कर्नाटक

जमीन विवाद में वकील पर हमला, शेड का दरवाजा तोड़कर बाहर खींचने का आरोप; तीन गिरफ्तार

Kavita2
12 Sept 2026 11:58 AM IST
जमीन विवाद में वकील पर हमला, शेड का दरवाजा तोड़कर बाहर खींचने का आरोप; तीन गिरफ्तार
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बेंगलुरु : हुलिमावु थाना क्षेत्र में जमीन के विवाद को लेकर एक वकील पर सामूहिक हमले का मामला सामने आया है। आरोप है कि अपनी संपत्ति पर बने शेड का मुआयना करने पहुंचे एल. पुट्टा भैरेगौड़ा को लोगों के एक समूह ने घेर लिया। उन्होंने शेड में जाकर बचने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर खींच लिया और मारपीट की। घायल वकील का निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने अस्पताल में उनका बयान दर्ज किया है। घटना में शामिल होने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

प्रारंभिक जानकारी में हमलावरों की संख्या 30 से 40 बताई गई है। हालांकि, प्रकाशित रिपोर्ट में 20 से अधिक लोगों के शामिल होने का उल्लेख है। इसलिए समूह की वास्तविक संख्या की पुष्टि होना बाकी है। पीड़ित का आरोप है कि हमला जमीन से जुड़े विवाद के कारण किया गया। मामले में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हथियारों से मारपीट करने की शिकायत भी सामने आई है। आरोपियों की भूमिका और घटनाक्रम की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि मौके पर कितने लोग मौजूद थे और किन लोगों ने हमला किया।

घटना गुरुवार को न्यनप्पनहल्ली में हुई। 33 वर्षीय भैरेगौड़ा ने शिकायत में बताया कि उन्होंने अक्टूबर 2025 में यहां भूखंड खरीदा था। जमीन पर शेड और चारदीवारी बनवाने के साथ सीसीटीवी कैमरे तथा बिजली कनेक्शन लगवाया था। घटना वाले दिन मोबाइल पर कैमरों की निगरानी बंद दिखाई देने पर वह मौके पर पहुंचे। वहां कैमरे, बिजली मीटर और प्रवेश द्वार क्षतिग्रस्त मिले। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, हत्या के प्रयास सहित अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया गया है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।

पीड़ित के मुताबिक, वह जमीन पर हुए नुकसान के बारे में जानकारी जुटा रहे थे, तभी लोगों का समूह वहां पहुंचा और उनकी ओर बढ़ा। स्थिति बिगड़ती देखकर उन्होंने शेड के भीतर जाकर दरवाजा बंद करने की कोशिश की। उनका आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें सुरक्षित रहने का मौका नहीं मिला। समूह में शामिल लोगों ने शेड का दरवाजा और उसका ढांचा क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद उन्हें बाहर खींचकर मारपीट की गई। शिकायत में हमले के दौरान हथियारों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है।

माइको लेआउट निवासी भैरेगौड़ा के अस्पताल में भर्ती होने के बाद पुलिस ने मेडिको-लीगल केस के आधार पर उनका बयान लिया। अस्पताल में दर्ज बयान घटना का महत्वपूर्ण विवरण है, लेकिन शिकायत में लगाए गए आरोपों का सत्यापन अन्य साक्ष्यों से होना बाकी है। उपचार से जुड़े दस्तावेज चोटों के बारे में जानकारी देंगे। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए उन्हें लगी चोटों की गंभीरता या उपचार की अवधि के बारे में निश्चित दावा नहीं किया जा सकता।

घटना का संबंध जिस जमीन विवाद से बताया जा रहा है, उससे जुड़ा सिविल मामला भी उल्लेखित है। हालांकि, उस मुकदमे का नंबर, संबंधित पक्षों का पूरा विवरण और अदालत में उसकी वर्तमान स्थिति सामने नहीं आई है। जमीन पर किस पक्ष का क्या दावा है, यह भी उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं होता। ऐसे में संपत्ति के स्वामित्व या कब्जे को लेकर किसी पक्ष के दावे को अंतिम निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। हमला करने के आरोप और जमीन के अधिकार का विवाद, दोनों की तथ्यात्मक स्थिति अलग-अलग स्पष्ट होनी है।

इस मामले में घटनास्थल की स्थिति भी अहम है। पीड़ित ने शेड का दरवाजा तोड़े जाने और बाहर खींचकर हमला करने की बात कही है। यदि मौके पर मौजूद लोगों के बयान या अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध होते हैं, तो उनसे घटनाक्रम समझने में मदद मिल सकती है। फिलहाल किसी प्रत्यक्षदर्शी का विस्तृत बयान सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसी तरह, घटना का प्रमाणित वीडियो सामने आने की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। सीसीटीवी उपकरणों को नुकसान पहुंचाने के आरोप के कारण निगरानी रिकॉर्ड की उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण सवाल है।

तीन लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद पूरे समूह की पहचान और प्रत्येक व्यक्ति की कथित भूमिका स्पष्ट नहीं हुई है। यह भी सामने नहीं आया है कि गिरफ्तार लोगों ने आरोपों पर क्या पक्ष रखा है। शिकायत में सामूहिक हमले का आरोप होने के कारण जांच में यह देखना आवश्यक होगा कि किन लोगों ने मारपीट की, कौन संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल था और अन्य लोग किस भूमिका में वहां मौजूद थे। केवल घटनास्थल पर मौजूद होने और हमले में सक्रिय भागीदारी के बीच का अंतर भी तथ्यों से ही तय होगा।

फिलहाल मामले की मुख्य कड़ी घायल वकील का बयान है। उनका आरोप है कि जमीन पर बने शेड में शरण लेने के बाद भी समूह ने उन्हें निशाना बनाया। अस्पताल में उपचार, तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और अन्य लोगों की तलाश के बीच घटना के कई पहलुओं की पुष्टि बाकी है। आगे मिलने वाले साक्ष्यों से जमीन विवाद की पृष्ठभूमि, हमले का क्रम और आरोपियों की भूमिका अधिक स्पष्ट होगी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी आरोपी को दोषी घोषित नहीं किया जा सकता।

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