, एमटी नानैया, एएन गंगाधरैया और एस बसवराज समेत कई वरिष्ठ वकील मौजूद रहे। इसके अलावा बार काउंसिल ऑफ कर्नाटक के सदस्य और अन्य अधिवक्ताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।
वकीलों ने कहा कि अदालतों का सुचारू संचालन केवल न्यायाधीशों और वकीलों के लिए ही नहीं बल्कि आम जनता के लिए भी जरूरी है। यदि प्रशासनिक स्तर पर समस्याएं बनी रहती हैं तो इसका सीधा असर न्याय प्रक्रिया पर पड़ता है।
प्रदर्शनकारियों ने अदालतों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं, प्रशासनिक सुधार और लंबित मामलों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अदालतों के अंदर की व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त करना जरूरी है।
फिलहाल इस विरोध प्रदर्शन के बाद न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। वकीलों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि अदालतों की बेहतर कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए है।
बेंगलुरु में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर न्यायपालिका के अंदर प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सुविधाओं को लेकर बहस तेज कर दी है। अब देखना होगा कि वकीलों की मांगों पर हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।





